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28 साल गुजरे, मेडिकल कॉलेज में नहीं बनी कीट लैब
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में पिछले साल मच्छरों की जांच तो शुरू हो गई, मगर 28 सालों बाद भी यहां पूरी तरह से कीट लैब तैयार नहीं हो सकी है। न स्टाफ मिला है और न ही संसाधन। यहां तक कि मच्छरों के सैंपल लाने के लिए गाड़ी तक उपलब्ध नहीं है।
मेडिकल कॉलेज स्थित अपर निदेशक (एडी) कार्यालय में यह कीट लैब तैयार की जानी है। इसके लिए 2018 में कीट विज्ञानी डॉ. कीर्ति त्रिपाठी की नियुक्ति की गई थी। यहां 1991 के बाद से कोई कीट विज्ञानी नहीं था, जिस कारण यहां मच्छरों की जांच नहीं हो पाती थी। उम्मीद की जा रही थी कि जल्द ही अन्य स्टाफ की भी नियुक्ति की जाएगी। जैसे मच्छर को पकड़ने वाले कलेक्टर, असिस्टेंट टेक्नीशियन और ड्राइवर आदि। लेकिन अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं की गई है। यह हालात तब हैं, जबकि हर साल डेंगू लगातार वार कर रहा है। 2019 में भी 200 से ज्यादा डेंगू के मरीज मिले। 2018 में 24, 2017 में 660 और 2016 में 195 डेंगू के मरीज मिले थे।
मच्छरों की माइक्रोस्कोपिक जांच की जा रही
फिलहाल कीट विज्ञानी माइक्रोस्कोपिक जांच कर रही हैं। मच्छर कौन सी प्रजाति केहैं। यह कौन सी बीमारी कितनी फैला सकते हैं। अभी तक की जांच में 70 से 80 प्रतिशत मच्छर नर निकल रहे हैं। सिर्फ मादा मच्छर ही मनुष्य या अन्य जंतुओं का रक्त पीता है, जबकि नर मच्छर पेड़-पौधों का रस पीते हैं। नर मच्छर अधिक संख्या निकलने से माना जा रहा है कि बीमारी का खतरा कम है।
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संसाधनों और स्टाफ की मांग की जा रही
मच्छरों की पड़ताल के लिए लैब तैयार करने की कोशिश जारी है। संसाधनों और स्टाफ की मांग की जा रही है। उम्मीद है इनके मिलने पर बेहतर तरीके से मच्छरों की पड़ताल की जा सकेगी। - डॉ. कीर्ति त्रिपाठी, कीट विज्ञानी
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मेडिकल कॉलेज स्थित अपर निदेशक (एडी) कार्यालय में यह कीट लैब तैयार की जानी है। इसके लिए 2018 में कीट विज्ञानी डॉ. कीर्ति त्रिपाठी की नियुक्ति की गई थी। यहां 1991 के बाद से कोई कीट विज्ञानी नहीं था, जिस कारण यहां मच्छरों की जांच नहीं हो पाती थी। उम्मीद की जा रही थी कि जल्द ही अन्य स्टाफ की भी नियुक्ति की जाएगी। जैसे मच्छर को पकड़ने वाले कलेक्टर, असिस्टेंट टेक्नीशियन और ड्राइवर आदि। लेकिन अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं की गई है। यह हालात तब हैं, जबकि हर साल डेंगू लगातार वार कर रहा है। 2019 में भी 200 से ज्यादा डेंगू के मरीज मिले। 2018 में 24, 2017 में 660 और 2016 में 195 डेंगू के मरीज मिले थे।
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मच्छरों की माइक्रोस्कोपिक जांच की जा रही
फिलहाल कीट विज्ञानी माइक्रोस्कोपिक जांच कर रही हैं। मच्छर कौन सी प्रजाति केहैं। यह कौन सी बीमारी कितनी फैला सकते हैं। अभी तक की जांच में 70 से 80 प्रतिशत मच्छर नर निकल रहे हैं। सिर्फ मादा मच्छर ही मनुष्य या अन्य जंतुओं का रक्त पीता है, जबकि नर मच्छर पेड़-पौधों का रस पीते हैं। नर मच्छर अधिक संख्या निकलने से माना जा रहा है कि बीमारी का खतरा कम है।
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संसाधनों और स्टाफ की मांग की जा रही
मच्छरों की पड़ताल के लिए लैब तैयार करने की कोशिश जारी है। संसाधनों और स्टाफ की मांग की जा रही है। उम्मीद है इनके मिलने पर बेहतर तरीके से मच्छरों की पड़ताल की जा सकेगी। - डॉ. कीर्ति त्रिपाठी, कीट विज्ञानी