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अव्यवस्था : मेरठ जिला अस्पताल में दो साल पहले बन गई यूनिट, एमआरआई का अब तक इंतजार

Sat, 26 Jun 2021 05:48 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 26 Jun 2021 05:48 PM IST
सार

एमआरआई  एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की सहायता से शरीर के अंगों एवं उनकी कोशिकाओं का स्पष्ट एवं विस्तृत चित्र बनाया जाता है। इस चित्र के माध्यम से शरीर की काफी परेशानियों का पता लगाया जा सकता है।

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Unit was built in Meerut district hospital two years ago, Patients are still waiting for MRI
मेरठ जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट बने हुए करीब दो साल हो गए, लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है। मरीजों को मेगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के लिए या तो मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है या फिर निजी लैब में महंगी जांच कराने को मजबूर होना पड़ता है।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट बनाई थी। दावा किया गया था कि यूनिट बनने के बाद करीब सात करोड़ रुपये की एमआरआई मशीन यहां लगाई जाएगी। साथ ही चिकित्सक और अन्य स्टाफ भी नियुक्त होगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका है। जिला अस्पताल प्रबंधन कई बार शासन को अवगत करा चुका है। 
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निजी सेंटर पर एमआरआई के तीन से 25 हजार रुपये तक लिए जाते हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के लिए यह मुफ्त है और बाकी से दो हजार रुपये शुल्क लिया जाता है। जिला अस्पताल में अगर यह सुविधा शुरू हो जाती है तो हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा। मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा। जिला अस्पताल में हर साल पांच से छह लाख मरीज आते हैं।

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यह है तकनीक 
एमआरआई एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की सहायता से शरीर के अंगों एवं उनकी कोशिकाओं का स्पष्ट एवं विस्तृत चित्र बनाया जाता है। इस चित्र के माध्यम से शरीर की काफी परेशानियों का पता लगाया जा सकता है।

ये रेडिएशन के बजाय मैग्नेटिक फील्ड पर काम करता है, इसलिए एक्सरे और सीटी स्कैन से अलग है। शरीर के कौन से और कितने हिस्से की जांच करनी है। सामान्यता 20 मिनट से डेढ़ घंटा तक स्कैनिंग में लगता है।

सटीक जानकारी मिलती है 
एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धमनियों के ब्लॉकेज और जेनेटिक डिसऑर्डर का पता लगाने में होता है। बीमारी की सटीक जानकारी लिए यह जांच होती है। 

एमआरआई यूनिट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत शुरू की जाएगी। शासन स्तर से ही तय होना है कब और कौन इसे संचालित करेगा। - डॉ. कौशलेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक

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