{"_id":"6398e0d53224f5272f278fa9","slug":"the-lift-is-not-lifting-the-locks-on-the-stretcher-are-also-lying-meerut-news-mrt617632365","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: लिफ्ट नहीं हो रहीं ‘लिफ्ट’, स्ट्रेचर पर भी पड़े ताले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: लिफ्ट नहीं हो रहीं ‘लिफ्ट’, स्ट्रेचर पर भी पड़े ताले
Wed, 14 Dec 2022 08:30 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Dec 2022 08:30 AM IST
सार
मेरठ मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट खराब पड़ी है। द्वितीय तल पर पहुंचने के लिए मरीजों को सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है। यहां तक कि मरीजों को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो पा रहे हैं।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज में बिना स्ट्रेचर परेशान होते मरीज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मेरठ मेडिकल कॉलेज में जागृति विहार के रामपाल (70) को रक्त की जांच के लिए द्वितीय तल पर जाना था, लेकिन न लिफ्ट चल रही है और न ही स्ट्रेचर मिला। बीमार होने के बावजूद उन्हें सीढ़ियों के जरिये द्वितीय तल पर जाना पड़ा। यह परेशानी अकेले इन बुजुर्ग की नहीं है। यहां हर रोज सैकड़ों लोग इस परेशानी से दोचार होते हैं। दरअसल, सरकारी अस्पतालों में हालात यह हैं कि मरीजों को लिफ्ट और स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो पा रहे हैं। पीएल शर्मा जिला अस्पताल हो या एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, दोनों जगह कमोबेश एक जैसे ही हालात हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट सालों से खराब पड़ी हैं। जिला अस्पताल में मरीज को भूतल से प्रथम तल या फिर द्वितीय और तृतीय तल पर ले जाना पड़े तो रैंप और सीढ़ियां ही सहारा हैं। मरीज को शिफ्ट करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर में ताले लगे रहते हैं। मरीज को अगर स्ट्रेचर चाहिए तो उसे पहले आधार कार्ड जमा करना पड़ता है, फिर उसे स्ट्रेचर मिलता है। ऐसे ही हालात जिला अस्पताल के भी हैं, यहां स्ट्रेचर में ताले तो लगे हुए नहीं हैं, लेकिन मरीजों को स्ट्रेचर के लिए भटकना पड़ता है। मरीजों को हाथों पर या फिर सहारे से ओपीडी तक या वार्ड तक ले जाना पड़ता है। स्ट्रेचर मिल भी जाए तो तीमारदारों को खुद स्ट्रेचर खींचकर ले जाना पड़ता है। वार्ड ब्वाय या स्टाफ उन्हें ले जाने की जहमत नहीं उठाते हैं।
विज्ञापन
स्ट्रेचर इधर-उधर छोड़ देते हैं तीमारदार
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि पर्याप्त स्ट्रेचर हैं, मगर कई बार मरीज और तीमारदार स्ट्रेचर को इधर-उधर छोड़ देते हैं और स्ट्रेचर ढूंढते पड़ते हैं। इस कारण स्ट्रेचर लॉक कर रखे हुए हैं। जरूरत पर मरीजों को दिए जाते हैं। लिफ्ट ठीक कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
कई बार मरीज ही नहीं करते इस्तेमाल
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि स्ट्रेचर की कोई कमी नहीं है। कई बार मरीज और तीमारदार खुद ही स्ट्रेचर का इस्तेमाल नहीं करते हैं और जल्दबाजी में मरीज को अपने सहारे से या गोद में ओपीडी या वार्ड तक ले जाते हैं।
मेडिकल कॉलेज : ओपीडी में हर रोज ढाई से तीन हजार मरीज आते हैं। फिलहाल 500 मरीज भर्ती हैं।
जिला अस्पताल : ओपीडी में हर रोज 1200 से 1500 मरीज आते हैं। फिलहाल 175 मरीज भर्ती हैं।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि पर्याप्त स्ट्रेचर हैं, मगर कई बार मरीज और तीमारदार स्ट्रेचर को इधर-उधर छोड़ देते हैं और स्ट्रेचर ढूंढते पड़ते हैं। इस कारण स्ट्रेचर लॉक कर रखे हुए हैं। जरूरत पर मरीजों को दिए जाते हैं। लिफ्ट ठीक कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
कई बार मरीज ही नहीं करते इस्तेमाल
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि स्ट्रेचर की कोई कमी नहीं है। कई बार मरीज और तीमारदार खुद ही स्ट्रेचर का इस्तेमाल नहीं करते हैं और जल्दबाजी में मरीज को अपने सहारे से या गोद में ओपीडी या वार्ड तक ले जाते हैं।
मेडिकल कॉलेज : ओपीडी में हर रोज ढाई से तीन हजार मरीज आते हैं। फिलहाल 500 मरीज भर्ती हैं।
जिला अस्पताल : ओपीडी में हर रोज 1200 से 1500 मरीज आते हैं। फिलहाल 175 मरीज भर्ती हैं।