ऐसा है यूपी में सरकारी अस्पतालों का हाल, न डॉक्टर, न ही दवाएं, मरीज कहां कराएं इलाज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 30 Oct 2020 05:13 PM IST
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मेरठ में सरकारी अस्पतालों में दवाओं का टोटा है। मेडिकल कॉलेज में 389 और जिला अस्पताल में 15 तरह की दवाओं की कमी है। साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या भी कम होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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मेडिकल में 839 तरह की दवाएं रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से इन दिनों 450 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। जिला अस्पताल में 240 तरह की दवाएं पंजीकृत हैं, जिनमें से 225 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। जिला अस्पताल में हर तीन माह में दवाओं का 10 लाख रुपये बजट मिलता है, जो इस तिमाही नहीं आया है। इनके अलावा स्वास्थ्य विभाग में अभी (सीएमओ के अंतर्गत) पर्याप्त दवाएं हैं। 
दूसरी तरफ, कोरोना महामारी चलते हुए सात माह हो गए, मगर चिकित्सकों की भरपाई नहीं हो सकी। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर 103 चिकित्सक मानकों से कम चल रहे हैं। सरकारी चिकित्सालयों में हर साल 15 लाख से ज्यादा मरीज आते हैं। इन्हें ठीक से उपचार नहीं मिल रहा है। जिस कारण बड़ी संख्या में मरीज प्राइवेट अस्पतालों में जाने को मजबूर होते हैं। 
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के अंतर्गत आने वाले चिकित्सकों में 20 चिकित्सक मानकों से कम हैं। सीएचसी-पीएचसी और अर्बन हेल्थ सेंटर आदि पर 182 चिकित्सक होने चाहिए, लेकिन 162 हैं। इनमें अधिकांश जगह सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टर हैं, विशेषज्ञ नहीं। 12 सर्जन होने चाहिए, मगर है सिर्फ एक। महिला जिला अस्पताल में जहां 24 महिला चिकित्सक होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 10 हैं।

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