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Meerut News: शहर काजी बनने के लिए घमासान, शफीकुर्रहमान ने भी बंधवाई पगड़ी
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जमीयत उलमा के हिन्द ने किया शहर काजी का समर्थन
प्रो. जैनुस साजिद्दीन के इंतकाल के बाद उनके बेटे को बनाया गया है शहर काजी
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शहर काजी बनने के लिए घमासान शुरू गया है। मंगलवार को हापुड़ रोड स्थित एक होटल में शहर इमाम कारी शफीकुर्रहमान कासमी को भी मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने पगड़ी बांधकर अगले शहर काजी होने का एलान कर दिया। इससे पहले सोमवार को शहर काजी जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी के इंतकाल के बाद मुस्लिम समाज के बड़े तबके ने उनके बेटे डॉ. सालिकीन सिद्दीकी को शहर काजी की पगड़ी बांधी थी। कारी शफीकुर्रहमान ने वीडियो जारी कर इसका विरोध किया था और जलसे का एलान किया था।
एक तरफ नए शहर काजी डॉ. सालिकीन सिद्दीकी का जमीयत उलमा ए हिंद ने समर्थन किया है। वहीं, दूसरी तरफ हापुड़ रोड पर एक जलसे का आयोजन किया गया, जिसमें कारी शफीकुर्रहमान कासमी को शहर काजी बनाए जाने का एलान करते हुए उनके पगड़ी बांधी गई। कारी शफीकुर्रहमान का कहना है कि उन्हें मुस्लिम समाज के हर तबके के लोगों ने शहर काजी चुना है। किसी आलिम को ही इस पद पर होना चाहिए। उन्होंने दारुल उलूम देवबंद से 1969 मौलवियत की डिग्री हासिल की थी, उसके बाद दारुल उलूम देवबंद ही में टीचर रहे।
इस दौरान मुल्ला इरफान कुरेशी, हाजी नदीम मलिक, हाजी सदर इमरान, चौधरी गुलशेर,अतीक अहमद अल्वी, हाजी गुफरान अल्वी, हाजी आसिफ़ ग़ाज़ी, सपा नेता जानू चौधरी, हसीन सैफी, रईस सैफी, शकील सैफी, जावेद रशीद सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
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यह तमाशा है: नायब शहर काजी
नायब शहर काजी जैनुर राशिद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि कारी शफीकुर्रहमान ने अपने मिलने वालों को बुलाकर पगड़ी बंधवा ली। ऐसे कोई शहर काजी नहीं बन जाता। इसे तमाशा कहते हैं। यह मुस्लिम समाज में असमंजस पैदा करने वाली बात है। डॉ. सालिकीन सिद्दीकी को सबने चुना है, वही शहर काजी हैं।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शहर काजी बनने के लिए घमासान शुरू गया है। मंगलवार को हापुड़ रोड स्थित एक होटल में शहर इमाम कारी शफीकुर्रहमान कासमी को भी मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने पगड़ी बांधकर अगले शहर काजी होने का एलान कर दिया। इससे पहले सोमवार को शहर काजी जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी के इंतकाल के बाद मुस्लिम समाज के बड़े तबके ने उनके बेटे डॉ. सालिकीन सिद्दीकी को शहर काजी की पगड़ी बांधी थी। कारी शफीकुर्रहमान ने वीडियो जारी कर इसका विरोध किया था और जलसे का एलान किया था।
एक तरफ नए शहर काजी डॉ. सालिकीन सिद्दीकी का जमीयत उलमा ए हिंद ने समर्थन किया है। वहीं, दूसरी तरफ हापुड़ रोड पर एक जलसे का आयोजन किया गया, जिसमें कारी शफीकुर्रहमान कासमी को शहर काजी बनाए जाने का एलान करते हुए उनके पगड़ी बांधी गई। कारी शफीकुर्रहमान का कहना है कि उन्हें मुस्लिम समाज के हर तबके के लोगों ने शहर काजी चुना है। किसी आलिम को ही इस पद पर होना चाहिए। उन्होंने दारुल उलूम देवबंद से 1969 मौलवियत की डिग्री हासिल की थी, उसके बाद दारुल उलूम देवबंद ही में टीचर रहे।
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इस दौरान मुल्ला इरफान कुरेशी, हाजी नदीम मलिक, हाजी सदर इमरान, चौधरी गुलशेर,अतीक अहमद अल्वी, हाजी गुफरान अल्वी, हाजी आसिफ़ ग़ाज़ी, सपा नेता जानू चौधरी, हसीन सैफी, रईस सैफी, शकील सैफी, जावेद रशीद सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
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यह तमाशा है: नायब शहर काजी
नायब शहर काजी जैनुर राशिद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि कारी शफीकुर्रहमान ने अपने मिलने वालों को बुलाकर पगड़ी बंधवा ली। ऐसे कोई शहर काजी नहीं बन जाता। इसे तमाशा कहते हैं। यह मुस्लिम समाज में असमंजस पैदा करने वाली बात है। डॉ. सालिकीन सिद्दीकी को सबने चुना है, वही शहर काजी हैं।