{"_id":"5f28694a8ebc3e63e6073148","slug":"the-shadhalu-baith-in-ganga-on-the-occesion-of-last-monedy-of-sawan-meerut-news-mrt494505037","type":"story","status":"publish","title_hn":"सावन के आखिरी दिन सोमवार को श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सावन के आखिरी दिन सोमवार को श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
विज्ञापन
हस्तिनापुर में आखिरी सोमवार को गंगा स्नान करते श्रद्धालु।
- फोटो : MAWANA
हस्तिनापुर। सावन माह के अंतिम दिन सोमवार को मखदूमपुर गंगा घाट पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद पवित्र जल लेकर घरों को लौटे। यह सिलसिला सुबह से शुरू होकर देर शाम तक चलता रहा।
सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति का माना जाता है। इस महीने श्रद्धालु भक्तिभाव से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। प्रत्येक सोमवार को क्षेत्र के मंदिरों और गंगा तटों पर स्नान करते हैं। सावन का अंतिम सोमवार एवं पूर्णिमा के चलते मखदूमपुर गंगा घाट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां सुबह से ही पहुंचना शुरू हो गए। उन्होंने गंगा पूजा अर्चना के बाद स्नान किया। गंगा का पवित्र जल को लेकर घरों को लौटे।
तीन किलोमीटर पहले किया स्नान
गंगा घाट मखदूमपुर चौराहे से लगभग तीन किलोमीटर अंदर था। इन दिनों गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इसलिए गंगा का पानी गांव के काफी निकट पहुंच गया है। इसलिए श्रद्धालुओं को गंगा में तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर नहीं करना पड़ा। उन्होंने गांव के नजदीक ही गंगा में स्नान किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति का माना जाता है। इस महीने श्रद्धालु भक्तिभाव से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। प्रत्येक सोमवार को क्षेत्र के मंदिरों और गंगा तटों पर स्नान करते हैं। सावन का अंतिम सोमवार एवं पूर्णिमा के चलते मखदूमपुर गंगा घाट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां सुबह से ही पहुंचना शुरू हो गए। उन्होंने गंगा पूजा अर्चना के बाद स्नान किया। गंगा का पवित्र जल को लेकर घरों को लौटे।
विज्ञापन
तीन किलोमीटर पहले किया स्नान
गंगा घाट मखदूमपुर चौराहे से लगभग तीन किलोमीटर अंदर था। इन दिनों गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इसलिए गंगा का पानी गांव के काफी निकट पहुंच गया है। इसलिए श्रद्धालुओं को गंगा में तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर नहीं करना पड़ा। उन्होंने गांव के नजदीक ही गंगा में स्नान किया।
विज्ञापन