उलमा बोले- समान नागरिक संहिता व दो बच्चों का कानून इस्लाम के खिलाफ, जनसंख्या नियंत्रण मुद्दे पर इंदिरा गांधी भी हो गई थीं फेल 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 11 Jul 2021 11:24 AM IST

सार

कारी सलमान कासमी का कहना है कि सभी धर्मों में लोगों को जीने के अधिकार दिए गए हैं। ऐसे में मजहबी कानून में बदलाव संभव नहीं है। दोनों मामलों को लागू करने से पहले सरकार को विचार करना चाहिए। 
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विस्तार

देश में समान नागरिक संहिता (कॉमन सिविल कोड) व दो बच्चों के कानून को लेकर उलमाओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दोनों मुद्दों को इस्लाम के खिलाफ बताया है। शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने समान नागरिक संहिता को सही बताते हुए केंद्र सरकार को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने दो बच्चों का कानून लागू करने को लेकर मसौदा तैयार किया है।
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उलमाओं का कहना है संविधान में सर्वधर्म के लोगों को मजहब के अनुसार जीवन जीने का हक दिया है। ऐसे में समान नागरिक संहिता व दो बच्चों का कानून लागू करना मुस्लिम ही नहीं सभी धर्म के लोगों के साथ नाइंसाफी होगी। कहा कि जनसंख्या कानून लागू करने पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी फेल हो गई थीं। वर्तमान सरकार भी मामले में टिक नहीं पाएगी। ऐसे में केंद्र व प्रदेश सरकार को दोनों मुद्दों पर विचार करना होगा।

 
संविधान के है खिलाफ 
समान नागरिक संहिता लागू करने से मजहबी कानून को रोका जाता है तो ये संविधान के खिलाफ है। पर्सनल लॉ कुरान से लिए गए हैं, जिससे समान नागरिक संहिता लागू करना मुनासिब ही नहीं है। बढ़ती जनसंख्या अगर समस्या बन रही है तो इस्लाम में जनसंख्या नियंत्रण पर विचार किया जा सकता है, लेकिन कानून बनाकर दबाव डालना गलत है। -शहरकाजी प्रोफेसर जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी

मुस्लिमों पर नहीं होगी लागू
समान नागरिक संहिता मुस्लिमों पर लागू ही नहीं होगी। हिंदुस्तान में सभी धर्म के लोगों को अपने-अपने तरीके से जीने को अधिकार संविधान देता है। जनसंख्या नियंत्रण मुद्दे में तो इंदिरा गांधी भी कामयाब नहीं हुई थी। जनता ने पूरी तरह नकार दिया था। दोनों मुद्दे पूरी तरह इस्लाम के खिलाफ हैं। इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।  -कारी शफीकुर्रहमान कासमी 

सरकार को विचार करना चाहिए  
दोनों मुद्दों को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार को विचार करना चाहिए। संविधान सभी धर्म के लोगों को समान जीने का अधिकार देता है। संविधान के खिलाफ कोई भी कानून लाने से पहले सभी धर्मों के गुरुओं व उलमाओं से मशवरा जरूर करना चाहिए। - मौलाना मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी, प्रधानाचार्य मदरसा इमदादुल इस्लाम
 
मजहबी कानून में बदलाव संभव नहीं
समान नागरिक संहिता व दो बच्चों का कानून दोनों मामले इस्लामिक तौर पर गलत हैं, मुस्लिमों में शादी करने का अलग तरीका है और हिंदू धर्म में अलग। सभी धर्मों में लोगों को जीने के अधिकार दिए गए हैं। ऐसे में मजहबी कानून में बदलाव संभव नहीं है। दोनों मामलों को लागू करने से पहले सरकार को विचार करना चाहिए।  -कारी सलमान कासमी, जमीयत उलमा ए हिंद मंत्री मेरठ इकाई
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