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उत्पीड़न के खिलाफ सड़क से सदन तक होगा आंदोलन : लोकेश अग्रवाल
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अमर उजाला...चैम्बर आफ कामर्स बांबे बाजार में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल द्वारा आयोजित कार्यक
उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल का सम्मेलन वेस्टर्न यूपी चैंबर ऑफ कॉमर्स में हुआ। प्रदेश अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने सरकारी नीतियों के प्रति असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि आवासीय कॉलोनियों में संचालित दुकानों के संचालकों का उत्पीड़न बंद किया जाए। यदि व्यापारियों का शोषण बंद नहीं किया गया तो सड़क से सदन तक आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं कामर्शियल, बिजली कनेक्शन, फूड लाइसेंस, माप तौल प्रमाणपत्र, जीएसटी पंजीकरण और एमएसएमई जैसे प्रमाणपत्र जारी करती है। उन्हीं दुकानदारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्हें सीलिंग और जुर्माने की कार्रवाई का शिकार बनाया जा रहा है।
प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप गंगा ने कहा कि जीएसटी स्लैब में कमी के बावजूद व्यापारी इसके दुष्परिणाम झेल रहे हैं। छोटे और रिटेल व्यापारी संगठित उत्पीड़न का शिकार हैं। ऑनलाइन व्यापार को बढ़ावा देकर उनकी रोजी-रोटी छीनी जा रही है। विभागीय दबाव बनाकर उन्हें जीएसटी के जाल में फंसाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब कारोबार गिर रहा है तो छोटे व्यापारियों से कर वसूली का आतंक क्यों फैलाया जा रहा है।
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उद्यमी अनिल महेंद्रू ने बताया कि जीएसटी दरों में कमी से व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है। अधिक टैक्स पर खरीदे गए माल को कम टैक्स पर बेचने को मजबूर किया गया। व्यापारी अपने ही पैसे के लिए बैंक को ब्याज दे रहा है। प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक बंसल ने ई-वे बिल और ऑनलाइन बिलिंग जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं के लागू होने के बावजूद सचल दस्तों के अस्तित्व को भ्रष्टाचार और भय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि तकनीकी त्रुटियों के नाम पर वाहनों को रोककर जबरन पेनल्टी वसूली जा रही है। दीपू गर्ग ने सचल दस्तों को तत्काल समाप्त करने और व्यापारी विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग की। अन्यथा निर्णायक आंदोलन की चेतावनी दी।
प्रांतीय संगठन मंत्री राजकुमार त्यागी ने उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल को अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य अब जिला या नगर स्तर तक सीमित न रहकर न्यायपालिका स्तर तक व्यापारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है। प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमरेश शर्मा ने भी व्यापारियों की समस्याएं उठाईं।
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उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं कामर्शियल, बिजली कनेक्शन, फूड लाइसेंस, माप तौल प्रमाणपत्र, जीएसटी पंजीकरण और एमएसएमई जैसे प्रमाणपत्र जारी करती है। उन्हीं दुकानदारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्हें सीलिंग और जुर्माने की कार्रवाई का शिकार बनाया जा रहा है।
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प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप गंगा ने कहा कि जीएसटी स्लैब में कमी के बावजूद व्यापारी इसके दुष्परिणाम झेल रहे हैं। छोटे और रिटेल व्यापारी संगठित उत्पीड़न का शिकार हैं। ऑनलाइन व्यापार को बढ़ावा देकर उनकी रोजी-रोटी छीनी जा रही है। विभागीय दबाव बनाकर उन्हें जीएसटी के जाल में फंसाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब कारोबार गिर रहा है तो छोटे व्यापारियों से कर वसूली का आतंक क्यों फैलाया जा रहा है।
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उद्यमी अनिल महेंद्रू ने बताया कि जीएसटी दरों में कमी से व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है। अधिक टैक्स पर खरीदे गए माल को कम टैक्स पर बेचने को मजबूर किया गया। व्यापारी अपने ही पैसे के लिए बैंक को ब्याज दे रहा है। प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक बंसल ने ई-वे बिल और ऑनलाइन बिलिंग जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं के लागू होने के बावजूद सचल दस्तों के अस्तित्व को भ्रष्टाचार और भय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि तकनीकी त्रुटियों के नाम पर वाहनों को रोककर जबरन पेनल्टी वसूली जा रही है। दीपू गर्ग ने सचल दस्तों को तत्काल समाप्त करने और व्यापारी विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग की। अन्यथा निर्णायक आंदोलन की चेतावनी दी।
प्रांतीय संगठन मंत्री राजकुमार त्यागी ने उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल को अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य अब जिला या नगर स्तर तक सीमित न रहकर न्यायपालिका स्तर तक व्यापारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है। प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमरेश शर्मा ने भी व्यापारियों की समस्याएं उठाईं।