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बिजनौर गंगा बैराज पर जलस्तर का पैमाना गड़बड़ाया

Sat, 09 Aug 2025 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 09 Aug 2025 12:03 AM IST
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The water level at Bijnor Ganga Barrage got disturbed
बिजनौर गंगा बैराज। संवाद
- गेज मीटर के पैमाने पर जलस्तर की तस्वीर अलग, असल आंकड़ा कुछ और
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- बैराज के पास निर्माणाधीन पुल से टकराकर लहरें उठने को माना जा रहा कारण
- जलस्तर के गेज को लेकर की जाएगी रिसर्च, उच्च अफसरों को कराया अवगत
बिजनौर। बिजनौर गंगा बैराज पर जलस्तर का पैमाना ही गड़बड़ा गया है। दरअसल गेज मीटर मापने के लिए बने पैमाने पर जलस्तर कुछ और नजर आ रहा है जबकि वास्तविक तस्वीर अलग है। जलस्तर में एक मीटर की गड़बड़ी चल रही है। इसे सुधारने के लिए बिजनौर बैराज पर शोध किया जाएगा।
जिले की नदियों में बाढ़ है। गंगा में कितना पानी बह रहा है, यह जानने के लिए बिजनौर बैराज का गेज मीटर पर देखना पड़ता है। यह पारंपरिक तरीका है। यह पैमाना पुल के पिलर पर बना हुआ है। जिसमें सेंटीमीटर और मीटर के बिंदु बने हुए हैं। हालांकि बैराज पर ऑटोमेटिक जलस्तर भी मापा जाने लगा है लेकिन यह भी ट्रायल पर है। जिसके आंकड़े जारी नहीं किए जा रहे हैं।
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इसके इतर अभी पारंपरिक पैमाने को देखकर ही जलस्तर के आंकड़े जारी किए जा रहे हैंं। पिछले दो दिनों से सिंचाई विभाग की ओर से जारी हो रहे आंकड़ों में स्थिति अलग अलग भेजी जा रही है।
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उदाहरण के तौर पर शुक्रवार को बिजनौर बैराज पर गंगा का जलस्तर 220.30 मीटर रहा, इस आंकड़े के सामने दिखाई देना लिखा गया है। वहीं वास्तविक जलस्तर 219.30 जारी किया गया। जिसमें हर कोई उलझ रहा है। पड़ताल के बाद मालूम हुआ कि बैराज पर पैमाना ही गड़बड़ा गया है। सिंचाई विभाग ने बताया कि बैराज से नीचे की ओर एक और नया पुल बना रहा है। जिसे लेकर पानी के बहाव में मामूली अवरोध हुआ है और पानी की लहरें उठकर वापस लौट रही हैं, जिससे पैमाने पर जलस्तर कुछ और दिखाई दे रहा है। साथ ही सूत्रों का कहना है कि बैराज के पास सिल्ट जमा होने से भी ऐसा हो सकता है।


पैमाने पर किया जाएगा शोध
समुद्रतल के अनुसार ही अलग अलग जगहों पर जलस्तर मापने के लिए पैमाने बनाए गए हैं। बिजनौर बैराज का पैमाना भी पुल निर्माण के साथ ही बना था। अब जलस्तर के गेज मीटर में अंतर आने का कारण कुछ भी हो मगर इस पर शोध किया जाएगा। मध्य गंगा नहर खंड पांच के अधिशासी अभियंता ब्रजेश मौर्य ने बताया कि गेज मीटर में आ रहे अंतर को लेकर उच्च अफसरों को अवगत कराया गया है। इस पर आईआईटी रुड़की से संपर्क करते हुए रिसर्च की जाएगी। गेज की टेबल फिर से बनेगी या कुछ और होगा, यह रिसर्च के बाद ही पता चलेगा।
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