{"_id":"68b4998647c8215e2b01c094","slug":"the-corporation-opened-a-paint-factory-in-the-community-center-the-citizens-became-helpless-meerut-news-c-30-1-smrt1053-157591-2025-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"निगम ने सामुदायिक केंद्र में खोल दी पेंट फैक्टरी, नागरिक हुए लाचार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निगम ने सामुदायिक केंद्र में खोल दी पेंट फैक्टरी, नागरिक हुए लाचार
Mon, 01 Sep 2025 12:20 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 01 Sep 2025 12:20 AM IST
विज्ञापन
सांवलपुर नवादा के सामुदायिक केंद्र में खोली गई पेंट फैक
- फोटो : संवाद
सहारनपुर। नगर निगम का काम नागरिकों को सुविधाएं देकर उनके जीवन को आसान बनाना है, लेकिन नगर निगम सहारनपुर का ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसमें उसने गरीब लोगों से सामुदायिक केंद्र की वह सुविधा छीन ली, जिसमें गरीब अपनी बेटी की शादी कर लेता था। इतना ही नहीं, नगर निगम ने सामुदायिक केंद्र में शुरू भी किया है तो गोबर से पेंट बनाने का काम।
मामला नगर निगम में शामिल गांव सांवलपुर नवादा का है। स्थानीय भाजपा पार्षद मोहर सिंह ने बताया कि नगर निगम में शामिल होने से पहले गांव आंबेडकर ग्राम था, जिसके प्रधान वही थे। बसपा सरकार में उन्होंने भागदौड़ कर गांव के लिए डॉ. आंबेडकर सामुदायिक केंद्र की मांग की थी। वर्ष 2009 में गांव में सामुदायिक केंद्र बनाया गया।
गांव में ज्यादातर मध्यम वर्ग के लोग रहते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी बेटियों की शादी और अन्य कार्यक्रमों के लिए अच्छा विकल्प मिल गया था, लेकिन जो सामुदायिक केंद्र ग्राम पंचायत की संपत्ति थी, नगर निगम में शामिल होने के बाद वह नगर निगम के अधीन आ गया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि करीब दो वर्ष पहले नगर निगम ने सामुदायिक केंद्र में जबरन गोबर से पेंट बनाने की फैक्टरी खोल दी। विरोध किया गया तो पार्षद को जेल भेजने की धमकी दी गई। ऐसे में ग्रामीण विरोध नहीं कर सके। पार्षद ने बताया कि पूर्व के नगर आयुक्त गजल भारद्वाज, संजय चौहान नया सामुदायिक केंद्र बनाकर देने का आश्वासन देते रहे, लेकिन आज तक कुछ नहीं मिला है।
विज्ञापन
मामला नगर निगम में शामिल गांव सांवलपुर नवादा का है। स्थानीय भाजपा पार्षद मोहर सिंह ने बताया कि नगर निगम में शामिल होने से पहले गांव आंबेडकर ग्राम था, जिसके प्रधान वही थे। बसपा सरकार में उन्होंने भागदौड़ कर गांव के लिए डॉ. आंबेडकर सामुदायिक केंद्र की मांग की थी। वर्ष 2009 में गांव में सामुदायिक केंद्र बनाया गया।
विज्ञापन
गांव में ज्यादातर मध्यम वर्ग के लोग रहते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी बेटियों की शादी और अन्य कार्यक्रमों के लिए अच्छा विकल्प मिल गया था, लेकिन जो सामुदायिक केंद्र ग्राम पंचायत की संपत्ति थी, नगर निगम में शामिल होने के बाद वह नगर निगम के अधीन आ गया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि करीब दो वर्ष पहले नगर निगम ने सामुदायिक केंद्र में जबरन गोबर से पेंट बनाने की फैक्टरी खोल दी। विरोध किया गया तो पार्षद को जेल भेजने की धमकी दी गई। ऐसे में ग्रामीण विरोध नहीं कर सके। पार्षद ने बताया कि पूर्व के नगर आयुक्त गजल भारद्वाज, संजय चौहान नया सामुदायिक केंद्र बनाकर देने का आश्वासन देते रहे, लेकिन आज तक कुछ नहीं मिला है।