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श्रद्धा और भक्ति से मिलता है शांति का मार्ग : भाव भूषण
Thu, 25 Jun 2026 06:30 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Thu, 25 Jun 2026 06:30 PM IST
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श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में शांतिनाथ विधान का 36वां दिन
140 परिवारों ने कराया विधान
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 36वें दिन कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रोच्चार के साथ किया गया। 140 परिवारों ने विधान कराकर पुण्यार्जन किया इस अवसर पर मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि श्रद्धा और भक्ति से ही शांति का मार्ग मिलता है।।
महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति भौतिक संसाधनों में इतना उलझ गया है कि वह स्वयं के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है। धन से सुविधाएं तो प्राप्त हो सकती हैं, लेकिन सुख और शांति नहीं। वास्तविक शांति बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर होती है। भगवान शांतिनाथ और शांतिनाथ विधान का विशेष महत्व है। विधान को श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है तथा जीवन के विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। शांतिधारा का सौभाग्य जिनेश्वर जैन, संतोष जैन, अंकित जैन, गरिमा जैन, आकाशी जैन, पलक जैन और अग्रीम जैन को प्राप्त हुआ।
युवा विद्वान पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराईं। संध्याकाल में संगीतमय महाआरती के बाद धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, मंत्री राजीव जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन सहित मंदिर समिति के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
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140 परिवारों ने कराया विधान
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 36वें दिन कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रोच्चार के साथ किया गया। 140 परिवारों ने विधान कराकर पुण्यार्जन किया इस अवसर पर मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि श्रद्धा और भक्ति से ही शांति का मार्ग मिलता है।।
महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति भौतिक संसाधनों में इतना उलझ गया है कि वह स्वयं के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है। धन से सुविधाएं तो प्राप्त हो सकती हैं, लेकिन सुख और शांति नहीं। वास्तविक शांति बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर होती है। भगवान शांतिनाथ और शांतिनाथ विधान का विशेष महत्व है। विधान को श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है तथा जीवन के विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। शांतिधारा का सौभाग्य जिनेश्वर जैन, संतोष जैन, अंकित जैन, गरिमा जैन, आकाशी जैन, पलक जैन और अग्रीम जैन को प्राप्त हुआ।
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युवा विद्वान पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराईं। संध्याकाल में संगीतमय महाआरती के बाद धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, मंत्री राजीव जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन सहित मंदिर समिति के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
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