पांच लाख में देते थे सेना और यूपी पुलिस में भर्ती की गारंटी, तीन युवकों को एटीएस ने किया गिरफ्तार
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आर्मी और पुलिस में भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के तीन युवकों को एसटीएफ मेरठ ने गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने वेस्ट यूपी के कई जिलों में अपना जाल बिछा रखा था। पकड़े गये युवकों के मोबाइल फोन में 20 से अधिक संदिग्ध नंबर मिले हैं। यह गिरोह फर्जी तरह से भर्ती कराने के दस्तावेज भी तैयार करता था। गिरोह में कुछ लोग फरार हैं। उनकी तलाश में एसटीएफ लगी है।
एसटीएफ मेरठ यूनिट के सीओ बृजेश सिंह ने ठगी का खुलासा किया। बताया कि कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से धोखाधड़ी करके अनुचित लाभ कमाने वाला गिरोह काम कर रहा है।
इस संबंध में आईजी एसटीएफ अमिताभ यश और एसएसपी एसटीएफ सत्यार्थ अनिरूद्ध के निर्देश पर एसटीएफ काम का रही थी। आर्मी इंटेलीजेंस से भी जानकारी मिली कि अभ्यर्थियों को भर्ती कराने के एवज में पैसा लिया जा रहा है। शुक्रवार रात को एसटीएफ मेरठ ने दौराला से तीन युवकों को गिरफ्तार किया।
पकड़े गये आरोपी प्रवेश नागर पुत्र अजब सिंह निवासी अलीपुर मोरना थाना हस्तिनापुर, रोशन पुत्र जगत सिंह निवासी गांव चकबंदी थाना सरधना और सतीश पुत्र सुरेश निवासी गांव चकबंदी हैं। आरोपियों के पास से फर्जी जाति व निवास प्रमाण पत्र, दसवीं व 12 वीं की मार्कशीट, सनद, यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा 2018 का प्रवेश पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, यूपी पुलिस के आईकार्ड, चार मोबाइल, एक वैगनकार कार, एक बाइक बरामद की है।
पांच लाख में भर्ती की गारंटी
सीओ के अनुसार, आरोपियों ने बताया कि आर्मी व यूपी पुलिस में कांस्टेबल के पदों पर भर्ती कराने के लिए अभ्यर्थियों से पांच पांच लाख रुपये लेते थे। बुलंदशहर के स्याना निवासी रहीसुद्ीन, स्याना निवासी लोकेश, स्याना निवासी दीपक, दीपक निवासी नंदपुरा, मेरठ से पुलिस व आर्मी में भर्ती के लिए पांच पांच लाख रुपये में सौदा हुआ था।
खुद को सिपाही बताकर करता था ठगी
सीओ ने बताया कि प्रवेश नागर खुद को यूपी पुलिस का सिपाही बताकर ठगी करता था। जबकि रोशन ठगी के लिए खुद को आर्मी में बताता था। मेरठ के अलावा बुलंदशहर, हापुड़, बागपत और मुजफ्फरनगर में भी यह गिरोह दो सालों में 70-80 लोगों से पैसा ले चुका है। आरोपियों के बैंक खातों की जांच जल्द शुरू की जाएगी। आर्मी की जिस जिले में भर्ती होती थी, उसी जिले का फर्जी मूल निवास अभ्यर्थी का बना देते थे। प्रवेश गिरोह का सरगना है।