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कंडक्टर को घायल अवस्था में छोड़कर चला गया था चालक
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कंडक्टर को घायल अवस्था में छोड़कर चला गया था चालक
मेरठ। ट्रक ड्राइवर अपने ही कंडक्टर को एक्सीडेंट में लहूलुहान होने पर उसे छोड़कर दिल्ली चला गया था। 26 दिन बाद कंडक्टर संदीप की पहचान उसके परिजनों ने कपड़े और फोटो से की है। तभी ड्राइवर ने हादसे की बात बताई। पुलिस ने ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया।
एसओ टीपी नगर के अनुसार संदीप (28) पुत्र विनोद निवासी मलियाना टीपीनगर अपने मुंह बोले मामा ट्रक ड्राइवर उपेंद्र सिंह पुत्र वीरसेन निवासी महपा जानी के साथ 14 अक्तूबर को गाड़ी पर गया था। 26 अक्तूबर तक संदीप के परिजनों से फोन पर बातचीत होती रही है। उसके बाद उसका फोन स्विच ऑफ बताता था। सोमवार को संदीप के परिजन टीपी नगर थाने में पहुंचे और ड्राइवर उपेंद्र के खिलाफ हत्या का मुकदमा कराने की मांग करने लगे। पुलिस ने जब उपेंद्र से पूछताछ शुरू की तो उसने पूरा घटनाक्रम बताया। उसने बताया कि 27 अक्तूबर की शाम को परतापुर क्षेत्र में सुभाष ढाबे पर गाड़ी खड़ी करके खाना खाने के लिए रुके थे, तभी संदीप कहीं चला गया। खाना खाने के बाद जब वापस आया तो सड़क पर भीड़ लगी थी। संदीप रोड पर पड़ा था तभी पुलिस आ गई। पुलिस ने पूछा इसे कोई जानता है तो मैंने डर की वजह से मना कर दिया।
लेकिन डर की वजह से मैंने भी मना कर दिया और दिल्ली के चला गया। दो दिन इलाज के उसकी मौत हो गई। टीपी नगर थाने की पुलिस ने परतापुर पुलिस से संपर्क किया। तब जाकर पीड़ित परिजनों ने कपड़े और फोटो से थाने में संदीप की पहचान की। एएसपी कृष्ण विश्नोई का कहना है कि मौत के 3 दिन बाद नियमानुसार शव का पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने अंतिम संस्कार कर दिया था। ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में उसकी लापरवाही सामने आई है।
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मेरठ। ट्रक ड्राइवर अपने ही कंडक्टर को एक्सीडेंट में लहूलुहान होने पर उसे छोड़कर दिल्ली चला गया था। 26 दिन बाद कंडक्टर संदीप की पहचान उसके परिजनों ने कपड़े और फोटो से की है। तभी ड्राइवर ने हादसे की बात बताई। पुलिस ने ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया।
एसओ टीपी नगर के अनुसार संदीप (28) पुत्र विनोद निवासी मलियाना टीपीनगर अपने मुंह बोले मामा ट्रक ड्राइवर उपेंद्र सिंह पुत्र वीरसेन निवासी महपा जानी के साथ 14 अक्तूबर को गाड़ी पर गया था। 26 अक्तूबर तक संदीप के परिजनों से फोन पर बातचीत होती रही है। उसके बाद उसका फोन स्विच ऑफ बताता था। सोमवार को संदीप के परिजन टीपी नगर थाने में पहुंचे और ड्राइवर उपेंद्र के खिलाफ हत्या का मुकदमा कराने की मांग करने लगे। पुलिस ने जब उपेंद्र से पूछताछ शुरू की तो उसने पूरा घटनाक्रम बताया। उसने बताया कि 27 अक्तूबर की शाम को परतापुर क्षेत्र में सुभाष ढाबे पर गाड़ी खड़ी करके खाना खाने के लिए रुके थे, तभी संदीप कहीं चला गया। खाना खाने के बाद जब वापस आया तो सड़क पर भीड़ लगी थी। संदीप रोड पर पड़ा था तभी पुलिस आ गई। पुलिस ने पूछा इसे कोई जानता है तो मैंने डर की वजह से मना कर दिया।
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लेकिन डर की वजह से मैंने भी मना कर दिया और दिल्ली के चला गया। दो दिन इलाज के उसकी मौत हो गई। टीपी नगर थाने की पुलिस ने परतापुर पुलिस से संपर्क किया। तब जाकर पीड़ित परिजनों ने कपड़े और फोटो से थाने में संदीप की पहचान की। एएसपी कृष्ण विश्नोई का कहना है कि मौत के 3 दिन बाद नियमानुसार शव का पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने अंतिम संस्कार कर दिया था। ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में उसकी लापरवाही सामने आई है।
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