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Meerut News: मनुष्य के उद्धार के लिए धर्म और ज्ञान से बड़ा कोई दूसरा विकल्प नहीं
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री कृष्ण मंदिर में चल रही शिव महापुराण कथा में चौथे दिन कथा व्यास वर्षा गॉड ने भगवान शिव की महिमा का व्याख्यान किया। इस दौरान कथा पांडाल में उपस्थित भक्तजन झूम उठे।
भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए मथुरा वृंदावन से आई कथा व्यास वर्षा गॉड ने कहा कि मनुष्य के उद्धार के लिए धर्म और ज्ञान से बड़ा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। धर्म को न मानने वाले लोग अधर्मी और अशुद्ध होते हैं। इस भूतल पर कल्याण के लिए इस कथा से उत्तम दूसरा कोई साधन नहीं है। उन्होंने कहा कि महापुराण के पठन अथवा ज्ञान से अवश्य ही पापी, दुराचारी लोग शुद्ध हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ प्राचीन इतिहास का वर्णन मुनियों ने कुछ इस प्रकार से किया है, जिसके श्रवण या पठन से पापों का संपूर्ण नाश हो जाता है। भगवान शिव की आराधना मनुष्य को मोक्ष प्रदान करती है। इसलिए समस्त मानव जाति को भगवान शिव की निर्मल मन से उपासना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि आप परम तत्व के बारे में अवगत करवाएं। जिसकी शरण में जाने से मुक्ति मिल जाती हो। पार्वती की बात सुनकर भगवान शिव बोले कि हे देवी विज्ञान ही परम तत्व है और यह ज्ञान मनुष्य के अंतर्मन में ही विराजमान रहता है। मगर आज का इंसान सांसारिक मोह माया में उलझा हुआ है। जिसकी वजह से वह जीवन काल तक इधर से उधर भटकता रहता है।
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उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन में शिव महापुराण का रसपान करना उतना ही जरूरी है, जितना उसके जीवन की लिए भोजन। आयोजक पंडित दिनेश शर्मा, गोपाल शर्मा, मुकेश ठाकुर, आनंगपाल, ठाकुर, गौरव गुर्जर आदि मौजूद रहे।
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भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए मथुरा वृंदावन से आई कथा व्यास वर्षा गॉड ने कहा कि मनुष्य के उद्धार के लिए धर्म और ज्ञान से बड़ा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। धर्म को न मानने वाले लोग अधर्मी और अशुद्ध होते हैं। इस भूतल पर कल्याण के लिए इस कथा से उत्तम दूसरा कोई साधन नहीं है। उन्होंने कहा कि महापुराण के पठन अथवा ज्ञान से अवश्य ही पापी, दुराचारी लोग शुद्ध हो सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि कुछ प्राचीन इतिहास का वर्णन मुनियों ने कुछ इस प्रकार से किया है, जिसके श्रवण या पठन से पापों का संपूर्ण नाश हो जाता है। भगवान शिव की आराधना मनुष्य को मोक्ष प्रदान करती है। इसलिए समस्त मानव जाति को भगवान शिव की निर्मल मन से उपासना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि आप परम तत्व के बारे में अवगत करवाएं। जिसकी शरण में जाने से मुक्ति मिल जाती हो। पार्वती की बात सुनकर भगवान शिव बोले कि हे देवी विज्ञान ही परम तत्व है और यह ज्ञान मनुष्य के अंतर्मन में ही विराजमान रहता है। मगर आज का इंसान सांसारिक मोह माया में उलझा हुआ है। जिसकी वजह से वह जीवन काल तक इधर से उधर भटकता रहता है।
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उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन में शिव महापुराण का रसपान करना उतना ही जरूरी है, जितना उसके जीवन की लिए भोजन। आयोजक पंडित दिनेश शर्मा, गोपाल शर्मा, मुकेश ठाकुर, आनंगपाल, ठाकुर, गौरव गुर्जर आदि मौजूद रहे।