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Meerut News: भारतीय भाषा परिवार में एकत्व और एकात्मता पर हुआ मंथन
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सीसीएसयू के राजनीति विभाग की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा चाणक्य सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसका विषय भारतीय भाषा, परिवार, एकत्व और एकात्मत रहा। सम्मेलन में देशभर के विद्वानों, कुलपतियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया और भारतीय भाषाओं की विविधता के बीच अंतर्निहित एकता पर गहन चर्चा की।
डॉ. ओमपाल शास्त्री ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अतिथियों ने भारतीय भाषा परिवार से संबंधित कुछ पुस्तकों का विमोचन किया गया। डॉ. मुनेश कुमार ने विषय प्रवेश कराया। विशिष्ट अतिथि प्रो. राका आर्या ने कहा कि भाषा विनिमय और आजीविका से अधिक स्वाभिमान का विषय है। प्रो. राजेंद्र कुमार अनायथ ने मानवीय विकास की तीन आवश्यकताओं सुनना, देखना और चिंतन पर जोर दिया और गुरु को गुणातीत बताया। डॉ. दीपक ने त्रिभाषाई सुधार की वकालत की, जिसमें प्रत्येक प्रदेश में अंग्रेजी के स्थान पर प्रादेशिक भाषा, हिंदी और संस्कृत को राजकीय कार्यों में अपनाया जाए। मुख्य वक्ता प्रो. नीरजा गुप्ता ने कहा कि भारतीय कथाओं और लोकाचार में गहरा साम्य है। सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने की, जिन्होंने भाषा को सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और परिवेश से जोड़ा। धन्यवाद डॉ. प्रशांत शर्मा ने दिया और मंच संचालन डॉ. आंचल चौहान ने किया। प्लेनरी सत्र में प्रो. राजेंद्र कुमार अनायथ ने भाषा के विकास पर प्रकाश डाला। अन्य वक्ता प्रो. जितेंद्र साहू और प्रो. वाचस्पति मिश्र रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा चाणक्य सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसका विषय भारतीय भाषा, परिवार, एकत्व और एकात्मत रहा। सम्मेलन में देशभर के विद्वानों, कुलपतियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया और भारतीय भाषाओं की विविधता के बीच अंतर्निहित एकता पर गहन चर्चा की।
डॉ. ओमपाल शास्त्री ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अतिथियों ने भारतीय भाषा परिवार से संबंधित कुछ पुस्तकों का विमोचन किया गया। डॉ. मुनेश कुमार ने विषय प्रवेश कराया। विशिष्ट अतिथि प्रो. राका आर्या ने कहा कि भाषा विनिमय और आजीविका से अधिक स्वाभिमान का विषय है। प्रो. राजेंद्र कुमार अनायथ ने मानवीय विकास की तीन आवश्यकताओं सुनना, देखना और चिंतन पर जोर दिया और गुरु को गुणातीत बताया। डॉ. दीपक ने त्रिभाषाई सुधार की वकालत की, जिसमें प्रत्येक प्रदेश में अंग्रेजी के स्थान पर प्रादेशिक भाषा, हिंदी और संस्कृत को राजकीय कार्यों में अपनाया जाए। मुख्य वक्ता प्रो. नीरजा गुप्ता ने कहा कि भारतीय कथाओं और लोकाचार में गहरा साम्य है। सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने की, जिन्होंने भाषा को सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और परिवेश से जोड़ा। धन्यवाद डॉ. प्रशांत शर्मा ने दिया और मंच संचालन डॉ. आंचल चौहान ने किया। प्लेनरी सत्र में प्रो. राजेंद्र कुमार अनायथ ने भाषा के विकास पर प्रकाश डाला। अन्य वक्ता प्रो. जितेंद्र साहू और प्रो. वाचस्पति मिश्र रहे।
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