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बैंक तक सुरंग बन गयी, सोता रहा पुलिस का सूचना तंत्र
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Sep 2017 01:22 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दिल्ली रोड पर बहादुर मोटर्स के पास स्थित यूनाइटेड बैंक की शाखा में नाले से सुरंग बन गयी और पुलिस का मुखबिर तंत्र सोता रह गया। करीब 15 फीट लंबी सुरंग एक रात में तो बन नहीं गयी होगी। अपनी सक्रियता की पोल खुलने के बाद पुलिस मान रही है कि चोरों को सुरंग बनाने में करीब एक सप्ताह तो लगा होगा।
मौके पर पहुंची टीपी नगर पुलिस तो पहले मानने को तैयार नहीं थी कि इस सुरंग से बैंक के अंदर घुसा भी जा सकता है। लेकिन जब क्राइम ब्र्रांच की टीम ने सुरंग की चौड़ाई नपवाई तो वह करीब पौने दो फीट निकली, जिसमें आसानी से घुसा जा सकता है। नाले के बैंक वाले सिरे की ओर दीवार में कुंबल करके यह सुरंग बनाई गई थी।
एक्सपर्ट थे ये चोर
बैंक में खुली इस सुरंग को चेक करने पर पता चला कि वहां पर मलबा नहीं था। केवल बैंक के फर्श पर लगी टाइल्स के टूटे टुकड़े वहां पडे़ थे। साफ है कि चोर एक्सपर्ट थे और पूरी प्लानिंग के साथ धीरे-धीरे सुरंग बनाते रहे और उसका मलबा नाले में ही बहाते रहे। नाले में जहां कुंबल था, वहां पर नाले की गहराई भी कम मिली, जबकि आगे ये नाला गहरा था।
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पेचकस भी साथ लाए थे
चोरों ने स्ट्रांग रूम का गेट खोलने में पेचकस का प्रयोग किया था, जबकि दीवारों पर किसी भारी चीज से प्रहार किए। हालांकि तमाम प्रयासों के बावजूद स्ट्रांग रूम का गेट खोलने या तोड़ने में कामयाबी नहीं मिली। चोर अपने साथ पेचकस लाए थे, जिससे उन्होंने सीपीयू से हार्ड डिस्क निकाली। चोर सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर ही ले गए, जो बैंक के सहायक प्रबंधक की टेबल के पास लगी थी, इसे भी बड़ी सफाई से निकाला गया।
कई शाखाओं में यही चुनी
मेरठ। दिल्ली रोड पर फुटबॉल चौक से लेकर रिठानी के बीच 20 से ज्यादा बैंक शाखाएं ऑन रोड होने के साथ नाले के किनारे हैं। इनमें यूनाइटेड बैंक की शाखा नाले के सबसे नजदीक है। बैंक के मेन गेट से नाले की दूरी 10-12 फीट होगी। नाले से ही बैंक का चबूतरा सटा है और इसी के नीचे से बैंक में सेंध लगानी आसान थी। इस वारदात के बाद नालों के किनारे बनीं अन्य बैंक शाखाओं और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर भी सवाल खडे़ हो रहे हैं।
लाखों का कैश, 100 से ज्यादा लॉकर
बैंक शाखा के स्ट्रांग रूम में लाखों रुपये कैश और 100 से ज्यादा लॉकरों में ग्राहकों का कीमती सामान व जेवरात थे। बैंक के अंदर दाखिल होने में सफल होने वाले चोर स्ट्रांग रूम खोलने में अनट्रेंड निकले। लेकिन पुलिस की सक्रियता की पोल जरूर खोल गए। पुलिस के अनुसार चोरों को बैंक के अंदर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। यह भी अनुभव नहीं था कि बैंक का स्ट्रांग रूम और लॉकर कैसे खुलेंगे। नाले की गंदगी में बैठकर करीब एक सप्ताह सुरंग खोदने में लगा होगा। लेकिन स्ट्रांग रूम तक पहुंचकर फेल हो गए।
लोकल के हो सकते बदमाश
पुलिस इन चोरों को लोकल का मानकर चल रही है, जिसके चलते टीपीनगर, ब्रह्मपुरी और लिसाड़ी गेट के चोरों का रिकॉर्ड खंगाला है। मेरठ पुलिस मोदीनगर पुलिस की मदद भी ले सकती है।
गश्त पर उठे सवाल
बदमाश बैंक तक पहुंच गए थे। चोरी होने में कोई कसर भी नहीं बची थी। सवाल उठता है कि दिल्ली रोड पर टीपी नगर और ब्रह्मपुरी थाने की पुलिस रात भर गश्त करने का दावा करती है। दिल्ली रोड पर यूपी 100 की गाड़ी अलग से गश्त करती है। लेकिन इसकी भनक उनको नहीं लगी। लोगों का कहना है कि पुलिस की ऐसी गश्त का क्या फायदा कि बदमाशों के बारे में जानकारी न हो सके।
लॉकर में हमारे बच्चों के सपने, बस एक बार चेक करा दो
मेरठ। बुधवार सुबह जब बैंक के ग्राहकों को सुरंग का पता चला तो उनमें हड़कंप मच गया। सारे काम छोड़कर वे शाखा में पहुंच गए। प्रबंधक से कहा कि साहब! आप बस हमारे लॉकर खुलवाकर दिखवा दो। उनमें हमारी जीवन भर की जमा पूंजी है। हमारेे बच्चों के सपने है। इसी से बेटी की शादी करनी है। बेटे को रोजगार कराना है। यदि ये चला गया तो हम तो कहीं के नहीं रहेंगे।
सरस्वती लोक के विकास, ब्रह्मपुरी के व्यापारी अरुण अग्रवाल उनकी पत्नी श्वेता अग्रवाल, ब्रह्मपुरी शारदा रोड के रोहित, देवलोक कालोनी के विजय गुप्ता, दशमेश नगर की गीता सहित दर्जनों खाताधारक अपने लॉकर चेक करने आए थे। इन लोगों ने सीओ ब्रह्मपुरी से कहा कि इन लॉकर में उनके जीवन भर की जमा पूंजी है। यदि ये सब चला गया तो वे कहीं के नहीं रहेंगे। बैंक वाले भी कुछ साफ नहीं बता रहे। कहा कि मोदीनगर में भी इसी तरह सुरंग बनाकर बैंक में चोरी हुई थी। लॉकर तोड़कर चोर जेवर ले गए थे। लेकिन बैंक ने किसी का हर्जाना नहीं दिया। बैंक कहता है कि लॉकर की जिम्मेदारी उनकी नहीं होती। अब यदि दो दिन बाद बैंक वाले कहने लगे कि उनके लॉकर से भी सामान चोरी हो गया तो वे क्या करेंगे।
लोगों ने सीओ से कहा कि वह बस अंदर ले जाकर दिखा दें कि उनके लॉकर सुरक्षित हैं। उनके मन को तसल्ली हो जाएगी। ऐसे खाताधारकों को बैंक के चीफ मैनेजर श्याम प्रकाश, शाखा प्रबंधक और सीओ ब्रह्मपुरी ने संतुष्ट किया कि बैंक का कैश और उनके लॉकर सेफ है। किसी का कोई नुकसान नहीं हुआ। दोपहर बाद वीडियोग्राफी के बीच स्ट्रांग रूम और लॉकर चेक किए गए तो सभी सुरक्षित मिले।
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मौके पर पहुंची टीपी नगर पुलिस तो पहले मानने को तैयार नहीं थी कि इस सुरंग से बैंक के अंदर घुसा भी जा सकता है। लेकिन जब क्राइम ब्र्रांच की टीम ने सुरंग की चौड़ाई नपवाई तो वह करीब पौने दो फीट निकली, जिसमें आसानी से घुसा जा सकता है। नाले के बैंक वाले सिरे की ओर दीवार में कुंबल करके यह सुरंग बनाई गई थी।
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एक्सपर्ट थे ये चोर
बैंक में खुली इस सुरंग को चेक करने पर पता चला कि वहां पर मलबा नहीं था। केवल बैंक के फर्श पर लगी टाइल्स के टूटे टुकड़े वहां पडे़ थे। साफ है कि चोर एक्सपर्ट थे और पूरी प्लानिंग के साथ धीरे-धीरे सुरंग बनाते रहे और उसका मलबा नाले में ही बहाते रहे। नाले में जहां कुंबल था, वहां पर नाले की गहराई भी कम मिली, जबकि आगे ये नाला गहरा था।
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पेचकस भी साथ लाए थे
चोरों ने स्ट्रांग रूम का गेट खोलने में पेचकस का प्रयोग किया था, जबकि दीवारों पर किसी भारी चीज से प्रहार किए। हालांकि तमाम प्रयासों के बावजूद स्ट्रांग रूम का गेट खोलने या तोड़ने में कामयाबी नहीं मिली। चोर अपने साथ पेचकस लाए थे, जिससे उन्होंने सीपीयू से हार्ड डिस्क निकाली। चोर सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर ही ले गए, जो बैंक के सहायक प्रबंधक की टेबल के पास लगी थी, इसे भी बड़ी सफाई से निकाला गया।
कई शाखाओं में यही चुनी
मेरठ। दिल्ली रोड पर फुटबॉल चौक से लेकर रिठानी के बीच 20 से ज्यादा बैंक शाखाएं ऑन रोड होने के साथ नाले के किनारे हैं। इनमें यूनाइटेड बैंक की शाखा नाले के सबसे नजदीक है। बैंक के मेन गेट से नाले की दूरी 10-12 फीट होगी। नाले से ही बैंक का चबूतरा सटा है और इसी के नीचे से बैंक में सेंध लगानी आसान थी। इस वारदात के बाद नालों के किनारे बनीं अन्य बैंक शाखाओं और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर भी सवाल खडे़ हो रहे हैं।
लाखों का कैश, 100 से ज्यादा लॉकर
बैंक शाखा के स्ट्रांग रूम में लाखों रुपये कैश और 100 से ज्यादा लॉकरों में ग्राहकों का कीमती सामान व जेवरात थे। बैंक के अंदर दाखिल होने में सफल होने वाले चोर स्ट्रांग रूम खोलने में अनट्रेंड निकले। लेकिन पुलिस की सक्रियता की पोल जरूर खोल गए। पुलिस के अनुसार चोरों को बैंक के अंदर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। यह भी अनुभव नहीं था कि बैंक का स्ट्रांग रूम और लॉकर कैसे खुलेंगे। नाले की गंदगी में बैठकर करीब एक सप्ताह सुरंग खोदने में लगा होगा। लेकिन स्ट्रांग रूम तक पहुंचकर फेल हो गए।
लोकल के हो सकते बदमाश
पुलिस इन चोरों को लोकल का मानकर चल रही है, जिसके चलते टीपीनगर, ब्रह्मपुरी और लिसाड़ी गेट के चोरों का रिकॉर्ड खंगाला है। मेरठ पुलिस मोदीनगर पुलिस की मदद भी ले सकती है।
गश्त पर उठे सवाल
बदमाश बैंक तक पहुंच गए थे। चोरी होने में कोई कसर भी नहीं बची थी। सवाल उठता है कि दिल्ली रोड पर टीपी नगर और ब्रह्मपुरी थाने की पुलिस रात भर गश्त करने का दावा करती है। दिल्ली रोड पर यूपी 100 की गाड़ी अलग से गश्त करती है। लेकिन इसकी भनक उनको नहीं लगी। लोगों का कहना है कि पुलिस की ऐसी गश्त का क्या फायदा कि बदमाशों के बारे में जानकारी न हो सके।
लॉकर में हमारे बच्चों के सपने, बस एक बार चेक करा दो
मेरठ। बुधवार सुबह जब बैंक के ग्राहकों को सुरंग का पता चला तो उनमें हड़कंप मच गया। सारे काम छोड़कर वे शाखा में पहुंच गए। प्रबंधक से कहा कि साहब! आप बस हमारे लॉकर खुलवाकर दिखवा दो। उनमें हमारी जीवन भर की जमा पूंजी है। हमारेे बच्चों के सपने है। इसी से बेटी की शादी करनी है। बेटे को रोजगार कराना है। यदि ये चला गया तो हम तो कहीं के नहीं रहेंगे।
सरस्वती लोक के विकास, ब्रह्मपुरी के व्यापारी अरुण अग्रवाल उनकी पत्नी श्वेता अग्रवाल, ब्रह्मपुरी शारदा रोड के रोहित, देवलोक कालोनी के विजय गुप्ता, दशमेश नगर की गीता सहित दर्जनों खाताधारक अपने लॉकर चेक करने आए थे। इन लोगों ने सीओ ब्रह्मपुरी से कहा कि इन लॉकर में उनके जीवन भर की जमा पूंजी है। यदि ये सब चला गया तो वे कहीं के नहीं रहेंगे। बैंक वाले भी कुछ साफ नहीं बता रहे। कहा कि मोदीनगर में भी इसी तरह सुरंग बनाकर बैंक में चोरी हुई थी। लॉकर तोड़कर चोर जेवर ले गए थे। लेकिन बैंक ने किसी का हर्जाना नहीं दिया। बैंक कहता है कि लॉकर की जिम्मेदारी उनकी नहीं होती। अब यदि दो दिन बाद बैंक वाले कहने लगे कि उनके लॉकर से भी सामान चोरी हो गया तो वे क्या करेंगे।
लोगों ने सीओ से कहा कि वह बस अंदर ले जाकर दिखा दें कि उनके लॉकर सुरक्षित हैं। उनके मन को तसल्ली हो जाएगी। ऐसे खाताधारकों को बैंक के चीफ मैनेजर श्याम प्रकाश, शाखा प्रबंधक और सीओ ब्रह्मपुरी ने संतुष्ट किया कि बैंक का कैश और उनके लॉकर सेफ है। किसी का कोई नुकसान नहीं हुआ। दोपहर बाद वीडियोग्राफी के बीच स्ट्रांग रूम और लॉकर चेक किए गए तो सभी सुरक्षित मिले।