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मौसम का बदलता मिजाज बिगाड़ रहा मेरठवासियों की सेहत

Thu, 14 Aug 2025 02:29 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 02:29 AM IST
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The changing mood of the weather is spoiling the health of Meerut residents
सुनील कैथवास....खराब मौसम ने बिगाड़ दी सेहत, जिला अस्पताल के पर्चा काउंटर पर लगी मरीजों की लाइन
मेरठ। मौसम में बदलाव हो रहा है। बारिश और उमस भरे मौसम के बीच तापमान में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव मेरठवासियों की सेहत पर दुष्प्रभाव डाल रहा है। जिला अस्पताल और लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। खासकर वायरल बुखार, नाक-कान गला रोग और सर्दी-जुकाम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बुधवार को दोनों अस्पतालों की ओपोडी में 4473 मरीज पहुंचे।
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चिकित्सकों का कहना है कि मौसम में बदलाव और पर्यावरणीय कारकों ने इन बीमारियों को बढ़ावा दिया है। पिछले कुछ दिनों से मेरठ में बारिश के साथ-साथ उमस और गर्मी का मिश्रित प्रभाव देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 12 से 17 अगस्त तक बारिश और बादल छाए रहने की संभावना है। इससे तापमान 32-34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा, लेकिन नमी का स्तर 55-70 प्रतिशत तक होने से उमस बढ़ रही है। यह मौसम मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल है। इससे डेंगू और मलेरिया जैसे रोगों का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा जलभराव और गंदगी ने बैक्टीरिया और वायरस को पनपने का मौका दिया है। इससे वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
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लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के फिजिशियन डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि उनकी ओपीडी में प्रतिदिन 500 मरीज आ रहे हैं। इनमें से करीब 100 मरीज वायरल बुखार से पीड़ित हैं।
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फिजिशियन डॉ. वीके बिंद्रा का कहना है कि मच्छर जनित बीमारियों के अलावा, सर्दी-जुकाम, गले में खराश, और एलर्जी की समस्याएं भी बढ़ रही हैं। मौसम में बार-बार बदलाव के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। इससे बच्चों और बुजुर्गों को अधिक परेशानी हो रही है। फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि बारिश के मौसम में जलभराव और दूषित पानी वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का प्रमुख कारण बन रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मच्छरदानी का उपयोग, साफ-सफाई और शुद्ध पेयजल का सेवन इस मौसम में जरूरी है।

सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास जलभराव न होने दें। मच्छर भगाने के उपाय अपनाएं और बिना चिकित्सक की सलाह के दवाएं न लें। मौसम का यह मिजाज अगस्त के अंत तक बना रह सकता है। सतर्कता ही बचाव है।
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