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Meerut News: डॉल्फिन गणना के लिए निकली टीम घड़ियाल और कछुए देख हुई उत्साहित
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बिजनौर से चली टीम ने कुंडा तक की डॉल्फिन गणना
पहले दिन बिजनौर से सिरजेपुर तक हुई थी डॉल्फिन गणना
बिजनौर बैराज पर दिखी चार डॉल्फिन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बिजनौर गंगा बैराज से मंगलवार को डॉल्फिन गणना के लिए यात्रा शुरू हो गई। पहले दिन गंगा बैराज पर चार डॉल्फिन दिखाई दी। पहले दिन 35 किमी यात्रा कर गणना की गई, वहीं दूसरे दिन टीम कुंडा पहुंच गई। इस दौरान डॉल्फिन के साथ कछुए, घड़ियाल भी बड़ी संख्या में टीम को दिखाई दे रहे हैं।
वन विभाग की ओर से मुख्य वन संरक्षक एनके जानू, डीएफओ ज्ञान सिंह और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कोआर्डिनेटर संजीव यादव गंगा बैराज पहुंचे। पहले कार्यक्रम कर लोगों को डॉल्फिन के बारे में बताया। डीएफओ ने कहा कि जलीय जीव ही नदियों को प्रदूषित होने से रोकते हैं। जलीय जीवों की रक्षा के लिए हमें भी इनका शिकार नहीं करना चाहिए। कहा कि गंगा में हर साल डॉल्फिन की संख्या बढ़ रही है, जिसका मतलब है कि गंगा का पानी साफ है।
हरी झंडी दिखाकर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कॉर्डिनेटर संजीव यादव के नेतृत्व में टीम रवाना की गई। टीम को बैराज के पास ही चार डॉल्फिन दिखाई दी। पहले दिन करीब 35 किमी बिजनौर से सिरजेपुर तक गणना की गई। दूसरे दिन यह यात्रा कुंडा तक पहुंची और इसके बाद गढ़ मुक्तेश्वर तक जाएगी। संजीव यादव ने बताया कि टीम गंगा में मोटरबोट से यात्रा कर डॉल्फिन देखती है और उसका जीयो टैग भी करती है। पिछले साल हस्तिनापुर बारसिंघा सेंक्चुअरी में 32 डॉल्फिन दिखाई दी थी। अभी आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। इस बार यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
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तरंगों से करती है शिकार
गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन को गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन कहते हैं। यह समंदर में मिलने वाली डॉल्फिन से अलग होती हैं। गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन देख नहीं पाती। ये गंगा में मछलियां खाती हैं और अपने रडार सिस्टम से निकलने वाली तरंगों से शिकार की पहचान कर उसे पकड़ती हैं। मादा डॉल्फिन की लंबाई पौने दो मीटर तक होती है। नर डॉल्फिन मादा से छोटा होता है।
सामाजिक प्राणी हैं डॉल्फिन
गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन सामाजिक प्राणी होती हैं। यह कभी कभी नाव या पानी में तैरने वाले मनुष्यों पास आकर उनके साथ तैरने लगती हैं। यह आक्रामक प्रवृत्ति की नहीं होती हैं और मनुष्य पर हमला नहीं करती हैं।
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पहले दिन बिजनौर से सिरजेपुर तक हुई थी डॉल्फिन गणना
बिजनौर बैराज पर दिखी चार डॉल्फिन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बिजनौर गंगा बैराज से मंगलवार को डॉल्फिन गणना के लिए यात्रा शुरू हो गई। पहले दिन गंगा बैराज पर चार डॉल्फिन दिखाई दी। पहले दिन 35 किमी यात्रा कर गणना की गई, वहीं दूसरे दिन टीम कुंडा पहुंच गई। इस दौरान डॉल्फिन के साथ कछुए, घड़ियाल भी बड़ी संख्या में टीम को दिखाई दे रहे हैं।
वन विभाग की ओर से मुख्य वन संरक्षक एनके जानू, डीएफओ ज्ञान सिंह और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कोआर्डिनेटर संजीव यादव गंगा बैराज पहुंचे। पहले कार्यक्रम कर लोगों को डॉल्फिन के बारे में बताया। डीएफओ ने कहा कि जलीय जीव ही नदियों को प्रदूषित होने से रोकते हैं। जलीय जीवों की रक्षा के लिए हमें भी इनका शिकार नहीं करना चाहिए। कहा कि गंगा में हर साल डॉल्फिन की संख्या बढ़ रही है, जिसका मतलब है कि गंगा का पानी साफ है।
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हरी झंडी दिखाकर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कॉर्डिनेटर संजीव यादव के नेतृत्व में टीम रवाना की गई। टीम को बैराज के पास ही चार डॉल्फिन दिखाई दी। पहले दिन करीब 35 किमी बिजनौर से सिरजेपुर तक गणना की गई। दूसरे दिन यह यात्रा कुंडा तक पहुंची और इसके बाद गढ़ मुक्तेश्वर तक जाएगी। संजीव यादव ने बताया कि टीम गंगा में मोटरबोट से यात्रा कर डॉल्फिन देखती है और उसका जीयो टैग भी करती है। पिछले साल हस्तिनापुर बारसिंघा सेंक्चुअरी में 32 डॉल्फिन दिखाई दी थी। अभी आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। इस बार यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
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तरंगों से करती है शिकार
गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन को गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन कहते हैं। यह समंदर में मिलने वाली डॉल्फिन से अलग होती हैं। गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन देख नहीं पाती। ये गंगा में मछलियां खाती हैं और अपने रडार सिस्टम से निकलने वाली तरंगों से शिकार की पहचान कर उसे पकड़ती हैं। मादा डॉल्फिन की लंबाई पौने दो मीटर तक होती है। नर डॉल्फिन मादा से छोटा होता है।
सामाजिक प्राणी हैं डॉल्फिन
गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन सामाजिक प्राणी होती हैं। यह कभी कभी नाव या पानी में तैरने वाले मनुष्यों पास आकर उनके साथ तैरने लगती हैं। यह आक्रामक प्रवृत्ति की नहीं होती हैं और मनुष्य पर हमला नहीं करती हैं।