अव्यवस्था : मेरठ जिला अस्पताल में दो साल पहले बन गई यूनिट, एमआरआई का अब तक इंतजार
एमआरआई एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की सहायता से शरीर के अंगों एवं उनकी कोशिकाओं का स्पष्ट एवं विस्तृत चित्र बनाया जाता है। इस चित्र के माध्यम से शरीर की काफी परेशानियों का पता लगाया जा सकता है।
विस्तार
मेरठ जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट बने हुए करीब दो साल हो गए, लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है। मरीजों को मेगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के लिए या तो मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है या फिर निजी लैब में महंगी जांच कराने को मजबूर होना पड़ता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट बनाई थी। दावा किया गया था कि यूनिट बनने के बाद करीब सात करोड़ रुपये की एमआरआई मशीन यहां लगाई जाएगी। साथ ही चिकित्सक और अन्य स्टाफ भी नियुक्त होगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका है। जिला अस्पताल प्रबंधन कई बार शासन को अवगत करा चुका है।
निजी सेंटर पर एमआरआई के तीन से 25 हजार रुपये तक लिए जाते हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के लिए यह मुफ्त है और बाकी से दो हजार रुपये शुल्क लिया जाता है। जिला अस्पताल में अगर यह सुविधा शुरू हो जाती है तो हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा। मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा। जिला अस्पताल में हर साल पांच से छह लाख मरीज आते हैं।
यह है तकनीक
एमआरआई एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की सहायता से शरीर के अंगों एवं उनकी कोशिकाओं का स्पष्ट एवं विस्तृत चित्र बनाया जाता है। इस चित्र के माध्यम से शरीर की काफी परेशानियों का पता लगाया जा सकता है।
ये रेडिएशन के बजाय मैग्नेटिक फील्ड पर काम करता है, इसलिए एक्सरे और सीटी स्कैन से अलग है। शरीर के कौन से और कितने हिस्से की जांच करनी है। सामान्यता 20 मिनट से डेढ़ घंटा तक स्कैनिंग में लगता है।
सटीक जानकारी मिलती है
एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धमनियों के ब्लॉकेज और जेनेटिक डिसऑर्डर का पता लगाने में होता है। बीमारी की सटीक जानकारी लिए यह जांच होती है।
एमआरआई यूनिट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत शुरू की जाएगी। शासन स्तर से ही तय होना है कब और कौन इसे संचालित करेगा। - डॉ. कौशलेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक