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मीट फैक्ट्रियों के जहरीले पानी से बना ‘मौत’ का तालाब, लगातार जा रहीं जान

Tue, 22 Jan 2019 11:16 AM IST
Dimple Sirohi अमित मुद्गल, अमर उजाला, मेरठ
अमित मुद्गल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 22 Jan 2019 11:16 AM IST
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The pond of death made from toxic water of the meat factories in meerut
तालाब - फोटो : अमर उजाला

मीट फैक्टरियों से निकले पानी से गांव अलीपुर और आसपास के खेतों में तालाब जैसी स्थिति हो गई है, जिसके अब घातक परिणाम सामने आ रहे हैं। आसपास के कई गांवों में लोग रहस्यमयी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसी दूषित पानी के कारण हैंडपंपों और नलकूपों तक में इसका विपरीत असर आ रहा है और इसके चलते इन गांवों में लगातार मौतें हो रही हैं।

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हापुड़ रोड स्थित अलीपुर क्षेत्र में चल रही मीट फैक्टरियों से रोज लाखों लीटर पानी निकल रहा है। दरअसल यहां स्लाटर हाउसों में लगे एफल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांटों (ईटीपी) की गुणवत्ता को लेकर कई बार सवाल उठे हैं। आरोप लगे कि ट्रीटमेंट प्लॉट चलते ही नहीं हैं। पानी सीधा ही जमीन में उतारा जा रहा है जिससे भूगर्भ जल दूषित हो रहा है।
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जब सख्ती हुई तो मीट फैक्टरियों ने इसका तोड़ निकाला। कहा कि ट्रीटमेंट से निकला पानी सिंचाई के काम आएगा। लेकिन कहां सिंचाई हो रही है, इसकी कोई ठोस सूचना नहीं दी है। इस नाम पर पानी को बाहर खेतों में फेंकने की प्रशासनिक मंजूरी ले ली और यह पानी अब इस कदर मात्रा में डाला जा रहा है कि खेतों में तालाब सरीखी स्थिति बन गई है। जिस जमीन पर पानी डाला जा रहा है वह संचालकों ने या तो खरीद रखी है या ठेके पर ले रखी है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। पानी दूषित है, क्षेत्र में बदबू फैल रही है। 

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रहस्यमयी बीमारियों से इन गांवों में हो रही मौतें
एक तो सीधा ही जमीन में पानी उतारने से और दूसरा तालाबों में यह पानी भरने से इसके घातक परिणाम आने शुरू हो गए हैं। खास तौर पर अल्लीपुर, बहचौला, फफूंडा, धनौटा, बिजौली, बहरानपुर, सेतकुआं, गगोल, छतरी, रघुनाथपुर, कौल, उल्धन, धीरखेड़ा, खासपुर आदि गांवों में इसका असर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी का असर हैंडपंपों, नलकूपों, पानी की टंकियों तक में आ रहा है। इससे लोग बीमार हो रहे हैं। कुछ ग्रामीण कैंसर तो कुछ पीलिया बता रहे हैं। लेकिन हालत यह है कि  इनमें हर गांव में मौत हुई हैं।

समिति ने उठाई आवाज
इस बाबत पर्यावरण सुधार संघर्ष समिति ने भी आवाज उठाई है। जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से लेकर अन्य सभी अधिकारियों तक से शिकायत की गई है। समिति अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर, शक्तिमोहन, दीप आदि ने इस बाबत दस्तावेज भी पेश किए हैं। कहा है कि इनकी  जांच हो।

हो सकते हैं रोग
वाटरएड इंडिया की रिपोर्ट कहती है कि दूषित पानी लोगों को बीमार कर रहा है। इस पानी में मुख्य रूप से आर्सेनिक, फ्लोराइड और नाइट्रेट की ज्यादा मात्रा होती है। इससे डायरिया, टाइफाइड, जापानी बुखार, पीलिया या अपंगता जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। कैंसर जैसी बीमारियों का भी यह पानी वाहक है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं पर पानी का सबसे ज्यादा घातक असर होता है। 

इसकी जांच होगी
सिंचाई के नाम पर पानी को बाहर प्रयोग करने की अनुमति ली गई है। लेकिन ट्रीटमेंट के बाद उसे डाला जा रहा है या नहीं, इसकी जांच होगी। पूरी टीम इसके लिए बनाई गई है। -अनिल ढींगरा, डीएम 

हम सर्वे करा रहे हैं
टीम लगाकर स्थिति का सर्वे करा रहे हैं। इन सभी गांवों को देखेंगे कि आखिर लोगों के स्वास्थ्य पर इस पानी का क्या असर हो रहा है? हम इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर पेश करेंगे। -डा. राजकुमार, सीएमओ

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