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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   UP: Attack on children's health, born with heart disease, being treated in LLRM Medical College

UP: बच्चों की सेहत पर वार, जन्मजात हो रहे दिल के बीमार, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में किया जा रहा इलाज

Tue, 29 Aug 2023 12:15 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 29 Aug 2023 12:15 PM IST
सार

मेरठ में बच्चों के दिल में छेद होने की बीमारी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिन बच्चों के दिल के पर्दे में छेद होता है, उनका इलाज ओपन हार्ट सर्जरी से किया जाता है।

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विस्तार

ढाई साल की आराध्या दौराला निवासी प्रदीप की बेटी है। इसके दिल में जन्मजात छेद था। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में बच्ची का सफल ऑपरेशन किया गया। इस तरह की परेशानी झेलने वाली आराध्या अकेली नहीं है। बच्चों में जन्मजात हृदय रोग के लगातार मामले सामने आ रहे हैं।

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नौनिहाल जन्मजात हृदय रोग (कंजाइटल हार्ट डिजीज) के शिकार हो रहे हैं। ऐसा होने के चिकित्सक कई कारण मानते हैं। चिकित्सक इन बीमारियों के प्रति जागरूक रहने की सलाह देते हैं। मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शशांक पांडे ने बताया कि बच्चों में दिल का छेद होने की बीमारी के मामले काफी संख्या में सामने आ रहे हैं। 
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यह एक विकास दोष (डेवलपमेंटल डिफेक्ट) है, मतलब जब बच्चा मां के पेट में बढ़ रहा होता है, तब दिल का विकास एक छोटे से ट्यूब से होता है। इस ट्यूब के अंदर कभी-कभी एक ट्विस्ट आ जाता है, जिससे वहां एक विभाजन हो जाता है।

जब इस विभाजन के बनने में कोई प्रॉब्लम आती है, तब इसको दिल का छेद बोला जाता है। हृदय के बाएं और दाएं हिस्से को बांटने वाले विभाजन में कुछ जगह रह जाती है। बायीं साइड में जो प्रेशर वाला खून है वो दाहिनी तरफ चला जाता है।

मेडिकल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरज सोनी ने बताया कि दिल के छेद में बच्चे के दिल और फेफड़ों पर प्रेशर पड़ता है। ऐसे बच्चों में जन्म के बाद सांस फूलना, दूध पीते ही थक जाना, पसीना ज्यादा आना, वजन कम बढ़ना, बार-बार सर्दी, कफ और निमोनिया जैसी समस्या होती है। जिन बच्चों में छेद बड़े होते हैं उनमें छोटी उम्र में ही फेफड़े हमेशा के लिए खराब हो जाते हैं।

जिन बच्चों के दिल के पर्दे में छेद होता है, उनका इलाज ओपन हार्ट सर्जरी से किया जाता है। इसके अलावा बिना ऑपरेशन के तरीके में हाथ या पैर की नसों में एक यंत्र डाला जाता है, ये यंत्र दिल तक पहुंचाया जाता है। उसके बाद छेद को बंद किया जाता है।

मेडिकल में इन बच्चों को मिला नया जीवन 
29 जुलाई 2023 : ढाई साल की आराध्या 
07 जून 2023 : दो साल की लक्षी, दो साल की एंजल 
06 मई 2023 : अयन 12 साल
12 मई 2023 : ध्रुवी साढ़े तीन साल
09 मई 2022 : रिदा 9 माह और निधि 9 साल

जन्मजात हृदय रोग के कारण
चिकित्सकों का कहना है कि पूरी तरह से यह कहना तो संभव नहीं है कि किस कारण से दिल का छेद होता है, लेकिन आनुवांशिक कारण, वायरल संक्रमण, कुछ दवाएं, गर्भवती महिलाओं का शराब, धूम्रपान का सेवन आदि के कारण यह समस्या हो सकती है।

 
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