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कल देखेंगे पक्षियों का कलरव, होंगी प्रतियोगिताएं

Mon, 01 Feb 2021 01:59 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Feb 2021 01:59 AM IST
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Tomorrow will see birds tweet, there will be competitions
मेरठ। विश्व वेटलैंड डे (2 फरवरी) के मौके पर वन विभाग और जिला गंगा समिति की तरफ से ऑनलाइन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इसमें छात्र-छात्राएं दो फरवरी शाम पांच बजे तक वन विभाग द्वारा जारी की गई ईमेल आईडी पर स्लोगन, ड्राइंग-पेंटिंग, कविता और वेटलैंड बचाने के लिए विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। तीन विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।
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मंगलवार को हस्तिनापुर के भीकुंड वेटलैंड में बर्ड फेस्टिवल का भी आयोजन होगा। इसमें विभिन्न स्कूलों के बच्चों को यहां लाकर दूर देशों से आने वाले परिंदों की जानकारी दी जाएगी। वेटलैंड डे का महत्व इन परिंदों के लिए कितना है, इसके बारे में बच्चों को बताया जाएगा। इसके बाद हस्तिनापुर के गंगा व्याख्यान केंद्र में कार्यक्रम होगा। फोरेस्ट ट्रेनिंग सेंटर पर बच्चे नेचर ट्रेल का आनंद लेंगे। प्रतियोगिताएं और नाटक आदि कार्यक्रम भी होंगे। डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि कोरोना की वजह से अधिक लोगों को नहीं बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि wetlanddaymeerut2021@gmail.com ईमेल आईडी पर छात्र-छात्राएं अपने स्लोगन भेज दें।
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ये है वेटलैंड डे
वेटलैंड का मतलब नमी या दलदली क्षेत्र अथवा पानी से संतृप्त भूभाग से है। बहुत सी जगह पर सालभर जमीन पानी से भरा रहता है। वेटलैंड की मिट्टी झील, नदी व तालाब के किनारे का हिस्सा होती है। भारत में वेटलैंड ठंडे और शुष्क इलाकों से लेकर मध्य भारत के कटिबंधीय मानसूनी इलाकों और दक्षिण के नमी वाले इलाकों तक फैली हुई है। नदियों, झीलों, तालाबों आदि की खराब होती स्थिति को देखते हुए साल 1971 से हर साल दो फरवरी को वेटलैंड डे मनाया जाता है।
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मेरठ में घटा है क्षेत्र
मेरठ में वेटलैंड क्षेत्र कम हो रह है। इसके कारण पक्षियों का जीवन खतरे में पड़ रहा है। वरिष्ठ पक्षी विज्ञानी डॉ. रजत भार्गव बताते हैं कि 15 से 20 साल पहले तक मेरठ में अकेले कैंट क्षेत्र में छह-सात जगहों पर विदेशी पक्षी प्रवास के लिए आते थे, लेकिन वेटलैंड खत्म होने के बाद इनकी संख्या घटती गई। जिले में बहुत कम तालाब बचे हैं, जहां हैं भी उनमें अतिक्रमण के कारण वेटलैंड क्षेत्र खत्म हो गया है।
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