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पुलिस अभिरक्षा से भागा पिता-पुत्री का हत्यारोपी 12 साल बाद गिरफ्तार

Sun, 07 Sep 2025 02:56 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Sep 2025 02:56 AM IST
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The murderer of father and daughter, who escaped from police custody, was arrested after 12 years.
मेरठ। मेडिकल कॉलेज अस्पताल से वर्ष 2013 में पुलिस अभिरक्षा से भागे पिता-पुत्री के हत्यारोपी इरफान को एसटीएफ ने महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया है। जिला जेल में हुई गैंगवार में घायल होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कई वर्ष तक आरोपी बिहार के समस्तीपुर और महाराष्ट्र के नांदेड जिले में देसी दवाखाना खोलकर दवा बेचता रहा। उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। ट्रांजिट रिमांड पर उसे मेरठ लाया जा रहा है।
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एसटीएफ के एएसपी बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि सरुरपुर थाना क्षेत्र के हर्रा निवासी इरफान का पड़ोसी जुल्फकार मिठाई पर लगने वाला चांदी का वर्क बनाता था। उसके यहां काम करने कुछ लड़कियां भी आती थीं। आरोप है कि वर्ष 2006 में इनसे इरफान ने छेड़छाड़ की। जुल्फकार ने इसका विरोध किया तो इरफान ने चाकू से उसकी गर्दन और शरीर पर कई वार कर हत्या कर दी थी। जुल्फकार की चीख सुनकर उसकी 14 वर्षीय पुत्री साजू आई तो चाकू से उसकी भी गर्दन काट दी। पिता-पुत्री के दोहरे हत्याकांड में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
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वर्ष 2013 में जिला जेल में बंदियों के बीच गैंगवार हो गई थी। इसमें इरफान भी घायल हो गया था। उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। 25 अप्रैल 2013 को वह अस्पताल से भाग निकला। परतापुर से ट्रक में लिफ्ट लेकर दिल्ली पहुंचा। दिल्ली से ट्रेन में कर्नाटक चला गया। कर्नाटक में 4-5 दिन रहा। यहां कोई काम न मिलने पर मुंबई चला गया। यहां 10 दिन रुकने के बाद बिहार के समस्तीपुर में अपने दादा हकीम हाजी महमूद मूदा के पास रहने लगा। देसी दवाई बेचने का काम करने लगा और कुछ समय बाद अपना दवाखाना खोल लिया। समस्तीपुर से अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए शिरड़ी चला गया। यहां नारियल पानी बेचने वाले शेख मोहम्मद से उसकी दोस्ती हो गई। शेख मोहम्मद की पुत्री परवीन बानो से प्रेम प्रसंग हो गया। शेख मोहम्मद ने पुत्री की शादी कहीं ओर तय की तो उसे अपने साथ बिहार के धर्मपुर ले आया और निकाह कर लिया।
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दिल्ली में फर्जी नाम से बनवाए आधार कार्ड
एएसपी के मुताबिक किराए के मकान के लिए आईडी की जरूरत पड़ी तो इरफान पत्नी को लेकर दिल्ली आया। यहां अपना अमन चौहान और पत्नी का रूबी चौहान निवासी खजूरी बाग दिल्ली के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया। इसके बाद बिहार जाकर करीब नौ वर्ष तक देसी दवा बेचता रहा। उसके बाद पत्नी और बच्चों को लेकर नांदेड के गांव बाजेगांव पहुंचा। यहां पर किराए की दुकान लेकर दवाखाना खोल लिया था। तब से परिवार समेत यहीं रह रहा था।
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