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Meerut News: प्रदेश की जेलों में क्षमता से काफी ज्यादा हैं बंदी
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविधालय के छात्र नेता विनीत चपराना ने आरटीआई के माध्यम से प्रदेश कि जेलों की क्षमता और इनमें निरुद्ध बंदियों जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। जिसमें पता चला कि पश्चिम उत्तर प्रदेश कि जेलों कि हालत बद से बदतर है। गौतमबुद्ध नगर जेल को छोड़कर सभी जेल में क्षमता से ज्यादा बंदी हैं।
मुख्यालय कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं से मिली पांच जिलों सूचना के मुताबिक गौतमबुद्धनगर जेल कि स्थिति सबसे अच्छी है। इस जेल में 2744 बंदी हैं और इसकी क्षमता 3750 है। गाजियाबाद की डासना जेल में 4222 बंदी निरुद्ध है और इसकी क्षमता 1704 बंदियों की है। मुजफ्फरनगर में 2473 बंदी निरुद्ध है और इसकी क्षमता 870 बंदियों की है। बागपत जेल में 843 बंदी निरुद्ध है और इसकी क्षमता 660 बंदियों की है। बिजनौर जेल में 1612 बंदी निरुद्ध है और इसकी क्षमता 654 है। विनीत चपराना कहना है कि यूपी कि जेलों में बंदियों को जानवरों कि तरह रखा गया है। यूपी में कुल 76 कारागार है, जिनमें वर्तमान में 91,436 बंदी निरुद्ध है। जबकि 76 जेलों में बंदियों को रखने कि कुल क्षमता 75,512 है। वह इस मामले में मानवाधिकार आयोग के समक्ष लिखित में भेजेंगे और शिकायत करेंगे।
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मुख्यालय कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं से मिली पांच जिलों सूचना के मुताबिक गौतमबुद्धनगर जेल कि स्थिति सबसे अच्छी है। इस जेल में 2744 बंदी हैं और इसकी क्षमता 3750 है। गाजियाबाद की डासना जेल में 4222 बंदी निरुद्ध है और इसकी क्षमता 1704 बंदियों की है। मुजफ्फरनगर में 2473 बंदी निरुद्ध है और इसकी क्षमता 870 बंदियों की है। बागपत जेल में 843 बंदी निरुद्ध है और इसकी क्षमता 660 बंदियों की है। बिजनौर जेल में 1612 बंदी निरुद्ध है और इसकी क्षमता 654 है। विनीत चपराना कहना है कि यूपी कि जेलों में बंदियों को जानवरों कि तरह रखा गया है। यूपी में कुल 76 कारागार है, जिनमें वर्तमान में 91,436 बंदी निरुद्ध है। जबकि 76 जेलों में बंदियों को रखने कि कुल क्षमता 75,512 है। वह इस मामले में मानवाधिकार आयोग के समक्ष लिखित में भेजेंगे और शिकायत करेंगे।
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