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Meerut News: मुजफ्फरनगर - जानलेवा हमला करने के दो आरोपी किए दोषमुक्त
Fri, 29 Mar 2024 11:36 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Fri, 29 Mar 2024 11:36 PM IST
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- 18 साल पूर्व शाहपुर थाना क्षेत्र के बरवाला में हुई थी घटना
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। अदालत ने जानलेवा हमला करने के दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। 18 साल पुराने मुकदमे में अपर सत्र न्यायालय कोर्ट नंबर-1 के पीठासीन अधिकारी रजनीश कुमार फैसला सुनाया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ठाकुर अभिनव सिंह ने बताया घटना मार्च वर्ष 2006 की है। शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव बरवाला निवासी वादी गरीब दास ने अपने पुत्र मिंटू पर जानलेवा हमला करने की नीयत से फायर कर घायल करने का आरोप लगाया था। जिसमें गांव के रामधन और गंभीर के खिलाफ तहरीर दी लेकिन पुलिस ने मुकदमा कायम नहीं किया। उसके बाद अदालत के आदेश में दो अप्रैल 2006 को थाने में दोनों के खिलाफ मुकदमा कायम किया गया।
विवचेना के बाद पुलिस ने रंजिश में आरोपियों की नामजदगी झूठा पाते हुए न्यायालय में अंतिम आख्या प्रस्तुत कर दी। वादी की प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र पर अवर न्यायालय ने दिसंबर 2006 में अंतिम आख्या निरस्त करते हुए दोनों आरोपियों का तलब किया। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादी गरीबदास, चुटैल मिंटू, सुरेश आदि छह गवाहों की साक्ष्य हुई। अदालत ने दाेनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपी रामधन और गंभीर को साक्षियों की साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद संदेह का लाभ देते हुए दोनों को बरी कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। अदालत ने जानलेवा हमला करने के दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। 18 साल पुराने मुकदमे में अपर सत्र न्यायालय कोर्ट नंबर-1 के पीठासीन अधिकारी रजनीश कुमार फैसला सुनाया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ठाकुर अभिनव सिंह ने बताया घटना मार्च वर्ष 2006 की है। शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव बरवाला निवासी वादी गरीब दास ने अपने पुत्र मिंटू पर जानलेवा हमला करने की नीयत से फायर कर घायल करने का आरोप लगाया था। जिसमें गांव के रामधन और गंभीर के खिलाफ तहरीर दी लेकिन पुलिस ने मुकदमा कायम नहीं किया। उसके बाद अदालत के आदेश में दो अप्रैल 2006 को थाने में दोनों के खिलाफ मुकदमा कायम किया गया।
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विवचेना के बाद पुलिस ने रंजिश में आरोपियों की नामजदगी झूठा पाते हुए न्यायालय में अंतिम आख्या प्रस्तुत कर दी। वादी की प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र पर अवर न्यायालय ने दिसंबर 2006 में अंतिम आख्या निरस्त करते हुए दोनों आरोपियों का तलब किया। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादी गरीबदास, चुटैल मिंटू, सुरेश आदि छह गवाहों की साक्ष्य हुई। अदालत ने दाेनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपी रामधन और गंभीर को साक्षियों की साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद संदेह का लाभ देते हुए दोनों को बरी कर दिया।
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