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शर्मनाक: अस्पतालों में कमीशन का बड़ा खेल, दलालों की गुंडई से गई नवजात की जान, शव लेकर ADG ऑफिस पहुंचे परिजन

Thu, 27 Jul 2023 04:12 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Updated Thu, 27 Jul 2023 04:12 PM IST
सार

Meerut News : मेरठ में अस्पतालों में कमीशन का शर्मनाक मामला सामने आया है। इतना ही नहीं दलालों की गुंडई से एक नवजात की जान भी चली गई। इसके बाद पीड़ित परिजन शव को लेकर ADG ऑफिस पहुंचे और कार्रवाई की मांग की।

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Took twelve in medical, forcibly taken to private hospital, child died
शव लेकर एडीजी ऑफिस पहुंचे परिजन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में मेडिकल इमरजेंसी के बाहर दलालों का जमावड़ा है। 15 जुलाई को 13 दिन के नवजात को यहां भर्ती कराने आए परिजनों को दलाल जबरन निजी अस्पताल ले गए। यहां उपचार के बाद बुधवार को बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया।

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इसके बाद बच्चे का शव लेकर पहले एडीजी कार्यालय फिर एसएसपी कार्यालय पहुंचे और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आरोप लगाया कि मेडिकल इमरजेंसी के बाहर मौजूद दलालों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया और जबरन निजी अस्पताल ले गए। एसएसपी ने कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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बुलंदशहर के कमालपुर निवासी जितेंद्र की पत्नी को 14 जुलाई को बच्चा हुआ था। परिजन 15 जुलाई को मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए लेकर पहुंचे। मेडिकल इमरजेंसी के बाहर डॉक्टर के कपड़ों में देवेंद्र, एंबुलेंस पर छोटू और विक्की राणा मिले। तीनों से मेडिकल में नवजात को भर्ती कराने के लिए कहा। उनसे कहा गया कि मेडिकल में अभी कोई बच्चों का अच्छा डॉक्टर नहीं है और बच्चे को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंच गए। यहां सुधार न होने पर 18 जुलाई को दूसरे निजी अस्पताल में बच्चे को भर्ती कराया। यहां परिजनों को बच्चे से मिलने भी नहीं दिया गया। एक लाख बीस हजार रुपये भी अस्पताल ने ले लिए। डॉक्टर कहने लगे कि बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया है, जबकि बच्चे को मशीन पर रखा गया था।

वहीं, बुधवार को सुबह सात बजे बच्चे को मृत बताते हुए हमें दे दिया। इसके बाद परिजन शव लेकर एडीजी कार्यालय, एसएसपी कार्यालय पहुंचे और दलालों समेत अस्पताल प्रशासन के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने मेडिकल पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद मेडिकल थाना पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

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एक को पकड़ा, सिपाही ने छोड़ा
एसएसपी कार्यालय पर परिजनों ने मेडिकल पुलिस पर लापरवाही करने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि एक आरोपी छोटू को उन्होंने मेडिकल थाने के सिपाही को सौंप दिया था। उसे सिपाही ने थाने के बाहर से ही छोड़ दिया।

दलालों के हवाले है मेडिकल कॉलेज
परिजनों ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी के बाहर दलाल खड़े रहते हैं। ये लोग एंबुलेंस से आने वाले मरीज को सही उपचार दिलाने का वायदा करके निजी अस्पताल ले जाते है। इमरजेंसी के अंदर मरीज और तीमारदारों को नहीं जाने दिया जाता।

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बिल का 25 से 30 फीसदी तक वसूलते हैं दलाल
13 दिन के नवजात की मौत के मामले में पुलिस ने दो आरोपी देवेंद्र और मारूफ को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि वो लोग सात निजी अस्पतालों में उपचार कराते हैं। जो भी मेडिकल इमरजेंसी में आता था, उसको निजी अस्पताल में लेकर जाते हैं। मरीज का जितना बिल बनता है उसका 25 से 30 प्रतिशत कमीशन इनको मिलता है। पुलिस इनके अन्य साथियों के बारे में भी जानकारी कर रही है।

एसओ मेडिकल योगेंद्र सिंह का कहना है कि दो आरोपी गिरफ्तार हो गए है। अन्य साथियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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