मेरठ। लोगों के लिए मुसीबत बने रोडवेज बसों के प्रेशर हॉर्न की आवाज अब सुनाई नहीं देगी। एनजीटी के डंडे के बाद रोडवेज ने अपनी बसों में लगे प्रेशर हॉर्न उतरवाने के साथ दंड का भी प्रावधान कर दिया है।
मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में बसों में प्रेशर हॉर्न नहीं होने का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसका पालन आज तक नहीं हो रहा। बसों, ट्रकों और अन्य भारी व्यावसायिक वाहनों में प्रेशर हॉर्न का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। प्रेशर हॉर्न की आवाज से लोगों की श्रवण शक्ति पर गहरा असर पड़ रहा है। इन सभी बातों को देखते हुए एनजीटी ने सभी बसों और ट्रकों आदि से प्रेशर हॉर्न उतरवाने का आदेश दिया था। इसका अनुपालन नहीं होने पर एनजीटी ने फिर से सख्ती की तो रोडवेज पर इसका असर दिखाई देने लगा है। मेरठ रीजन के आरएम केके शर्मा के आदेश पर सभी डिपो में एक-एक टीम गठित की गई है, जो बसों में चेकिंग कर प्रेशर हॉर्न उतरवाएगी। सेवा प्रबंधक एसएल शर्मा ने बताया कि बुधवार को इन टीमों ने करीब 60 बसों से प्रेेशर हॉर्न उतरवाए। इसके अलवा प्रेशर हॉर्न मिलने पर दंड का भी प्रावधान किया है। आरएम केके शर्मा ने बताया कि टिकट चेकिंग दल टिकट चेक करने के साथ ही बस का प्रेशर हॉर्न भी चेक करेंगे। पहली बार प्रेशर हॉर्न मिलने पर चालक पर 1000 रुपये का जुर्माना लगेगा। दूसरी बार स्थायी चालक निलंबित होगा, संविदा चालक की संविदा और अनुबंधित बस का अनुबंध समाप्त होगा।