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संतोष रखने से मिली शांति
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हस्तिनापुर में दशलक्षण पर्व में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
- फोटो : MAWANA
संतोष रखने से मिलेगी शांति
हस्तिनापुर। आज दशलक्षण धर्म के नौवें दिन मुख्य वेदी पर श्रद्धालुओं ने अभिषेक किया। इसके बाद समोशरण जिनालय में जिनसहस्त्रनाम महामंडल विधान की पं. आशीष जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं प्रारंभ कराई।
श्री 1008 मल्लिनाथ भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य मुकेश जैन मनोरमा को मिला। सहयोग रमेश चंद जैन ने किया। मुनि श्री 108 भाव भूषण महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा की संसारी प्राणी आज अपने दुखों के कारण इतना दुखी नहीं है जितना की पड़ोसी के सुख को देख कर दुखी है। यह आत्मा तो निश्चय की अपेक्षा से शुद्ध है। संसार में रमने के कारण इसके साथ विकारी परिणमन लग गया है। व्यक्ति यदि अपने किए पर संतोष रखे तो निश्चित रूप से उसे शांति मिलेगी। उसका जीवन पावन होगा। यदि वह संतोषी नहीं है तो तीन लोक की अथा संपदा भी प्राप्त हो जाए तो भी वह सुखी नहीं हो सकता। किंतु आंकिचन धर्म हमें यह प्रेरणा देता है कि जो कुछ त्याग करने के बाद भी शेष रहा है उसमें रचमात्र भी मेरा अब कुछ नहीं है। मात्र एक शुद्ध आत्मा ही मेरी है इस प्रकार का भाव रखना आंकिचन धर्म है। भगवान के 1008 नामों की आराधना कर पुण्य का संचय किया। शाम को संगीतमय आरती भक्ति एवं उत्तर प्रांतीय गुरुकुल के छात्रों ने धार्मिक नाटिका प्रस्तुत की। महामंत्री मुकेश जैन सर्राफ, उपाध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार जैन सर्राफ, विजय कुमार जैन ‘बैंक वाले’ मुकेश जैन महाप्रबंधक, अशोक जैन, अतुल कुमार जैन, कमल जैन, मणीचंद जैन, नवनीत जैन, आदि ने सहयोग प्रदान किया।
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हस्तिनापुर। आज दशलक्षण धर्म के नौवें दिन मुख्य वेदी पर श्रद्धालुओं ने अभिषेक किया। इसके बाद समोशरण जिनालय में जिनसहस्त्रनाम महामंडल विधान की पं. आशीष जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं प्रारंभ कराई।
श्री 1008 मल्लिनाथ भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य मुकेश जैन मनोरमा को मिला। सहयोग रमेश चंद जैन ने किया। मुनि श्री 108 भाव भूषण महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा की संसारी प्राणी आज अपने दुखों के कारण इतना दुखी नहीं है जितना की पड़ोसी के सुख को देख कर दुखी है। यह आत्मा तो निश्चय की अपेक्षा से शुद्ध है। संसार में रमने के कारण इसके साथ विकारी परिणमन लग गया है। व्यक्ति यदि अपने किए पर संतोष रखे तो निश्चित रूप से उसे शांति मिलेगी। उसका जीवन पावन होगा। यदि वह संतोषी नहीं है तो तीन लोक की अथा संपदा भी प्राप्त हो जाए तो भी वह सुखी नहीं हो सकता। किंतु आंकिचन धर्म हमें यह प्रेरणा देता है कि जो कुछ त्याग करने के बाद भी शेष रहा है उसमें रचमात्र भी मेरा अब कुछ नहीं है। मात्र एक शुद्ध आत्मा ही मेरी है इस प्रकार का भाव रखना आंकिचन धर्म है। भगवान के 1008 नामों की आराधना कर पुण्य का संचय किया। शाम को संगीतमय आरती भक्ति एवं उत्तर प्रांतीय गुरुकुल के छात्रों ने धार्मिक नाटिका प्रस्तुत की। महामंत्री मुकेश जैन सर्राफ, उपाध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार जैन सर्राफ, विजय कुमार जैन ‘बैंक वाले’ मुकेश जैन महाप्रबंधक, अशोक जैन, अतुल कुमार जैन, कमल जैन, मणीचंद जैन, नवनीत जैन, आदि ने सहयोग प्रदान किया।
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