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Meerut News: बारिश से आफत...छह मकानों की छत गिरी, दंपती सहित तीन घायल
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मेरठ/दौराला/खरखौदा। जिले में पिछले 48 घंटों में हुई बारिश के बाद दौराला, खरखौदा और शहर के छावनी क्षेत्र में छह मकानों की छत गिर गई। हादसों में दंपती समेत तीन लोग घायल हो गए। गनीमत रही कि कई लोग बच गए। हाल ही में जॉकिर कॉलोनी में तीन मंजिला मकान गिरने से 10 लोगों की मौत के बाद से भी ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। जर्जर मकानों में लोगों की जान खतरे में हैं।
दौराला में डेयरी कॉलोनी में बुधवार देर रात मजदूर प्रमोद का लिंटर वाला मकान बारिश के चलते गिर गया। हादसे में प्रमोद, उसकी पत्नी सुनीता और बेटा अजीत मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गया। धमाके की आवाज सुनकर मौके पर एकत्रित हुए पड़ोसियों ने किसी तरह तीनों को बाहर निकाला और सीएचसी दौराला में भर्ती कराया।
प्रमोद ने बताया कि वह, पत्नी सुनीता व बेटे अजीत के साथ गेट के पास बरामदे में सोया हुआ था, जबकि अजय और आरजू अंदर कमरे में सोए हुए थे और आदित्य मोदीपुरम किसी काम से गया था। देर रात अचानक बरामदे की ओर वाला हिस्सा गिरता नजर आया तो वह तेजी से गेट की तरफ भागा, लेकिन एकदम छत का लिंटर उनके ऊपर आ गिरा। पत्नी सुनीता व बेटे अजीत की चीख निकल गई। लिंटर और एक दीवार का मलबा खेत की ओर गिरा, जबकि दूसरी दीवार का मलबा उसके छोटे भाई मनोज के घर में गिर गया।
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इस मकान के बराबर में ही छोटे भाई मनोज का परिवार रहता है। तीन दिन पहले मनोज का साला जड़ौदा मुजफ्फरनगर निवासी मोनू आया था। मोनू बाहर की ओर भागा। उसने बताया कि सबसे पहले उन्होंने प्रमोद को बाहर निकाला और बाद में सुनीता को। लगभग एक घंटे के बाद मलबे से अजीत को बाहर निकाला गया। बाद में तीनों को सीएचसी दौराला में भर्ती कराया गया। सुनीता के सिर में 15 टांके आए हैं। जानकारी मिलने पर बृहस्पतिवार को नायब तहसीलदार राहुल मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। उन्होंने परिजनों को सरकार से मदद दिलाए जाने का आश्वासन दिया। पूर्व चेयरपर्सन के पति नवीन शर्मा, ओमप्रकाश पाल, जिला पंचायत सदस्य प्रताप लोईया भी घायलों का हाल जानने पहुंचे। वहीं, भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष नवाब सिंह अहलावत ने कहा कि प्रमोद के मकान के बराबर में खेत है और खेत के पास मिल का गंदा पानी आता है। पानी आने से नींव कमजोर हुई। इस कारण मकान गिर गया।
वहीं, खरखौदा में लोहिया नगर थानाक्षेत्र के गांव जाहिदपुर में एक मकान भरभराकर गिर गया। इसका समय से आभास होने के कारण परिवार के सात सदस्यों की जान बच गई। गांव जाहिदपुर निवासी इकबाल मजदूरी करता है। उसका दो कमरों का मकान है। यह बेहद पुराना है। मकान काफी नीचा भी है। बरसात होते ही मकान में जलभराव होने लगा। बुधवार रात इकबाल अपनी पत्नी हसीना और पांच बच्चों के साथ सो रहा था, लेकिन बृहस्पतिवार तड़के करीब 3:30 बजे इकबाल को कुछ आवाज का आभास हुआ। वह परिवार के सभी सदस्यों को लेकर मकान से बाहर निकल गया। तभी मकान पूरी तरह से गिर गया। बाद में शोर सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हुए, लेकिन परिवार को सकुशल देख सभी ने राहत की सांस ली। इसके अलावा छावनी क्षेत्र में चार जर्जर मकान की छत और अन्य हिस्से गिर गए। गनीमत रही कि इनमें बच्चों सहित अन्य कई लोगों की जान बच गई।
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छावनी में जर्जर भवनों का निर्माण नहीं, चार मकानों की छत गिरी
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। छावनी क्षेत्र में जर्जर भवनों के नए निर्माण के आवेदन दिए गए हैं, लेकिन अब तक निर्माण की अनुमति नहीं मिल पा रही है। वहीं, मकान मालिक और किराएदार के विवाद और बंटवारे की खींचतान में भी जर्जर भवन के निर्माण नहीं हो रहे हैं। इन हालात में ही इस क्षेत्र के चार मकानों की छत और अन्य हिस्से गिर गए। गनीमत रही कि यहां सभी लोगों की जान बच गई।
ढाई साल के बच्चे को लेकर दौड़ी मां
छावनी में सोफिया स्कूल के सामने कोठी संख्या 98-डी में एडवर्ट फिलिप का परिवार रहता है। उनकी पुत्रवधू वरजीनिया ने बताया कि वह दीवान स्कूल में शिक्षिका हैं। बीती रात वह कमरे में थीं। उनके साथ ढाई साल का बच्चा ओबिन और सात साल का ऑस्टिन था। अचानक घर की छत से मिट्टी गिरने लगी। वरजीनिया ने बताया कि वह दोनों बच्चों को लेकर कमरे से बाहर दौड़ीं। इसी दौरान कमरे की छत गिर गई। उन्होंने बताया कि कई बार मकान निर्माण के लिए छावनी परिषद में प्रार्थना पत्र दिया है, लेकिन निर्माण ही अनुमति नहीं मिल रही है।
कैंसर मरीज के सिर से छिन गई छत
रजबन निवासी कैंसर की मरीज ऊषा ने बताया कि परिवार के बीच संपत्ति को लेकर विवाद है। बंटवारा भी नहीं किया जा रहा है। छावनी परिषद द्वारा मकान निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही है। कुछ दिन पहले ऊपर के कमरे की छत गिर गई थी। बुधवार को भी बारिश में दीवार में भी दरार आ गई और कुछ हिस्सा टूट गया। अब सिर पर छत भी नहीं है। मकान का निचला हिस्सा भी जर्जर हो गया है।
ढोलकी मोहल्ला बंद मकान बना खतरा
सदर ढोलकी मोहल्ला स्थित जैन मंदिर के बराबर में एक मकान संपत्ति विवाद के चलते बंद है। पड़ोसी विभोर जैन ने बताया कि एक साल से हर बार बारिश में मकान का कुछ हिस्सा गिर जाता है। बीती रात भी मकान की दीवार गिर गई। अगर मकान का अगला हिस्सा गिरा तो पूरा मार्ग बाधित हो जाएगा। वहीं, मार्ग से गुजरने वाले लोगों के लिए भी खतरा है।
मकान की छत पर जाने का नहीं बचा रास्ता
रजबन फुटबॉल ग्राउंड के सामने पप्पू, बबली, जोंस का मकान है। पप्पू ने बताया कि ऊपर मकान में जाने के लिए दुकान की छत से होकर जाना पड़ता है। इस बार बारिश में दुकान की छत गिर गई है। अब मकान में जाने का रास्ता नहीं बचा है। दो दिन से सड़क पर सो रहे हैं। बारिश में अब पूरे मकान के गिरने का खतरा बढ़ गया है।
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यह बोले जनप्रतिनिधि...
छावनी के अधिकारी तैयार करें रिपोर्ट
- छावनी क्षेत्र में रजबन, लालकुर्ती, सदर सहित बहुत से बंगले निर्माण की अनुमति न मिलने के कारण जर्जर अवस्था में हैं। हर बार बारिश में कोई न कोई मकान धराशायी हो जाता है। सीईओ और एई को भी अवगत कराया गया है। अधिकारी ऐसे भवनों की रिपोर्ट तैयार करें। - डॉ. सतीश चंद्र शर्मा, मनोनीत पार्षद।
निर्माण कार्य की मिलनी चाहिए अनुमति
- छावनी में वाणिज्यिक और आवासीय श्रेणी की 11,800 संपत्तियां हैं। इनमें 300 से अधिक मकान जर्जर हैं। कैंट एक्ट-2006 में प्रावधान है कि जर्जर मकान के निरीक्षण के बाद गृहस्वामी को नोटिस दिया जाता है कि 30 दिन में अनुमति लेकर या तो मकान की मरम्मत कराए नहीं तो छावनी परिषद ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करेगा। हालांकि लोगों को निर्माण की अनुमति नहीं मिलती है। - सुनील वधवा, पूर्व उपाध्यक्ष, छावनी बोर्ड।
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वर्जन...
- छावनी बोर्ड तैयार कर रहा है रिपोर्ट
- ऐसे मकानों को चिह्नित किया जा रहा है जो जर्जर अवस्था में हैं। इसके साथ ही टीम जर्जर मकानों को तोड़कर मलबा हटवा रही है। नियमानुसार निर्माण की अनुमति दी जाएगी। - जाकिर हुसैन, सीईओ, छावनी बोर्ड
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दौराला में डेयरी कॉलोनी में बुधवार देर रात मजदूर प्रमोद का लिंटर वाला मकान बारिश के चलते गिर गया। हादसे में प्रमोद, उसकी पत्नी सुनीता और बेटा अजीत मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गया। धमाके की आवाज सुनकर मौके पर एकत्रित हुए पड़ोसियों ने किसी तरह तीनों को बाहर निकाला और सीएचसी दौराला में भर्ती कराया।
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प्रमोद ने बताया कि वह, पत्नी सुनीता व बेटे अजीत के साथ गेट के पास बरामदे में सोया हुआ था, जबकि अजय और आरजू अंदर कमरे में सोए हुए थे और आदित्य मोदीपुरम किसी काम से गया था। देर रात अचानक बरामदे की ओर वाला हिस्सा गिरता नजर आया तो वह तेजी से गेट की तरफ भागा, लेकिन एकदम छत का लिंटर उनके ऊपर आ गिरा। पत्नी सुनीता व बेटे अजीत की चीख निकल गई। लिंटर और एक दीवार का मलबा खेत की ओर गिरा, जबकि दूसरी दीवार का मलबा उसके छोटे भाई मनोज के घर में गिर गया।
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इस मकान के बराबर में ही छोटे भाई मनोज का परिवार रहता है। तीन दिन पहले मनोज का साला जड़ौदा मुजफ्फरनगर निवासी मोनू आया था। मोनू बाहर की ओर भागा। उसने बताया कि सबसे पहले उन्होंने प्रमोद को बाहर निकाला और बाद में सुनीता को। लगभग एक घंटे के बाद मलबे से अजीत को बाहर निकाला गया। बाद में तीनों को सीएचसी दौराला में भर्ती कराया गया। सुनीता के सिर में 15 टांके आए हैं। जानकारी मिलने पर बृहस्पतिवार को नायब तहसीलदार राहुल मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। उन्होंने परिजनों को सरकार से मदद दिलाए जाने का आश्वासन दिया। पूर्व चेयरपर्सन के पति नवीन शर्मा, ओमप्रकाश पाल, जिला पंचायत सदस्य प्रताप लोईया भी घायलों का हाल जानने पहुंचे। वहीं, भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष नवाब सिंह अहलावत ने कहा कि प्रमोद के मकान के बराबर में खेत है और खेत के पास मिल का गंदा पानी आता है। पानी आने से नींव कमजोर हुई। इस कारण मकान गिर गया।
वहीं, खरखौदा में लोहिया नगर थानाक्षेत्र के गांव जाहिदपुर में एक मकान भरभराकर गिर गया। इसका समय से आभास होने के कारण परिवार के सात सदस्यों की जान बच गई। गांव जाहिदपुर निवासी इकबाल मजदूरी करता है। उसका दो कमरों का मकान है। यह बेहद पुराना है। मकान काफी नीचा भी है। बरसात होते ही मकान में जलभराव होने लगा। बुधवार रात इकबाल अपनी पत्नी हसीना और पांच बच्चों के साथ सो रहा था, लेकिन बृहस्पतिवार तड़के करीब 3:30 बजे इकबाल को कुछ आवाज का आभास हुआ। वह परिवार के सभी सदस्यों को लेकर मकान से बाहर निकल गया। तभी मकान पूरी तरह से गिर गया। बाद में शोर सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हुए, लेकिन परिवार को सकुशल देख सभी ने राहत की सांस ली। इसके अलावा छावनी क्षेत्र में चार जर्जर मकान की छत और अन्य हिस्से गिर गए। गनीमत रही कि इनमें बच्चों सहित अन्य कई लोगों की जान बच गई।
छावनी में जर्जर भवनों का निर्माण नहीं, चार मकानों की छत गिरी
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। छावनी क्षेत्र में जर्जर भवनों के नए निर्माण के आवेदन दिए गए हैं, लेकिन अब तक निर्माण की अनुमति नहीं मिल पा रही है। वहीं, मकान मालिक और किराएदार के विवाद और बंटवारे की खींचतान में भी जर्जर भवन के निर्माण नहीं हो रहे हैं। इन हालात में ही इस क्षेत्र के चार मकानों की छत और अन्य हिस्से गिर गए। गनीमत रही कि यहां सभी लोगों की जान बच गई।
ढाई साल के बच्चे को लेकर दौड़ी मां
छावनी में सोफिया स्कूल के सामने कोठी संख्या 98-डी में एडवर्ट फिलिप का परिवार रहता है। उनकी पुत्रवधू वरजीनिया ने बताया कि वह दीवान स्कूल में शिक्षिका हैं। बीती रात वह कमरे में थीं। उनके साथ ढाई साल का बच्चा ओबिन और सात साल का ऑस्टिन था। अचानक घर की छत से मिट्टी गिरने लगी। वरजीनिया ने बताया कि वह दोनों बच्चों को लेकर कमरे से बाहर दौड़ीं। इसी दौरान कमरे की छत गिर गई। उन्होंने बताया कि कई बार मकान निर्माण के लिए छावनी परिषद में प्रार्थना पत्र दिया है, लेकिन निर्माण ही अनुमति नहीं मिल रही है।
कैंसर मरीज के सिर से छिन गई छत
रजबन निवासी कैंसर की मरीज ऊषा ने बताया कि परिवार के बीच संपत्ति को लेकर विवाद है। बंटवारा भी नहीं किया जा रहा है। छावनी परिषद द्वारा मकान निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही है। कुछ दिन पहले ऊपर के कमरे की छत गिर गई थी। बुधवार को भी बारिश में दीवार में भी दरार आ गई और कुछ हिस्सा टूट गया। अब सिर पर छत भी नहीं है। मकान का निचला हिस्सा भी जर्जर हो गया है।
ढोलकी मोहल्ला बंद मकान बना खतरा
सदर ढोलकी मोहल्ला स्थित जैन मंदिर के बराबर में एक मकान संपत्ति विवाद के चलते बंद है। पड़ोसी विभोर जैन ने बताया कि एक साल से हर बार बारिश में मकान का कुछ हिस्सा गिर जाता है। बीती रात भी मकान की दीवार गिर गई। अगर मकान का अगला हिस्सा गिरा तो पूरा मार्ग बाधित हो जाएगा। वहीं, मार्ग से गुजरने वाले लोगों के लिए भी खतरा है।
मकान की छत पर जाने का नहीं बचा रास्ता
रजबन फुटबॉल ग्राउंड के सामने पप्पू, बबली, जोंस का मकान है। पप्पू ने बताया कि ऊपर मकान में जाने के लिए दुकान की छत से होकर जाना पड़ता है। इस बार बारिश में दुकान की छत गिर गई है। अब मकान में जाने का रास्ता नहीं बचा है। दो दिन से सड़क पर सो रहे हैं। बारिश में अब पूरे मकान के गिरने का खतरा बढ़ गया है।
यह बोले जनप्रतिनिधि...
छावनी के अधिकारी तैयार करें रिपोर्ट
- छावनी क्षेत्र में रजबन, लालकुर्ती, सदर सहित बहुत से बंगले निर्माण की अनुमति न मिलने के कारण जर्जर अवस्था में हैं। हर बार बारिश में कोई न कोई मकान धराशायी हो जाता है। सीईओ और एई को भी अवगत कराया गया है। अधिकारी ऐसे भवनों की रिपोर्ट तैयार करें। - डॉ. सतीश चंद्र शर्मा, मनोनीत पार्षद।
निर्माण कार्य की मिलनी चाहिए अनुमति
- छावनी में वाणिज्यिक और आवासीय श्रेणी की 11,800 संपत्तियां हैं। इनमें 300 से अधिक मकान जर्जर हैं। कैंट एक्ट-2006 में प्रावधान है कि जर्जर मकान के निरीक्षण के बाद गृहस्वामी को नोटिस दिया जाता है कि 30 दिन में अनुमति लेकर या तो मकान की मरम्मत कराए नहीं तो छावनी परिषद ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करेगा। हालांकि लोगों को निर्माण की अनुमति नहीं मिलती है। - सुनील वधवा, पूर्व उपाध्यक्ष, छावनी बोर्ड।
वर्जन...
- छावनी बोर्ड तैयार कर रहा है रिपोर्ट
- ऐसे मकानों को चिह्नित किया जा रहा है जो जर्जर अवस्था में हैं। इसके साथ ही टीम जर्जर मकानों को तोड़कर मलबा हटवा रही है। नियमानुसार निर्माण की अनुमति दी जाएगी। - जाकिर हुसैन, सीईओ, छावनी बोर्ड