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धर्म के मार्ग पर चलकर पांडवों को मिली विजय
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सुनील कैसवास......वेस्ट एंड रोड स्थित श्री अन्नपूर्णा मंदिर मैं आयोजित श्रीमद् भागवत कथा मैं कथ
मेरठ। वेस्ट एंड रोड अन्नपूर्णा मंदिर में बुधवार को श्रीमद् भागवत कथा हुई। श्रीधाम वृंदावन से आए आश्रित गोस्वामी महाराज ने धर्म के साथ कर्म का व्याख्यान किया। धर्म की उन्होंने विशेषता बताई। उन्होंने कहा कि महाभारत काल में भी धर्म दोनों ही ओर विद्यमान रहा था। धर्म पांडवों में युधिष्ठिर के रूप में विद्यमान था। कौरवों में विदुर के रूप में विद्यमान रहा।
आश्रित गोस्वामी ने कहा कि दोनों में अंतर जरूर था। पांडवों ने धर्म को सुना, समझा, माना और हृदय से स्वीकार किया। विदुर के रूप में कौरवों के बीच मौजूद धर्म को कौरवों ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने धर्म की वाणी को सुना नहीं। इसका परिणाम यह हुआ पांडवों का कल्याण हुआ और उन्हें विजय मिली। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं पांडवों के साथ रहे। कौरवों का नाश हो गया क्योंकि उन्होंने धर्म मार्ग को छोड़ दिया। महाराज ने कहा कि योग वही है, जो आपके कर्मों में कुशलता और सजगता लाए। उन्होंने कहा कि अपने कर्म का पूरे मन, लगन और श्रद्धा के साथ पालन करना ही धर्म है। धर्म कोई दिखावे की वस्तु नहीं है। यह तो एक आचरण है। यह जीवन में हर कदम पर झलकता है। कथा श्रवण करने वालों में मुख्य यजमानों के साथ काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
रामा संकीर्तन मंदिर में माता पार्वती के जन्म की कथा सुनाई
लालकुर्ती रामा संकीर्तन मंदिर में शिवमहापुराण कथा हुई। कथा व्यास पंडित अंबुज मिश्रा ने माता पार्वती के जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि नारद मुनि राजा हिमाचल के घर गए। पार्वती का हाथ देखकर भविष्यवाणी की गई। नारद मुनि ने बताया कि पार्वती ने ही भगवान शिव की पत्नी बनेंगी। लेकिन इसके लिए उन्हें कठोर तपस्या करनी होगी। नारद मुनि ने यह भी बताया कि पार्वती का विवाह भगवान शिव से होगा। लेकिन यह विवाह तपस्या और देवी पार्वती के दृढ़ संकल्प से ही संभव होगा। उन्होंने बताया कि पार्वती और शिव के विवाह के बाद तारकासुर राक्षस का वध हुआ। यजमान वीनू मृग, पंडित सुधीर वाजपेयी, सुरेश छाबड़ा आदि रहे।
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आश्रित गोस्वामी ने कहा कि दोनों में अंतर जरूर था। पांडवों ने धर्म को सुना, समझा, माना और हृदय से स्वीकार किया। विदुर के रूप में कौरवों के बीच मौजूद धर्म को कौरवों ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने धर्म की वाणी को सुना नहीं। इसका परिणाम यह हुआ पांडवों का कल्याण हुआ और उन्हें विजय मिली। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं पांडवों के साथ रहे। कौरवों का नाश हो गया क्योंकि उन्होंने धर्म मार्ग को छोड़ दिया। महाराज ने कहा कि योग वही है, जो आपके कर्मों में कुशलता और सजगता लाए। उन्होंने कहा कि अपने कर्म का पूरे मन, लगन और श्रद्धा के साथ पालन करना ही धर्म है। धर्म कोई दिखावे की वस्तु नहीं है। यह तो एक आचरण है। यह जीवन में हर कदम पर झलकता है। कथा श्रवण करने वालों में मुख्य यजमानों के साथ काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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रामा संकीर्तन मंदिर में माता पार्वती के जन्म की कथा सुनाई
लालकुर्ती रामा संकीर्तन मंदिर में शिवमहापुराण कथा हुई। कथा व्यास पंडित अंबुज मिश्रा ने माता पार्वती के जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि नारद मुनि राजा हिमाचल के घर गए। पार्वती का हाथ देखकर भविष्यवाणी की गई। नारद मुनि ने बताया कि पार्वती ने ही भगवान शिव की पत्नी बनेंगी। लेकिन इसके लिए उन्हें कठोर तपस्या करनी होगी। नारद मुनि ने यह भी बताया कि पार्वती का विवाह भगवान शिव से होगा। लेकिन यह विवाह तपस्या और देवी पार्वती के दृढ़ संकल्प से ही संभव होगा। उन्होंने बताया कि पार्वती और शिव के विवाह के बाद तारकासुर राक्षस का वध हुआ। यजमान वीनू मृग, पंडित सुधीर वाजपेयी, सुरेश छाबड़ा आदि रहे।
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