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भगवान की भक्ति को देखते हैं भगवान : अंश वशिष्ठ
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सम्राट पैलेस में चल रही श्रीमद्भागवत में सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राज राजेश्वरी मंडप सम्राट पैलेस गढ़ रोड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन बाल कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने भगवान श्रीकृष्ण के सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, दत्तात्रेय चरित्र की कथा सुनाई।कथा के दौरान भजन, कीर्तन और श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया।
कथा व्यास अंश वशिष्ठ ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निष्काम प्रेम की अनुपम मिसाल है। अत्यंत निर्धन होने के बावजूद सुदामा ने कभी भगवान से अपनी गरीबी दूर करने की मांग नहीं की। पत्नी के आग्रह पर वे चावल की पोटली लेकर द्वारका पहुंचे।भगवान ने सुदामा द्वारा कुछ मांगे बिना ही उनकी दरिद्रता दूर कर दी। उन्होंने कहा कि भगवान भक्त के धन को नहीं, उसके भाव को देखते हैं।
राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग में बताया गया कि जीवन के अंतिम सात दिनों में उन्होंने सांसारिक मोह त्यागकर पूरी श्रद्धा से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। भगवान के नाम, गुण और लीलाओं के श्रवण स्मरण से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। दत्तात्रेय चरित्र के माध्यम से पृथ्वी से धैर्य, वायु से आसक्ति रहित रहने और जल से पवित्रता जैसे जीवनोपयोगी गुण सीखने का संदेश दिया गया। कथा व्यास ने कहा कि सीखने की दृष्टि रखने वाले व्यक्ति के लिए पूरा संसार गुरु बन जाता है। कथा के अंतिम चरण में भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया।
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इस अवसर पर संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता, कमल दत्त शर्मा ने व्यास पीठ से आशीर्वाद लिया। आचार्य ध्रुव वशिष्ठ द्वारा कथा के मुख्य यजमान श्याम लाल तरीका एवं सोनिया, लक्ष्य और वंश के साथ सपरिवार व्यास पूजन कराया गया।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राज राजेश्वरी मंडप सम्राट पैलेस गढ़ रोड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन बाल कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने भगवान श्रीकृष्ण के सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, दत्तात्रेय चरित्र की कथा सुनाई।कथा के दौरान भजन, कीर्तन और श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया।
कथा व्यास अंश वशिष्ठ ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निष्काम प्रेम की अनुपम मिसाल है। अत्यंत निर्धन होने के बावजूद सुदामा ने कभी भगवान से अपनी गरीबी दूर करने की मांग नहीं की। पत्नी के आग्रह पर वे चावल की पोटली लेकर द्वारका पहुंचे।भगवान ने सुदामा द्वारा कुछ मांगे बिना ही उनकी दरिद्रता दूर कर दी। उन्होंने कहा कि भगवान भक्त के धन को नहीं, उसके भाव को देखते हैं।
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राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग में बताया गया कि जीवन के अंतिम सात दिनों में उन्होंने सांसारिक मोह त्यागकर पूरी श्रद्धा से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। भगवान के नाम, गुण और लीलाओं के श्रवण स्मरण से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। दत्तात्रेय चरित्र के माध्यम से पृथ्वी से धैर्य, वायु से आसक्ति रहित रहने और जल से पवित्रता जैसे जीवनोपयोगी गुण सीखने का संदेश दिया गया। कथा व्यास ने कहा कि सीखने की दृष्टि रखने वाले व्यक्ति के लिए पूरा संसार गुरु बन जाता है। कथा के अंतिम चरण में भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया।
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इस अवसर पर संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता, कमल दत्त शर्मा ने व्यास पीठ से आशीर्वाद लिया। आचार्य ध्रुव वशिष्ठ द्वारा कथा के मुख्य यजमान श्याम लाल तरीका एवं सोनिया, लक्ष्य और वंश के साथ सपरिवार व्यास पूजन कराया गया।