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Meerut News: जीवन सफल बनाना है अपना ज्ञान को बढ़ाना होगा
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हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 44वें दिन भाव भूषण महाराज ने बताया कि जीवन में शांति के लिए शास्त्रों का अध्ययन आवश्यक है। विधानाचार्य नीतेश एवं दीपक शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। पदमचंद जैन ने स्वर्ण कलश से अभिषेक किया व शांतिधारा रमेशचंद्र जैन ने की। दीप का प्रज्ज्वलन राजकुमार जैन व उमा रानी जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाए गए। इसके बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 127 परिवारों ने विधान का आयोजन कराया। इसमें मुख्य रूप से राजकुमार जैन, उमा रानी जैन, स्वदेश जैन, अनीता जैन, संजय जैन, मोनिका जैन, पुष्पित जैन, मुस्कान जैन, डाॅ. शैफाली जैन, अंकित जैन आदि उपस्थित रहे। विधान के मध्य भगवान आदिनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक बड़े ही धूमधाम एवं हर्षाेल्लास से मनाया गया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ निर्मल जैन व सुशील जैन ने किया।
विधान पाठ के मध्य गुरुवर भारत भूषण मुनिराज ने कहा कि शास्त्र का लगातार स्वाध्याय करना आवश्यक है। शस्त्र और शास्त्र एक समान है। अगर ज्यादा दिनों तक शस्त्र का प्रयोग न किया जाए तो उसमें जंग लग जाती है। इसी प्रकार यदि शास्त्र का अध्ययन न किया जाए तो वह नाश होने लग जाएगा। अगर अपना जीवन सफल बनाना है, ज्ञान को बढ़ाना है तो सबसे पहले हमें परंपरागत शास्त्र की शरण में जाना ही होगा। आज जानकारी के साधन तो बहुत परंतु ज्ञान के नहीं हैं।
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विधान का विसर्जन संजय जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन राजकुमार जैन, उमारानी जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रमेशचंद जैन, सभी भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन शिवानी जैन व सलोनी जैन द्वारा किया गया।
क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, अतुल जैन, योगेशचंद जैन, मयंक जैन, अजीत प्रसाद जैन, वीरेंद्र जैन, अभय कुमार जैन का सहयोग रहा।
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आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाए गए। इसके बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 127 परिवारों ने विधान का आयोजन कराया। इसमें मुख्य रूप से राजकुमार जैन, उमा रानी जैन, स्वदेश जैन, अनीता जैन, संजय जैन, मोनिका जैन, पुष्पित जैन, मुस्कान जैन, डाॅ. शैफाली जैन, अंकित जैन आदि उपस्थित रहे। विधान के मध्य भगवान आदिनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक बड़े ही धूमधाम एवं हर्षाेल्लास से मनाया गया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ निर्मल जैन व सुशील जैन ने किया।
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विधान पाठ के मध्य गुरुवर भारत भूषण मुनिराज ने कहा कि शास्त्र का लगातार स्वाध्याय करना आवश्यक है। शस्त्र और शास्त्र एक समान है। अगर ज्यादा दिनों तक शस्त्र का प्रयोग न किया जाए तो उसमें जंग लग जाती है। इसी प्रकार यदि शास्त्र का अध्ययन न किया जाए तो वह नाश होने लग जाएगा। अगर अपना जीवन सफल बनाना है, ज्ञान को बढ़ाना है तो सबसे पहले हमें परंपरागत शास्त्र की शरण में जाना ही होगा। आज जानकारी के साधन तो बहुत परंतु ज्ञान के नहीं हैं।
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विधान का विसर्जन संजय जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन राजकुमार जैन, उमारानी जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रमेशचंद जैन, सभी भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन शिवानी जैन व सलोनी जैन द्वारा किया गया।
क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, अतुल जैन, योगेशचंद जैन, मयंक जैन, अजीत प्रसाद जैन, वीरेंद्र जैन, अभय कुमार जैन का सहयोग रहा।