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सिस्टम में शह-मात का खेल, विकास से भटक रहा शहर

Tue, 05 Mar 2019 02:22 AM IST
Gaurav sharma न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला
न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Gaurav sharma Updated Tue, 05 Mar 2019 02:22 AM IST
सार

557 करोड़ रुपये है 2019-20 का मूल बजट प्रस्तावित
03 माह का अंतर होना चाहिए नियमानुसार पुनरीक्षित और मूल बजट बैठक में
- महापौर और नगर निगम के अधिकारियों में मतभेद से विकास कार्य हो रहे प्रभावित
- एक मार्च को बिना महापौर के बजट बैठक करने पर बैकफुट पर आए अधिकारी
- अब महापौर ने सख्ती की तो छह मार्च को पुनरीक्षित और मूल बजट बैठक कराने को अधिकारी तैयार

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The game of cheating in the system, the city wandering from development
मेरठ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 शहर के विकास को लेकर नगर निगम सरकार और अधिकारी एक मत नहीं हैं। सिस्टम में शह-मात के खेल से शहर का विकास भटक रहा है। यहां तक कि कार्यकारिणी पुनरीक्षित बजट और साल 2019-20 के मूल बजट की बैठक पर भी राजनीति हो रही है। निगम अधिकारियों ने महापौर की गैर मौजूदगी में पुनरीक्षित बजट बैठक करके उसे सही ठहराया तो महापौर के अपने अधिकारों को प्रयोग करने पर बैकफुट पर आ गए। एक मार्च को हुई पुनरीक्षित बजट बैठक अब छह मार्च को करने और साल 2019-20 की 557.12 करोड़ रुपये के मूल बजट की बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है।
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नगर निगम प्रतिवर्ष 500 करोड़ से अधिक खर्च करता है। जिसकी आय और व्यय का ब्योरा अधिकारियों को बोर्ड के सामने सार्वजनिक करना होता है। इसके लिए कार्यकारिणी और बोर्ड बैठक बुलानी होती है। लेकिन नगर निगम में नियम और कानून कब ताक पर रख दिए जाएं, यह कोई नहीं बता सकता। निगम अधिकारियों की सहमति पर महापौर सुनीता वर्मा ने एक मार्च को पुनरीक्षित बजट पर चर्चा करने के लिए कार्यकारिणी की बैठक बुलायी थी। लेकिन ऐन वक्त पर महापौर को शहर से बाहर जाना पड़ा था। महापौर ने बैठक को स्थगित करने की सूचना बैठक शुरू होने से पहले ही टाउन हॉल में उपस्थित अधिकारियों को भिजवा दी थी। उसके बाद भी नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान सहित सभी अधिकारियों ने निगम एक्ट की धारा का हवाला देते हुए कार्यकारिणी सदस्यों में एक सभापति चुना और पुनरीक्षित बजट की बैठक करायी। जिसको नगरायुक्त अंतिम समय तक सही ठहराते रहे। जबकि महापौर ने उसी दिन बैठक को अवैध ठहरा दिया था। हालांकि दो दिन बाद ही निगम के अधिकारी बैकफुट पर आ गए। उन्होंने महापौर को पत्र भेजकर बजट बैठक बुलाने का निमंत्रण दे दिया।
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दो पालियों में होगी बैठक
महापौर ने छह मार्च को टाउन हॉल में साल 2018-19 की पुनरीक्षित बजट और साल 2019-20 के लिए मूल बजट पर चर्चा के लिए कार्यकारिणी की बैठक बुलायी है। दो पालियों में बैठक निश्चित की गयी है। यानी एक ही दिन में पुनरीक्षित और मूल बजट पास होना है।  
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अंतर से होनी चाहिए बैठक
नगर निगम एक्ट के मुताबिक एक ही दिन में पुनरीक्षित और मूल बजट बैठक बुलाया जाना उचित नहीं है। नियमानुसार तो दोनों ही बैठकों में कम से कम तीन माह का अंतर होना चाहिए। अब देखना यह है कि क्या एक ही दिन में होने वाली दोनों बैठक वैध होंगी या अवैध। इसको लेकर निगम अधिकारी कहीं निगम एक्ट की नई धारा तो नहीं तलाश लेंगे। बता दें कि इस बार साल 2019-20 का मूल बजट 557.12 करोड़ रुपये का पास किया जाना है। 
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