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गंगा का पानी खेतों में पहुंचा, फसल बेकार
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1एफ - गंगा के पानी में डूबी लौकी की फसल कक़ो देखते किसान।(हस्तिनापुर)
- फोटो : MAWANA
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गंगा का पानी खेतों में पहुंचा, फसल बेकार
हस्तिनापुर। गंगा के कहर से गरीब परिवारों के सामने संकट है। शुक्रवार से बढ़ रहे गंगा के जल स्तर से गंगा किनारे बोई गई फसलें नष्ट हो गई है। जलालपुर जोरा निवासी गरीब मजदूर परिवारों के कल्लू निषाद, मोनू निषाद, संजय निषाद, राजाराम, जगबीर निषाद, रूपा निषाद आदि का कहना है कि गांव के ही किसान कंवरपाल के खेत में लगभग 30 बीघा लौकी की फसल को बटाई पर अपने खर्च से तैयार किया था। 30 दिन पूर्व ही लौकी की फसल की बुवाई की थी। जिससे नवरात्रों के समय तक यह फसल तैयार हो और अच्छे दाम उन्हें मिल सकें। इन लोगों के मुताबिक कर्ज लेकर उन्होंने लौकी की फसल तैयार की थी। परंतु गंगा में बढ़े जलस्तर ने इन लोगों के सपने पर पानी फेर दिया। गरीब परिवारों के सामने आर्थिक संकट आ गया है। फसल बर्बादी के बाद अब मजदूर परिवार परेशान हैं। मजदूरों के मुताबिक फसल बरबाद हो गई साहूकार का कर्ज का ब्याज दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण 3 से 4 फीट ऊपर बेलों पर पानी भर गया। जिसके कारण लौकी की बेल गल जाएंगी। चाह कर भी मजदूर इसे नहीं बचा पाऐंगे। मजदूरों के मुताबिक अब प्रशासन की ओर से आर्थिक सहायता मिले तो उनके परिवार को रोटी मिल सकेगी।
बेलों का बचना मुश्किल -
लौकी की बेलों पर इतना पानी भरा हुआ है कि इनका बचना मुश्किल है। गंगा के बढ़े जलस्तर से किसानों को नुकसान होगा। - डा. ओमवीर सिंह, प्रभारी स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर।
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हस्तिनापुर। गंगा के कहर से गरीब परिवारों के सामने संकट है। शुक्रवार से बढ़ रहे गंगा के जल स्तर से गंगा किनारे बोई गई फसलें नष्ट हो गई है। जलालपुर जोरा निवासी गरीब मजदूर परिवारों के कल्लू निषाद, मोनू निषाद, संजय निषाद, राजाराम, जगबीर निषाद, रूपा निषाद आदि का कहना है कि गांव के ही किसान कंवरपाल के खेत में लगभग 30 बीघा लौकी की फसल को बटाई पर अपने खर्च से तैयार किया था। 30 दिन पूर्व ही लौकी की फसल की बुवाई की थी। जिससे नवरात्रों के समय तक यह फसल तैयार हो और अच्छे दाम उन्हें मिल सकें। इन लोगों के मुताबिक कर्ज लेकर उन्होंने लौकी की फसल तैयार की थी। परंतु गंगा में बढ़े जलस्तर ने इन लोगों के सपने पर पानी फेर दिया। गरीब परिवारों के सामने आर्थिक संकट आ गया है। फसल बर्बादी के बाद अब मजदूर परिवार परेशान हैं। मजदूरों के मुताबिक फसल बरबाद हो गई साहूकार का कर्ज का ब्याज दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण 3 से 4 फीट ऊपर बेलों पर पानी भर गया। जिसके कारण लौकी की बेल गल जाएंगी। चाह कर भी मजदूर इसे नहीं बचा पाऐंगे। मजदूरों के मुताबिक अब प्रशासन की ओर से आर्थिक सहायता मिले तो उनके परिवार को रोटी मिल सकेगी।
बेलों का बचना मुश्किल -
लौकी की बेलों पर इतना पानी भरा हुआ है कि इनका बचना मुश्किल है। गंगा के बढ़े जलस्तर से किसानों को नुकसान होगा। - डा. ओमवीर सिंह, प्रभारी स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर।
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