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साहित्य की आत्मा गांवों में बसती है, शहरों में बढ़ी औपचारिकता : डॉ. हरिओम पंवार
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सरधना। श्री शालिगराम शर्मा स्मारक इंटर कॉलेज रासना में आयोजित होने वाले कवि सम्मेलन को लेकर प्र
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। श्री शालिगराम शर्मा स्मारक इंटर कॉलेज रासना में बुधवार को प्रस्तावित दिवंगत ओमप्रकाश त्यागी की जन्म शताब्दी समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन से एक दिन पूर्व वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पंवार ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने अपने साहित्यिक अनुभव साझा करते हुए रासना से अपने पुराने जुड़ाव को भी याद किया।
डॉ. हरिओम पंवार ने बताया कि उन्हें रासना में पहली बार वर्ष 1974 में काव्य पाठ करने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने रासना को क्रांतिकारियों की भूमि बताते हुए स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया था। उन्होंने कहा कि आज भी यहां की मिट्टी में देशभक्ति और साहित्य के प्रति विशेष सम्मान देखने को मिलता है। उन्होंने ग्रामीण और शहरी परिवेश में कविता के प्रति दृष्टिकोण पर भी खुलकर बात रखी।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश में मन से काव्य पाठ और शहरी परिवेश में धन से सुनने वाले श्रोता होते हैं। उनके अनुसार गांवों में कविता को भावनात्मक रूप से आत्मसात किया जाता है, जबकि शहरों में आयोजन अधिक औपचारिक और व्यावसायिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कवि सम्मेलन में कवि डॉ. सुनील जोगी, डॉ. विष्णु सक्सेना, सर्वेश अस्थाना, डॉ. प्रवीण शुक्ल, अभय निर्भीक, प्रियंका राय, मोहित गौरव, पंकज त्यागी, सुमनेश सुमन और कुशल कुशलेंद्र शामिल रहेंगे। इस अवसर पर मनिंदरपाल सिंह, प्रदीप त्यागी, ईश्वर दयाल त्यागी, हर्ष कुमार, अजय त्यागी, मदनपाल सिंह, डॉ. ओपी तोमर, भूषण त्यागी, मयंक त्यागी, और पवन त्यागी उपस्थित रहे।
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सरधना। श्री शालिगराम शर्मा स्मारक इंटर कॉलेज रासना में बुधवार को प्रस्तावित दिवंगत ओमप्रकाश त्यागी की जन्म शताब्दी समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन से एक दिन पूर्व वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पंवार ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने अपने साहित्यिक अनुभव साझा करते हुए रासना से अपने पुराने जुड़ाव को भी याद किया।
डॉ. हरिओम पंवार ने बताया कि उन्हें रासना में पहली बार वर्ष 1974 में काव्य पाठ करने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने रासना को क्रांतिकारियों की भूमि बताते हुए स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया था। उन्होंने कहा कि आज भी यहां की मिट्टी में देशभक्ति और साहित्य के प्रति विशेष सम्मान देखने को मिलता है। उन्होंने ग्रामीण और शहरी परिवेश में कविता के प्रति दृष्टिकोण पर भी खुलकर बात रखी।
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उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश में मन से काव्य पाठ और शहरी परिवेश में धन से सुनने वाले श्रोता होते हैं। उनके अनुसार गांवों में कविता को भावनात्मक रूप से आत्मसात किया जाता है, जबकि शहरों में आयोजन अधिक औपचारिक और व्यावसायिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कवि सम्मेलन में कवि डॉ. सुनील जोगी, डॉ. विष्णु सक्सेना, सर्वेश अस्थाना, डॉ. प्रवीण शुक्ल, अभय निर्भीक, प्रियंका राय, मोहित गौरव, पंकज त्यागी, सुमनेश सुमन और कुशल कुशलेंद्र शामिल रहेंगे। इस अवसर पर मनिंदरपाल सिंह, प्रदीप त्यागी, ईश्वर दयाल त्यागी, हर्ष कुमार, अजय त्यागी, मदनपाल सिंह, डॉ. ओपी तोमर, भूषण त्यागी, मयंक त्यागी, और पवन त्यागी उपस्थित रहे।
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