बेटियां कैसे करें पढ़ाई, पांचवीं के बाद नहीं कोई स्कूल, जानिए- यूपी के इस जिले का हाल
- पांचवीं के बाद स्कूल जाना छोड़ देती हैं कासा पुट्ठी की बेटियां
- मवी खुर्द गांव के मजरे में लड़कियों को नहीं मिल रहा शिक्षा का अधिकार
- सुरक्षा के डर से दूसरे गांव में भेजकर लड़कियों को नहीं कराते पढ़ाई
विस्तार
बेटियों को शिक्षित करने के तमाम दावे मवी खुर्द गांव के मजरे कासा पुट्ठी में हवाई साबित हो रहे हैं। प्रशासन के अभियान का असर गांव की आधी आबादी के बीच नहीं दिखता। हैरान कर देने वाली बात यह है कि पांचवीं के बाद बेटियां स्कूल जाना छोड़ देती हैं। सुरक्षा का डर और जागरूकता के अभाव में लड़कियों की पढ़ाई छुड़वा दी जाती है। बागपत जनपद के कासा पुट्ठी की एक भी लड़की दसवीं कक्षा तक नहीं पहुंच सकी हैं। मुस्लिम बाहुल्य गांव में पढ़ने की उम्र में बेटियों को खेती और मजदूरी में लगा दिया जाता है। ग्रामीण कहते हैं कि गांव में शिक्षा की व्यवस्था नहीं है, सुरक्षा की चिंता में वह बेटियों को दूसरे गांव में पढ़ने के लिए नहीं भेज सकते। सरकार को उनके गांव में ही दसवीं तक की शिक्षा का इंतजाम करना चाहिए, ताकि बेटियां पढ़ सकें।
जानिए कासा पुट्ठी को
पिलाना ब्लॉक के गांव मवी खुर्द के मजरा कासा पुट्ठी की आबादी करीब एक हजार हैं। मुस्लिम बाहुल्य मजरा हैं। बेहतर आर्थिक स्थिति वाले लोग हर साल यहां से पलायन कर जाते हैं। गांव में पांच साल तक के 75 बच्चें हैं। इनमें 40 लड़कें और 35 लड़कियां हैं। इसके अलावा छह से 14 साल की उम्र के 33 लड़कें और 25 लड़कियां हैं।
अकेले मेहरबान ने दिखाई दिलेरी
कासा पुट्ठी में शिक्षा के अंधेरे को दूर करने का बीड़ा किसान मेहरबान ने उठाया। साल 2002 में मेहरबान ने अपनी जमीन बच्चों को शिक्षित करने के लिए सरकारी स्कूल को दे दी। पांचवीं तक का स्कूल बना तो गांव में साक्षरता पहुंची। लेकिन अब भी गांव के लोग पांचवीं के बाद बच्चों को नहीं पढ़ा रहे हैं।
दसवीं तक पहुंची, अदावत में छूट गई पढ़ाई
प्राथमिक स्कूल के लिए जमीन देने वाले मेहरबान की बेटी शाबरा ने हिम्मत कर बुढ़सैनी में पांचवीं के बाद पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2013 में हाईस्कूल की परीक्षा देनी थी, लेकिन इस दौरान बुढ़सैनी और पुरा गांव के ग्रामीणों के बीच विवाद हो गया था। अभिभावक इतने डर गए कि शाबरा की पढ़ाई भी छुड़वा दी।
क्या कहते हैं ग्रामीण
कासा पुट्ठी की मस्जिद के मौलवी मुसाहिद का कहना है कि एक तो गांव के लोग खुद हिम्मत नहीं करते और दूसरी तरफ गांव में पांचवी के बाद कोई स्कूल नहीं है। जिस कारण बेटियों की आगे की पढ़ाई नहीं हो पाती है।
- ग्रामीण आस मौहम्मद का कहना है कि गांव में पांचवीं के बाद स्कूल नहीं है, बेटियों को दूर भेजने से डर लगता है। गांव में ही शिक्षा का इंतजाम होना चाहिए।
- ग्रामीण मुन्ना का कहना है कि मजदूर आदमी अपना घर संभालेगा या बच्चों को पढ़ाए। गांव के लोग आर्थिक तौर पर कमजोर हैं। पढ़ाई का इंतजाम गांव में होना चाहिए।
- अनीशा का कहना है कि माहौल खराब है, जिसके कारण बेटियों को घर से दूर भेजने से डर लगता है। यही वजह है गांव की लड़कियां पांचवीं के बाद नहीं पढ़ पाती।
क्या कहता है सिस्टम
कासा पुट्ठी में तैनात आशा कार्यकर्ता मेहराना, एएनएम वर्षा उज्जवल और आंगनवाड़ी रजनी का कहना है कि गांव के लोगों में जागरूकता नहीं हैं। यही कारण है कि यहां के लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं।
क्या कहते हैं प्रधान
मवी खुर्द और कासा पुट्ठी के प्रधान शोकिंद्र कुमार का कहना है कि ग्रामीणों को प्रेरित किया जाता है। लड़कियों को स्कूल भेजने के लिए कहा जाता है, लेकिन ग्रामीण जागरूक नहीं है। लोगों को और अधिक जागरूक किया जाएगा।
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