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सीओ व मजिस्ट्रेट बोले कभी नहीं भूल पाएंगे मेरठ का बवाल

Tue, 24 Dec 2019 02:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Dec 2019 02:18 AM IST
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The fuss of Meerut will never be forgotten
मेरठ। उपद्रव में फंसने वाले कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सोमवार को हापुड़ अड्डा चौराहे पर पुलिस फोर्स के सामने आपबीती सुनाई। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट संजय पांडेय और सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला ने कहा कि वे इस उपद्रव को कभी नहीं भुला जाएंगे।
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दोनों अधिकारियों ने कहा कि 20 दिसंबर को हापुड़ रोड पर सिटी हॉस्पिटल के पास से बवाल शुरू हुआ था। अलग-अलग स्थानों पर सैकड़ों की संख्या में उपद्रवियों ने पुलिस फोर्स पर हमला बोला था। हापुड़ रोड पर इंस्पेक्टर नौचंदी की गाड़ी पर हमला कर आगजनी की कोशिश की गई थी तो वे दोनों वहां पहुंचे थे। लेकिन वहां भीड़ बढ़ती गई थी। इस बीच सूचना मिली कि पास ही एक स्थान पर एक प्रशासनिक मजिस्ट्रेट, पीएसी के 30 प्रशिक्षु सिपाहियों और आरएएफ के दो जवानों को एक दुकान में बंधक बना लिया गया है। जब वे गली में पहुंचे तो उस तंग गली में उपद्रवियों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया था। उपद्रवी पुलिस पर निशाना साधकर गोली चला रहे थे, जबकि पुलिस हवा में फायरिंग कर रही थी। सीओ के अनुसार उन दृश्यों को भुलाया नहीं जा सकता, जिसमें सैकड़ों की संख्या में उपद्रवी आगजनी और फायरिंग कर रहे थे। वहां से बचने और भागने का कोई विकल्प नहीं था।
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आरएएफ ने मिर्ची बम से खदेड़ा
सीओ दिनेश शुक्ला के अनुसार ऐसे मौके पर वहां पहुंची आरएएफ ने उपद्रवियों को खदेड़ना शुरू किया। लेकिन उसके बाद भी उपद्रवी सीधे हमला कर रहे थे। आरएएफ के जवानों ने आंसू गैस और मिर्ची बम छोड़ने शुरू किए तो वहां चारों तरफ धुआं ही धुआं पसर गया। कुछ नजर नहीं आया। एक गोला तो उनके कान के पास से गया। इतना धुआं निकला और जलन हुई कि कुछ समझ ही नहीं आया। ऐसे लगा कि जैसे दम घुटने को है।
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... पीछे नहीं हटना है
सिटी मजिस्ट्रेट संजय पांडेय ने बताया कि मेरे साथ एक ही गनर था। बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट पहनकर डंडे से जूझ रहा था। आखिर तक मैं यही कहता रहा कि फोर्स आ रही है, पीछे नहीं हटना है। जब आरएएफ व पुलिस फोर्स आई तब हमने स्थिति को नियंत्रित किया। यह बवाल हमेशा याद रहेगा।

बहुत पत्थर लगे
सीओ ब्रह्मपुरी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि उपद्रव के दौरान शरीर में कई पत्थर लगे। कोई हेलमेट में लगता तो कोई पत्थर पीछे लगता। जान जोखिम में थी। आरएएफ के डिप्टी कमांडेंट संजय कुमार और असिस्टेंट कमांडेंट गौरव कुमार लगातार कह रहे थे कि पीछे नहीं हटना है। खत्ता रोड पर ऐसे हालात थे कि पीछे हट जाते तो उपद्रवी घेर लेते।
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