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जर्जर हो गया आयुर्वेदिक चिकित्सालय का भवन
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1ए - आयुर्वेदिक चिकित्सक की बिल्डिंग जर्जर अवस्था में। (हस्तिनापुर)
- फोटो : MAWANA
जर्जर हो गया आयुर्वेदिक चिकित्सालय का भवन
हस्तिनापुर। कस्बे में धनवंतरि के आयुर्वेद चिकित्सालय का बुरा हाल है। सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति का दायरा बढ़ने के बजाय घट रहा है। कस्बे में मौजूद राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की बिल्डिंग की हालत जर्जर हो चुकी है और मूलभूत सुविधाओं का भी टोटा है।
आयुर्वेद चिकित्सालय में रोजाना जोखिम उठाकर चिकित्सक मरीजों का उपचार करते हैं। जर्जर हो चुकी छत का सीमेंट छुटकर गिरने लगा है। कोई दूसरी जगह न होने के चलते भी चिकित्सक उसी भवन में बैठने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक बिल्डिंग की हालत देखकर हर समय खतरा बना रहता है। लोगों की माने तो सरकार हर बार बजट में स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों व सीएचसी केंद्रों को हाइटैक बनाने की बात कहती है। लेकिन देहात क्षेत्र में धनवंतरी की आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की बेकार हालत को सुधाने के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठाए जाते हैं। कस्बे में स्थित इस भवन की दीवारों में दरारें पड़ गईं हैं। हर रोज क्षेत्र के 70 से 80 मरीज आयुर्वेद पद्धति से अपना इलाज कराने आते हैं। अस्पताल में 4 बेड की सुविधा भी उपलब्ध है। उसके बाद भी विभाग इस बिल्डिंग से अनजान बना हुआ है।
इनका कहना
बिल्डिंग की स्थिति के बारे में विभागीय अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। - डॉ. अजय पाल सिंह प्रभारी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हस्तिनापुर
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हस्तिनापुर। कस्बे में धनवंतरि के आयुर्वेद चिकित्सालय का बुरा हाल है। सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति का दायरा बढ़ने के बजाय घट रहा है। कस्बे में मौजूद राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की बिल्डिंग की हालत जर्जर हो चुकी है और मूलभूत सुविधाओं का भी टोटा है।
आयुर्वेद चिकित्सालय में रोजाना जोखिम उठाकर चिकित्सक मरीजों का उपचार करते हैं। जर्जर हो चुकी छत का सीमेंट छुटकर गिरने लगा है। कोई दूसरी जगह न होने के चलते भी चिकित्सक उसी भवन में बैठने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक बिल्डिंग की हालत देखकर हर समय खतरा बना रहता है। लोगों की माने तो सरकार हर बार बजट में स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों व सीएचसी केंद्रों को हाइटैक बनाने की बात कहती है। लेकिन देहात क्षेत्र में धनवंतरी की आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की बेकार हालत को सुधाने के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठाए जाते हैं। कस्बे में स्थित इस भवन की दीवारों में दरारें पड़ गईं हैं। हर रोज क्षेत्र के 70 से 80 मरीज आयुर्वेद पद्धति से अपना इलाज कराने आते हैं। अस्पताल में 4 बेड की सुविधा भी उपलब्ध है। उसके बाद भी विभाग इस बिल्डिंग से अनजान बना हुआ है।
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इनका कहना
बिल्डिंग की स्थिति के बारे में विभागीय अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। - डॉ. अजय पाल सिंह प्रभारी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हस्तिनापुर

1एफ - आयुर्वेदिक चिकित्सक की बिल्डिंग का जगह जगह से उखडा प्लास्टर। (हस्तिनापुर)- फोटो : MAWANA
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