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Meerut News: मेले में अब सुनाई नहीं देती बैलों की घंटियों की आवाज

Wed, 13 Nov 2024 03:02 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2024 03:02 AM IST
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The sound of bull bells is no longer heard in the fair
हस्तिनापुर। आधुनिकता की दौड़ में हमारे पर्व और त्योहारों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जिनमें से एक है प्राचीन बैलगाड़ी और बोगी। जब कार्तिक पूर्णिमा का मेला आयोजित होता था तो युवाओं और बुजुर्गों की टोली बैल-बोगी के माध्यम से मेले में पहुंचती थी। उनके गले में बजने वाली घंटी की दिलकश आवाज अपनी और आकर्षित करती थी।
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वक्त के साथ-साथ मखदूमपुर गंगा मेले में भी काफी बदलाव हुआ है। पहले जहां दूरदराज के श्रद्धालु बैलगाड़ियों से मेले में पहुंचते थे। वहीं अब बैलगाड़ियों की जगह ट्रैक्टर-ट्रालियों ने ले ली है। मखदूमपुर और हस्तिनापुर गंगा मेला सदियों से लगता आ रहा है। इसमें अपने जिले ही नहीं बल्कि आस पास के जिलों के श्रद्धालु कई दिन पूर्व से डेरा जमा लेते हैं। श्रद्धालुओं को मेले का इंतजार रहता है।
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मोह लेती थी बैलों की घंटियों की आवाज

बचपन से हर साल मेले में आ रहे हैं। मेले में सुविधाओं में इजाफा हुआ है। पहले श्रद्धालु बैलगाड़ियों से मेले में आते थे। बैलों के गले में तेज आवाज देने वाली पीतल की घंटी बंधी होती थी। जिसकी आवाज मन को मोह लेती थी। वह अब मेले से गायब है। - कलीराम
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नहीं सुनाई देती रागनी और नौटंकी
बीते 25 साल से मेले में आ रहे हैं। उनका कहना है कि मेला राजकीय होने के कारण सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची है। खेलकूद प्रतियोगिताएं हो रही हैं। पहले लोग रागिनी, रसिया, नौटंकी पर ही निर्भर रहते थे। परंतु आज उन धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन मेलों में नहीं होता। - गोपाल शर्मा


मेले में मजबूत हुई सुरक्षा-व्यवस्था

कार्तिक पूर्णिमा मेले को लेकर आपस में बहुत प्यार होता था जो आज नहीं है। हुड़दंगबाजी के चलते मेले में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। साफ-सफाई के भी अच्छे इंतजाम हैं। पूरे मेले को परिवार के साथ देखा करते थे परंतु आज किसी के पास समय नहीं। मेले में बैलगाड़ी, तांगा आदि दिखाई नहीं देते। - जगवीरी


अब नजर आ रही हैं कारें
कार्तिक पूर्णिमा मेले का इतना शौक था कि 10 दिन पहले ही घर से दोस्तों के साथ निकल जाया करते थे। पहले मेले में तंबुओं के साथ ही दूर-दूर तक बैलगाड़ियां, बुग्गी दिखाई देती थीं, लेकिन अब कारें नजर आ रही हैं। - ठाकुर श्रीकिशन
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