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Meerut News: आधुनिक समय में बदली नवरात्र पर साझी माई लगाने की परंपरा

Mon, 22 Sep 2025 08:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Sep 2025 08:54 PM IST
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The tradition of planting Saajhi Mai on Navratri has changed in modern times.
माछरा। बदलाव की बयार में भले ही बहुत कुछ बदल गया हो लेकिन नवरात्र के मौके पर साझी माई की पूजा की परंपरा आज भी बराबर है। देहात में साझी माई के रूप में दुर्गा पूजा किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है। नवरात्र के आरंभ में दीवारों पर साझी माई की मूर्ति स्थापित करते हैं। हालांकि, अब लोग रेडिमेड मूर्तियां व कैलेंडर आदि का भी सहारा ले रहे हैं।
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शारदीय नवरात्र आरंभ होने से पूर्व ही ग्रामीण अचल में महिलाएं मां दुर्गा की मूर्तियां यानी साझी माई पूरी श्रद्धा भाव के साथ बनाने में जुट जाती हैं। मां दुर्गा की मिट्टी से बनी मूर्तियों की पूजा घर-घर की जाती है। यह बात अलग है कि शहरों में आधुनिकीकरण के चलते साझी माई की परंपरा समाप्ति की ओर है लेकिन देहात में तालाबों, पोखरों पर लगातार हो रहे अवैध कब्जों के चलते चिकनी मिट्टी न मिलने की वजह से गांव में भी साझी माई की जगह मूर्तियां स्थान पा रही हैं लेकिन अभी भी देहात में साझी माई बनाने व पूजन की परंपरा बदस्तूर जाती है।
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नवरात्र से पूर्व अमावस्या के दिन हिंदू परिवारों में साझी माई की मूर्तियां स्थापित की जाती है। श्रद्धालु नौ दिन माता की पूजा-अर्चना करते हैं। पहले तो परिजन व कुटुंब के लोग सामूहिक रूप से साझी माई की पूजा किया करते थे। मगर अब बदलते दौर में अलग-अलग पूजन का चलन है। बुजुर्ग इसका कारण लोगों में घट रहा प्यार व समय का अभाव मानते हैं।
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सविता देवी, रामरती बताती हैं कि उनके जमाने में तालाब गांव से काफी दूर हुआ करते थे। वह तालाब से मिट्टी लाया करती थी लेकिन अब रेडिमेड मूर्तियों का चलन उन्हें अच्छा नहीं लगता है। सुनीता, चंचल, रिया आदि का कहना है कि भले ही कितना ही बदलाव आ गया हो लेकिन साझी माई की स्थापना उनके लिए एक अलग व सुकूनदायी अनुभव है। वह हर वर्ष मां दुर्गा के अलावा गणेश व शिव, पार्वती की मूर्ति बड़े ही श्रद्धा भाव से बनाते चले आ रहे हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। दशहरे पर इनका विसर्जन तालाब आदि पर करते हैं।
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