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खास रिपोर्ट: जांच में खुला बिल्डर का राज, 25 नहीं, 70 करोड़ का हुआ था नोटबंदी के बाद लेनदेन

Fri, 30 Aug 2019 12:19 PM IST
कपिल kapil अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 30 Aug 2019 12:19 PM IST
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Meerut fake currency case: there was transaction of 70 crores by builder after Notebandi
बरमाद हुए थे 25 करोड़ के नकली नोट - फोटो : अमर उजाला

बिल्डर संजीव मित्तल के यहां से बरामद हुई 25 करोड़ की पुरानी करेंसी की जांच में सामने आया है कि शहर के 31 लोगों ने संजीव से मोटी धनराशि का लेनदेन किया था। इसमें नोटबंदी के बाद करीब 70 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आ रहा है।

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ये था पूरा मामला 
मेरठ में दिल्ली रोड स्थित राजकमल एंकलेव निवासी बिल्डर संजीव मित्तल के यहां कंकरखेड़ा पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर 29 दिसंबर 2017 को छापा मारा था। इस छापे में संजीव मित्तल के आवास से 25 करोड़ रुपये के पुराने नोट बरामद हुए थे। इतनी बड़ी संख्या में पुराने नोट मिलने पर हर कोई हैरान था, कि आखिर किस मकसद से यह नोट बिल्डर के यहां रखे हुए थे और कहां से आए हैं। जिस समय पुलिस ने छापामारी की, तभी संजीव परिवार सहित फरार हो गया था। पुलिस की सूचना पर आयकर विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और पूरे घर की गहनता से जांच पड़ताल करने के बाद बरामद रकम परतापुर पुलिस को सौंपकर संजीव मित्तल को नोटिस जारी कर दिया। 
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पुलिस जांच में थी गड़बड़ी
मैं बिल्डर संजीव मित्तल का अधिवक्ता हूं। पुलिस जांच में गड़बड़ी थी और अधूरी जांच कर चार्जशीट दाखिल की गई थी। जिसे आधार बनाकर हाईकोर्ट में अपील की गई और पूरी प्रोसीडिंग पर स्टे आ चुका है। अभी दूसरी एजेंसी इस मामले की जांच कर रही है। उनकी जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में कार्रवाई तय होगी। - रामकुमार शर्मा, अधिवक्ता

ईडी और आयकर विभाग कर रहा जांच 
इस पूरे मामले में आयकर विभाग के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच की जा रही है। जिसमें अब तक जो मामला सामने आया है, वह बहुत ही चौंकाने वाला है। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार नोटबंदी के बाद बिल्डर संजीव गुप्ता से शहर के 31 लोगों ने लेनदेन किया था। जिसमें लाखों से करोड़ों का लेनदेन है। एक ग्रुप ने तो 8 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन किया है। इस पूरे हिसाब किताब में 70 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि का लेनदेन बैंक और कैश आदि के साथ ही ऋण आदि के माध्यम से सामने आया है। 

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एक स्कूल संचालक रहा है मध्यस्थ
इस प्रकरण में एक चौंकाने वाला नाम भी सामने आ रहा है। मवाना रोड पर स्कूल चलाने वाले इस संचालक को इस लेनदेन का मध्यस्थ बताया जा रहा है। हालांकि पूरा मामला जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। 

गिरफ्तारी के बाद प्रोसीडिंग पर भी स्टे
इस प्रकरण में पुलिस ने भी अपने स्तर से मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। जिसमें संजीव मित्तल ने गिरफ्तारी पर स्टे के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन वहां पर याचिका मंजूर नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट से संजीव मित्तल को स्टे मिल गया था। लेकिन पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी। जिसके बाद संजीव मित्तल की गिरफ्तारी होनी थी। लेकिन वह पूरी जांच प्रक्रिया पर ही हाईकोर्ट से स्टे ले आए।

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