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मनुष्य के सभी कर्मों का मूल कारण विचार : हरिशंकर अग्निहोत्री
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मेरठ। आर्य समाज शास्त्री नगर का 46 वां वार्षिकोत्सव रविवार को पंचम एवं समापन सत्र के साथ भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 8 बजे यज्ञ से हुआ। विधिवत संचालन आचार्य रणधीर शास्त्री और डॉ. इंद्रदेव शास्त्री के ब्रह्मत्व में किया गया। यज्ञ के यजमान राजकुमार आर्य, प्रवीन आर्य, संजय चौधरी एवं प्रभात कुमार सपत्नीक रहे।
यज्ञ के उपरांत आगरा से पधारे युवा आर्य विद्वान आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने कर्मों का कारण क्या है विषय पर सारगर्भित वैदिक प्रवचन दिया। कहा कि मनुष्य के सभी कर्मों का मूल कारण उसके विचार होते हैं। मस्तिष्क में उत्पन्न विचार ही व्यवहार का रूप लेते हैं। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि सही ज्ञान (इनपुट), संस्कारित चिंतन ( प्रोसेसिंग ) और श्रेष्ठ व्यवहार ( आउटपुट ) से ही समाज में सद्व्यवहार व परोपकार संभव है। चेताया कि गलत विचार व तर्कहीनता के कारण ही समाज में विकृतियां बढ़ रही हैं। साथ ही महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा रचित ‘व्यवहार भानु’ ग्रंथ को पढ़ने व अपनाने की प्रेरणा दी। आचार्य ने ‘श्रवण, मनन, निदिध्यासन, साक्षात्कार ’ को व्यवहार से जोड़ते हुए कहा कि स्वस्थ विचार ही उन्नत समाज की आधारशिला हैं।
कार्यक्रम में भजनोपदेशक पंडित सतीश सुमन एवं उनके साथी सुभाष राही ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं दान की शुद्धता पर आधारित भजन पैसा दान करके चवन्नी को चुराते हो के माध्यम से नैतिक संदेश दिया गया। भजनोपदेशक भूपेन्द्र ने नेकियां कमाना काहे छोड़ दिया प्रस्तुत कर सभी को जागरूक किया।
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इस अवसर पर समाज के संस्थापक एवं विशिष्ट योगदान देने वाले सदस्यों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रधान सूरजपाल सिंह एवं मंत्री मदनपाल सिंह ने किया, जबकि अध्यक्षता प्रवीन रस्तोगी व ओंकार सिंह आर्य ने संयुक्त रूप से की। कार्यक्रम में दिल्ली से ठाकुर विक्रम सिंह, स्वामी चंद्रदेव, राजेश सेठी, उपप्रधान रविन्द्र सिंह, कोषाध्यक्ष प्रभात कुमार, सत्यपाल सिंह, डॉ. भरत आर्य, डॉ. वीरेंद्र आर्य रहे।
- आर्य समाज बुढ़ाना द्वार पर 95वां राष्ट्र रक्षा यज्ञ संपन्न
मेरठ। आर्य समाज बुढ़ाना द्वार के तत्वावधान में 95वां राष्ट्र रक्षा यज्ञ विधिवत रूप से संपन्न कराया गया। यज्ञ का संचालन आचार्य राजवीर द्वारा किया गया जबकि यजमान के रूप में लता गुप्ता उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता डॉ. राजवीर सिंह ने कहा कि हम अक्सर इस भ्रम में रहते हैं कि ईश्वर है या नहीं जबकि प्रकृति के विभिन्न रूपों में ईश्वर की उपस्थिति स्पष्ट रूप से अनुभव की जा सकती है। जिला प्रधान सुशील बंसल ने कहा कि ईश्वर का संबंध आत्मा और परमात्मा से है। इस अवसर पर अमित कांत, विनय गर्ग, जयप्रकाश गुप्ता, सत्यपाल सिंह गहलोत, गीता बंसल, रेखा गुप्ता रहीं।
- परोपकार की यज्ञीय भावना अपनाकर बनें आदर्श यजमान: राजेश सेठी
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर में आयोजित रविवारीय सत्संग में सत्या: संतु यजमानस्य काम: विषय पर राजेश सेठी ने कहा कि वेदों में परमपिता परमात्मा यज्ञ करने वालों की समस्त कामनाएं पूर्ण होने का स्पष्ट आश्वासन देते हैं। बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने यज्ञ को इष्ट कामधुक बताया है जो मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला है। उन्होंने कहा कि इस आशीर्वाद को प्राप्त करने से पहले यजमान को अपने जीवन में आवश्यक गुणों का समावेश करना जरूरी है। कार्यक्रम में आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ हुआ। इस अवसर पर धर्मवीर, ऋचा सेठी, सुमन आनंद, कमलेश चांदना, प्रीति सेठी, चांद ग्रोवर और मंजु, मनीष शर्मा रहे।
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यज्ञ के उपरांत आगरा से पधारे युवा आर्य विद्वान आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने कर्मों का कारण क्या है विषय पर सारगर्भित वैदिक प्रवचन दिया। कहा कि मनुष्य के सभी कर्मों का मूल कारण उसके विचार होते हैं। मस्तिष्क में उत्पन्न विचार ही व्यवहार का रूप लेते हैं। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि सही ज्ञान (इनपुट), संस्कारित चिंतन ( प्रोसेसिंग ) और श्रेष्ठ व्यवहार ( आउटपुट ) से ही समाज में सद्व्यवहार व परोपकार संभव है। चेताया कि गलत विचार व तर्कहीनता के कारण ही समाज में विकृतियां बढ़ रही हैं। साथ ही महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा रचित ‘व्यवहार भानु’ ग्रंथ को पढ़ने व अपनाने की प्रेरणा दी। आचार्य ने ‘श्रवण, मनन, निदिध्यासन, साक्षात्कार ’ को व्यवहार से जोड़ते हुए कहा कि स्वस्थ विचार ही उन्नत समाज की आधारशिला हैं।
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कार्यक्रम में भजनोपदेशक पंडित सतीश सुमन एवं उनके साथी सुभाष राही ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं दान की शुद्धता पर आधारित भजन पैसा दान करके चवन्नी को चुराते हो के माध्यम से नैतिक संदेश दिया गया। भजनोपदेशक भूपेन्द्र ने नेकियां कमाना काहे छोड़ दिया प्रस्तुत कर सभी को जागरूक किया।
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इस अवसर पर समाज के संस्थापक एवं विशिष्ट योगदान देने वाले सदस्यों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रधान सूरजपाल सिंह एवं मंत्री मदनपाल सिंह ने किया, जबकि अध्यक्षता प्रवीन रस्तोगी व ओंकार सिंह आर्य ने संयुक्त रूप से की। कार्यक्रम में दिल्ली से ठाकुर विक्रम सिंह, स्वामी चंद्रदेव, राजेश सेठी, उपप्रधान रविन्द्र सिंह, कोषाध्यक्ष प्रभात कुमार, सत्यपाल सिंह, डॉ. भरत आर्य, डॉ. वीरेंद्र आर्य रहे।
- आर्य समाज बुढ़ाना द्वार पर 95वां राष्ट्र रक्षा यज्ञ संपन्न
मेरठ। आर्य समाज बुढ़ाना द्वार के तत्वावधान में 95वां राष्ट्र रक्षा यज्ञ विधिवत रूप से संपन्न कराया गया। यज्ञ का संचालन आचार्य राजवीर द्वारा किया गया जबकि यजमान के रूप में लता गुप्ता उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता डॉ. राजवीर सिंह ने कहा कि हम अक्सर इस भ्रम में रहते हैं कि ईश्वर है या नहीं जबकि प्रकृति के विभिन्न रूपों में ईश्वर की उपस्थिति स्पष्ट रूप से अनुभव की जा सकती है। जिला प्रधान सुशील बंसल ने कहा कि ईश्वर का संबंध आत्मा और परमात्मा से है। इस अवसर पर अमित कांत, विनय गर्ग, जयप्रकाश गुप्ता, सत्यपाल सिंह गहलोत, गीता बंसल, रेखा गुप्ता रहीं।
- परोपकार की यज्ञीय भावना अपनाकर बनें आदर्श यजमान: राजेश सेठी
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर में आयोजित रविवारीय सत्संग में सत्या: संतु यजमानस्य काम: विषय पर राजेश सेठी ने कहा कि वेदों में परमपिता परमात्मा यज्ञ करने वालों की समस्त कामनाएं पूर्ण होने का स्पष्ट आश्वासन देते हैं। बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने यज्ञ को इष्ट कामधुक बताया है जो मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला है। उन्होंने कहा कि इस आशीर्वाद को प्राप्त करने से पहले यजमान को अपने जीवन में आवश्यक गुणों का समावेश करना जरूरी है। कार्यक्रम में आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ हुआ। इस अवसर पर धर्मवीर, ऋचा सेठी, सुमन आनंद, कमलेश चांदना, प्रीति सेठी, चांद ग्रोवर और मंजु, मनीष शर्मा रहे।