यूपी पुलिस को नहीं है बेटियों की परवाह, सबूत के लिए काफी हैं ये तीन केस
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पुलिस की लापरवाही के चलते अब तक कई बेटियां अपनी जान गंवा चुकी हैं। प्रदेश सरकार बेहतर कानून व्यवस्था के प्रयास में लगी है, लेकिन पुलिस सुधरने का नाम नहीं ले रही है। बेटियों की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉयड भी बनाया। इसके बावजूद पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। पुलिस की लापरवाही बेटियों की जान पर भारी पड़ रही है।
केस- 1
भावनपुर में नवंबर 2017 में शोहदों से परेशान होकर एक छात्रा ने केरोसिन उडे़लकर आग लगा ली थी। पुलिस ने अस्पताल में जाकर छात्रा के बयान तक दर्ज नहीं कराए। छात्रा की मौत के बाद पुलिस की नींद टूटी। बाद में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। लेकिन पुख्ता सुबूत नहीं होने के चलते केस कमजोर बना।
केस- 2
सरधना में तीन माह पहले शोहदों से छात्रा को घर में घुसकर आग लगा दी थी। मामला लखनऊ पहुंचने के बाद पुलिस की नींद टूटी। इस मामले में भी पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। छात्रा के परिजनों का आरोप था कि पुलिस से कई बार शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
केस- 3
मवाना में एक महिला के साथ दुकानदार ने मजदूरी मांगने पर छेड़छाड़ और मारपीट की। महिला ने थाने पर तीन बार तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया। पीड़िता ने एसएसपी, सीओ से भी शिकायत की। न्याय के लिए बुधवार को महिला अपनी ननद के साथ तहसील में धरने पर बैठ गई। धरने पर बैठने के बाद पुलिस दोनों को चालान करने की धमकी देती रही। यह तो सिर्फ बानगी भर है।
न्याय दिलाना प्राथमिकता
सभी फरियादियों को न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिकता में है। बेटियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस गंभीर है। यदि कोई अपने कर्तव्य को नहीं समझ रहा है तो उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाकर कार्रवाई की जायेगी। - अविनाश पांडेय, एसपी देहात
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