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कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष को अब जनता चुनेगी
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मेरठ। कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर अब नगर निगम के मेयर की तरह सीधे चुनाव होगा। उपाध्यक्ष को बोर्ड सदस्यों के बजाय जनता वोट देकर चुनेगी। कैंट एक्ट 2020 के तहत रक्षा मंत्रालय ने कैंट क्षेत्र की जनता से 16 जून तक आपत्ति और सुझाव मांगे हैं। लोग अपनी राय रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर या फिर ई-मेल के जरिए दे सकते हैं। उपाध्यक्ष का सीधा चुनाव होने के साथ ही बोर्ड के आठ सदस्यों के अलावा नवां पद उपाध्यक्ष का होगा। वहीं, सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य भी अब नौ हो जाएंगे। वहीं, कैंट की राजनीति में भी बड़ा उलटफेर होगा।
कैंट बोर्ड में वर्तमान में आठ वार्ड हैं। इन सभी वार्डों पर जनता वोट देकर सदस्यों को चुनती है। इसके बाद सभी निर्वाचित आठ सदस्य बहुमत से उपाध्यक्ष चुनते हैं। रक्षा मंत्रालय ने छावनी क्षेत्रों में सुधार और उपाध्यक्ष एवं सदस्यों के अधिकारों की समीक्षा के लिए सुमित बोस कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने कुछ माह पहले रक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें बोर्ड उपाध्यक्ष का चुनाव मेयर की तरह सीधे कराने की बात कही थी। साथ ही उपाध्यक्ष और निर्वाचित सदस्यों के अधिकारों में बढ़ोतरी की पैरवी भी की थी। कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने के उद्देश्य से ही सभी छावनियों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाया जा चुका है। इसके चलते रक्षा मंत्रालय ने कैंट एक्ट 2006 में संशोधन करते हुए कैंटोनमेंट एक्ट 2020 बनाया है। इस पर लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। 16 जून इसकी अंतिम तिथि है।
आसान नहीं होगी भाजपा की राह
कैंट को हमेशा से भाजपा का गढ़ कहा जाता है। सांसद हो या विधायक का चुनाव, यहां भाजपा आगे रहती है। इस बार सांसद के चुनाव में भी कैंट विधानसभा ने ही जीत दिलाई। लेकिन कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष के सीधे चुनाव में यह आसान नहीं होगा। जो आठ वार्ड कैंट में उपाध्यक्ष के लिए वोट करेंगे उनमें मिश्रित आबादी अधिक है। ये वे इलाके हैं जहां से साल 2015 तक कैंट बोर्ड के चुुनाव में भाजपा के सिंबल पर एक-दो सदस्य ही चुनाव जीते हैं। यहां निर्दलीय उम्मीदवारों का बोलबाला रहा है। साल 2015 के उपाध्यक्ष चुनाव में भी यहां पर बीना वाधवा चुनाव जीती थीं। उनके सामने कोई सदस्य खड़ा ही नहीं हो पाया था। ये बात अलग है कि छह माह पहले बीना वाधवा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद अब भाजपा के विपिन सोढ़ी उपाध्यक्ष हैं। ऐसे में भाजपा के लिए यह चुनाव बड़े उलटफेर वाला होगा। भाजपा को स्थानीय स्तर पर ऐसा चेहरा तलाशना होगा जोकि इन सभी वार्ड में अपनी पहचान रखता हो।
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कैंट एरिया एक नजर में:
आबादी - 93643
वोट - 31500
कैंट की आबादी में 72194 सिविलयन और 21490 सेना से हैं। साल 2019 में वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन के बाद यहां 31500 वोटर हैं। इनमें एक हजार वोट सेना और उनके परिवार वालों की हैं।
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सन 1965 से सदस्य चुनते आ रहे उपाध्यक्ष
वर्ष 1803 में मेरठ कैंट की स्थापना की गई। सन 1965 से यहां पर बोर्ड उपाध्यक्ष का चुनाव सदस्य करते हैं। साल 2010 तक कैंट में सात सदस्य उपाध्यक्ष चुनते थे। इस समय तक कार्यकाल तीन साल का था। साल 2010 के बाद यहां एक सदस्य बढ़ने से आठ हो गए। बोर्ड का कार्यकाल तीन से बढ़कर पांच साल हो गया। फिलहाल कैंट बोर्ड का कार्यकाल छह माह बढ़ाए जाने के बाद जनवरी 2021 तक हो गया है।
ये हैं कैंट के प्रमुख मोहल्ले
वार्ड 1- सुभाषनगर, राज मोहल्ला, बंगला एरिया
वार्ड 2 - घोसी मोहल्ला, हंडिया मोहल्ला, बंगला एरिया
वार्ड- 3 - जामुन मोहल्ला, मैदा मोहल्ला और बंगला एरिया
वार्ड- 4 - रविंद्रपुरी, आबूलेन, ठठेरपुरी, बंगला एरिया
वार्ड- 5 - चाणक्यपुरी, दाल मंडी, सोतीगंज
वार्ड-6 - स्वराज पथ, धर्मपुरी, बंगला एरिया
वार्ड- 7 - जुबलीगंज, शिवाजी कालोनी, बंगला एरिया
वार्ड - 8 - कराईगंज, जुबलीगंज, बंगला एरिया
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कैंट बोर्ड में वर्तमान में आठ वार्ड हैं। इन सभी वार्डों पर जनता वोट देकर सदस्यों को चुनती है। इसके बाद सभी निर्वाचित आठ सदस्य बहुमत से उपाध्यक्ष चुनते हैं। रक्षा मंत्रालय ने छावनी क्षेत्रों में सुधार और उपाध्यक्ष एवं सदस्यों के अधिकारों की समीक्षा के लिए सुमित बोस कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने कुछ माह पहले रक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें बोर्ड उपाध्यक्ष का चुनाव मेयर की तरह सीधे कराने की बात कही थी। साथ ही उपाध्यक्ष और निर्वाचित सदस्यों के अधिकारों में बढ़ोतरी की पैरवी भी की थी। कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने के उद्देश्य से ही सभी छावनियों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाया जा चुका है। इसके चलते रक्षा मंत्रालय ने कैंट एक्ट 2006 में संशोधन करते हुए कैंटोनमेंट एक्ट 2020 बनाया है। इस पर लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। 16 जून इसकी अंतिम तिथि है।
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आसान नहीं होगी भाजपा की राह
कैंट को हमेशा से भाजपा का गढ़ कहा जाता है। सांसद हो या विधायक का चुनाव, यहां भाजपा आगे रहती है। इस बार सांसद के चुनाव में भी कैंट विधानसभा ने ही जीत दिलाई। लेकिन कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष के सीधे चुनाव में यह आसान नहीं होगा। जो आठ वार्ड कैंट में उपाध्यक्ष के लिए वोट करेंगे उनमें मिश्रित आबादी अधिक है। ये वे इलाके हैं जहां से साल 2015 तक कैंट बोर्ड के चुुनाव में भाजपा के सिंबल पर एक-दो सदस्य ही चुनाव जीते हैं। यहां निर्दलीय उम्मीदवारों का बोलबाला रहा है। साल 2015 के उपाध्यक्ष चुनाव में भी यहां पर बीना वाधवा चुनाव जीती थीं। उनके सामने कोई सदस्य खड़ा ही नहीं हो पाया था। ये बात अलग है कि छह माह पहले बीना वाधवा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद अब भाजपा के विपिन सोढ़ी उपाध्यक्ष हैं। ऐसे में भाजपा के लिए यह चुनाव बड़े उलटफेर वाला होगा। भाजपा को स्थानीय स्तर पर ऐसा चेहरा तलाशना होगा जोकि इन सभी वार्ड में अपनी पहचान रखता हो।
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कैंट एरिया एक नजर में:
आबादी - 93643
वोट - 31500
कैंट की आबादी में 72194 सिविलयन और 21490 सेना से हैं। साल 2019 में वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन के बाद यहां 31500 वोटर हैं। इनमें एक हजार वोट सेना और उनके परिवार वालों की हैं।
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सन 1965 से सदस्य चुनते आ रहे उपाध्यक्ष
वर्ष 1803 में मेरठ कैंट की स्थापना की गई। सन 1965 से यहां पर बोर्ड उपाध्यक्ष का चुनाव सदस्य करते हैं। साल 2010 तक कैंट में सात सदस्य उपाध्यक्ष चुनते थे। इस समय तक कार्यकाल तीन साल का था। साल 2010 के बाद यहां एक सदस्य बढ़ने से आठ हो गए। बोर्ड का कार्यकाल तीन से बढ़कर पांच साल हो गया। फिलहाल कैंट बोर्ड का कार्यकाल छह माह बढ़ाए जाने के बाद जनवरी 2021 तक हो गया है।
ये हैं कैंट के प्रमुख मोहल्ले
वार्ड 1- सुभाषनगर, राज मोहल्ला, बंगला एरिया
वार्ड 2 - घोसी मोहल्ला, हंडिया मोहल्ला, बंगला एरिया
वार्ड- 3 - जामुन मोहल्ला, मैदा मोहल्ला और बंगला एरिया
वार्ड- 4 - रविंद्रपुरी, आबूलेन, ठठेरपुरी, बंगला एरिया
वार्ड- 5 - चाणक्यपुरी, दाल मंडी, सोतीगंज
वार्ड-6 - स्वराज पथ, धर्मपुरी, बंगला एरिया
वार्ड- 7 - जुबलीगंज, शिवाजी कालोनी, बंगला एरिया
वार्ड - 8 - कराईगंज, जुबलीगंज, बंगला एरिया