मेरठ: घर में रखा था मां का शव, परिवहन विभाग की टीम उठा ले गई गाड़ी ; रुपये और सामान भी ले जाने का आरोप
मेरठ में पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान परिवहन विभाग की टीम पर घर के बाहर खड़ी कार रुपये और सामान समेत ले जाने का आरोप लगा है। विभाग ने आरोपों से इनकार किया है।
विस्तार
मेरठ में एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर परिवहन विभाग की ओर से 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की जा रही है। इसी कार्रवाई के दौरान छावनी क्षेत्र के रंजीतपुरी निवासी मनीष अग्रवाल ने परिवहन विभाग की टीम पर घर के बाहर खड़ी होंडा सिटी कार ले जाने और उसमें रखे रुपये व सामान वापस नहीं करने का आरोप लगाया है। वहीं, एआरटीओ प्रवर्तन सुधांशु रंजन ने आरोपों को निराधार बताया है।
मां की मौत के दिन घर के बाहर से ले गए कार
मनीष अग्रवाल के अनुसार, 15 सितंबर की सुबह अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मां की मौत हो गई थी। वह घर में मां के शव के पास परिवार के साथ मौजूद थे। इसी दौरान परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम घर के बाहर खड़ी होंडा सिटी कार को उठाकर ले गई। उनका कहना है कि कार में कुछ रुपये और घर का सामान रखा था।
कार ले जाने की जानकारी मिलने पर उन्होंने डायल-112 पर सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची। पड़ताल में पता चला कि कार को आरटीओ के अधिकारी ले गए हैं। अगले दिन मां की उठावनी के बाद मनीष अग्रवाल संभागीय परिवहन कार्यालय पहुंचे और आरटीओ अनीता सिंह तथा एआरटीओ सुधांशु रंजन से मुलाकात की। उन्होंने गाड़ी छोड़ने के लिए पत्र भी दिया, लेकिन उनका कहना है कि कोई सुनवाई नहीं हुई।
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कार की कीमत और सामान वापस नहीं मिलने का आरोप
मनीष अग्रवाल का आरोप है कि न तो कार की कीमत दी जा रही है और न ही उसमें रखी धनराशि और सामान वापस किया जा रहा है। उनका कहना है कि वाहन उठाते समय परिवार के किसी सदस्य को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
एआरटीओ बोले- आरोप निराधार
एआरटीओ प्रवर्तन सुधांशु रंजन ने आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि वाहन जब्त करते समय गाड़ी दिखाई जाती है। उन्होंने कार में रुपये और सामान रखे होने की बात को भी गलत बताया।
पुराने वाहनों की जब्ती का बढ़ रहा विरोध
एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर परिवहन विभाग एनसीआर में निर्धारित आयु सीमा पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। पहले ऐसे वाहनों को सड़क पर चलते समय पकड़ा जाता था, लेकिन अब लोकेशन मिलने पर घरों और सार्वजनिक स्थानों पर खड़े वाहनों को भी क्रेन से उठाया जा रहा है।
वाहन स्वामियों की ओर से इस कार्रवाई का विरोध भी किया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि उनके पुराने वाहन नियमित रूप से संचालित नहीं होते और कुछ वाहनों को उन्होंने ऐतिहासिक धरोहर के रूप में घर के बाहर खड़ा किया हुआ था। ऐसे में परिसर या घर के बाहर खड़े वाहनों को जब्त करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर कार्रवाई
एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर न्यायालय और एनजीटी के आदेशों का हवाला देते हुए परिवहन विभाग कार्रवाई कर रहा है। बीएस-3 सीरीज तक के वाहनों को स्क्रैप करने के निर्देश बताए गए हैं, जबकि बीएस-4 सीरीज के वाहनों की जांच की जा रही है।
एआरटीओ प्रवर्तन सुधांशु रंजन ने बताया कि यदि कोई वाहन गलती से जब्त हो गया है तो संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर उसे वापस लिया जा सकता है।
प्रदूषण कम करना बताया गया कार्रवाई का उद्देश्य
पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना बताया गया है। विभाग के अनुसार इसके लिए शासन स्तर से एसओपी के तहत प्रक्रिया निर्धारित की गई है। वहीं, वाहन स्वामी घर या परिसर में खड़े वाहनों को जब्त किए जाने के आधार पर सवाल उठा रहे हैं।