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Meerut News: परीक्षित-शुकदेव संवाद सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
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बहसूमा। तजपुरा गांव में भागवत कथा कृष्ण भक्त अमित जी का फोटो
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहसूमा। क्षेत्र के तजपुरा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथा पंडाल में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। वृंदावन से पधारे कथावाचक कृष्ण भक्त अमित महाराज ने व्यास गद्दी से राजा परीक्षित और शुकदेवजी के संवाद का मार्मिक वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
कथा वाचक ने बताया कि कैसे राजा परीक्षित ने शमीक ऋषि के गले में मरा सर्प डाल दिया। इससे क्रोधित होकर ऋषि पुत्र शृंगी ने श्राप दिया कि सात दिन में तक्षक नाग के डसने से राजा की मृत्यु हो जाएगी। श्राप सुनकर परीक्षित ने राजपाट त्याग दिया और मोक्ष के लिए गंगा तट पर आ गए। शुकदेवजी ने परीक्षित को समझाया कि भगवान के विराट रूप से ही ये सृष्टि बनी है। उन्होंने भगवान विष्णु की नाभि से ब्रह्माजी के जन्म और पंचतत्वों की उत्पत्ति का सुंदर वर्णन किया। चौदह लोकों की रचना सुनकर पंडाल राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक ने बताया कि जब हिरण्याक्ष पृथ्वी को रसातल में ले गया, तब भगवान ने वराह रूप धारण कर अपने दांतों पर पृथ्वी को स्थापित किया और दुष्ट हिरण्याक्ष का वध किया।
कृष्ण भक्त अमित ने कहा कि मौत का समय किसी को पता नहीं। राजा परीक्षित की तरह हमें भी हर पल भगवान का नाम लेना चाहिए। यही जीवन का सार है। उन्होंने विदुर और मैत्रेय ऋषि के संवाद की भूमिका भी बांधी। इस मौके समाजसेवी विपिन चपराना, अमित चपराना, आनंद बैसला, काशीराम, ओमकार सिंह, विनोद नागर, निर्भय राणा आदि का सहयोग रहा।
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बहसूमा। क्षेत्र के तजपुरा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथा पंडाल में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। वृंदावन से पधारे कथावाचक कृष्ण भक्त अमित महाराज ने व्यास गद्दी से राजा परीक्षित और शुकदेवजी के संवाद का मार्मिक वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
कथा वाचक ने बताया कि कैसे राजा परीक्षित ने शमीक ऋषि के गले में मरा सर्प डाल दिया। इससे क्रोधित होकर ऋषि पुत्र शृंगी ने श्राप दिया कि सात दिन में तक्षक नाग के डसने से राजा की मृत्यु हो जाएगी। श्राप सुनकर परीक्षित ने राजपाट त्याग दिया और मोक्ष के लिए गंगा तट पर आ गए। शुकदेवजी ने परीक्षित को समझाया कि भगवान के विराट रूप से ही ये सृष्टि बनी है। उन्होंने भगवान विष्णु की नाभि से ब्रह्माजी के जन्म और पंचतत्वों की उत्पत्ति का सुंदर वर्णन किया। चौदह लोकों की रचना सुनकर पंडाल राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक ने बताया कि जब हिरण्याक्ष पृथ्वी को रसातल में ले गया, तब भगवान ने वराह रूप धारण कर अपने दांतों पर पृथ्वी को स्थापित किया और दुष्ट हिरण्याक्ष का वध किया।
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कृष्ण भक्त अमित ने कहा कि मौत का समय किसी को पता नहीं। राजा परीक्षित की तरह हमें भी हर पल भगवान का नाम लेना चाहिए। यही जीवन का सार है। उन्होंने विदुर और मैत्रेय ऋषि के संवाद की भूमिका भी बांधी। इस मौके समाजसेवी विपिन चपराना, अमित चपराना, आनंद बैसला, काशीराम, ओमकार सिंह, विनोद नागर, निर्भय राणा आदि का सहयोग रहा।
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