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60 बीघा जमीन और सरकारी मदद के बाद भी हालात बदतर

Thu, 01 Jul 2021 02:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Jul 2021 02:33 AM IST
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The situation is worse even after 60 bighas of land and government help
60 बीघा जमीन और सरकारी मदद के बाद भी हालात बदतर
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सरधना। प्रदेश सरकार गोवंश की देखभाल के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। इसके बाद भी गोशाला संचालक गोवंशों की देखभाल में लापरवाही बरत रहे हैं। पशुपालक भी दूध नहीं देने वाली गायों को खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में उनकी हालत दयनीय है। गोशालाओं पर सरकार काफी रुपया खर्च कर रही है, लेकिन उस पैसे में भी बंदरबांट की जा रही है। इसी के चलते कपसाड़ में गोशाला कमेटी व ग्रामीण आमने-सामने हैं।
कपसाड़ में 118 वर्ष पूर्व साधू जगराम सिंह ने गोशाला का संचालन शुरू किया था। उनके निधन के बाद धर्मदेव ब्रह्मचारी और उनके बाद सत्यदेव ब्रह्मचारी ने गोशाला की कमान संभाली। उस समय तक गोशाला में गोवंश को छोड़ने पर रसीद नहीं काटी जाती थी। न ही गोशाला के नाम पर चंदा लिया जाता था। ग्रामीणों का हस्तक्षेप बढ़ा तो सत्यदेव ब्रह्मचारी को गोशाला से बाहर कर रजिस्टर्ड कमेटी का गठन करा दिया गया। उसके बाद से ही आय-व्यय को लेकर ग्रामीणों व कमेटी के बीच आरोप प्रत्यारोप लगते रहते हैं।
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पांच वर्ष पूर्व जब कमेटी को घोटाले के आरोप में बर्खास्त किया गया था, तब भी कमेटी के अध्यक्ष कुंवरपाल के द्वारा कुछ ग्रामीणों पर रुपये छीनकर ले जाने का आरोप लगाया गया था। विवादों के चलते 2015 में संत सिंह की अध्यक्षता में समिति गठित की गई। पंचायत में जब कोषाध्यक्ष ने कहा कि गोशाला कई वर्षों से घाटे में चल रही है। नौ बीघा जमीन में नौ मन गेहूं हुए थे। इस पर ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। पंचायत ने कमेटी को बर्खास्त करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने बीडीओ से कहा कि गोशाला कमेटी की जांच कराई जाए। भ्रष्टाचारियों को जेल भेजा जाए। (संवाद)
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