फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार
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मेरठ में एसडीएम मवाना ने तहसील अधिकारियों तथा पुलिस फोर्स के साथ छापा मारकर फर्जी मार्कशीट, विभिन्न समिति सचिव आदि की मुहरें और अन्य कागजात बरामद कर लिए। दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह कई मामलों में धोखाधड़ी के लिए फर्जी तरह से कागजात तैयार कर रहा था।
एसडीएम अंकुर श्रीवास्तव को एक अधिवक्ता ने जानकारी दी थी कि नगर में कुछ लोगों द्वारा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। बैंक की फर्द तैयार कर फर्जी तरीके से ऋण चढ़ाया जा रहा है। वकील की मुहर फर्जी लगाई हुई थी। यह मामला बैंक द्वारा ऋण की जांच करने पर सामने आया। जिस पर जानकारी करने के बाद एसडीएम ने पुलिस फोर्स के साथ पीएनबी के पास क्लासिक स्क्रीन प्रिंटर पर छापा मारा। यहां पर दुकान मालिक जावेद पुत्र शरीफ अहमद को गिरफ्तार कर लिया।
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दुकान की तलाशी लेने पर काफी तादाद में विभिन्न अधिकारियों, स्कूल आदि की मुहरें मिलीं। जावेद ने बताया कि वह तो दूसरे की मुहर तैयार करता है। जिसके बाद झब्बर मंडी के पास स्थित न्यू पब्लिक प्रेस पर छापा मारकर वहां बैठे प्रेस मालिक इकरार पुत्र अनवार अहमद को गिरफ्तार कर लिया। जहां से माध्यमिक शिक्षा परिषद् उत्तर प्रदेश की इंटरमीडिएट की 2006 की खाली मार्कशीट, फर्जी सनद, मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ और चौधरी चरण सिंह विवि की फर्जी मार्कशीट के अलावा कई स्कूलों के रिजल्ट कार्ड, जिला सहकारी बैंक, कई अधिवक्ताओं आदि की मुहर मिलीं। पुलिस ने एक कंप्यूटर भी कब्जे में ले लिया। इंस्पेक्टर मवाना ने बताया कि इस संबंध में रजिस्ट्रार कानूनगो विजेंद्र कुमार की तहरीर पर इकरार और जावेद के खिलाफ फर्जी फर्द और अभिलेख बनाने का केस दर्ज किया गया है।
पांच हजार रुपये में फर्जी मार्कशीट
आरोपियों ने बताया कि वह फर्जी मार्कशीट को पांच हजार रुपये में तैयार कर रहे थे। यह गिरोह पिछले तीन-चार माह से फर्जी तरह से ये फर्जी मार्कशीट तैयार कर रहा था। जावेद ने बताया कि दो-तीन माह से एक व्यक्ति उनके पास आता था, जो मुहर लगवाकर उनसे ले जाता है। जिसकी एवज में उसे 50-100 रुपये मिलते थे। जबकि दूसरा आरोपी इकरार बार-बार पुलिस को गुमराह करता रहा।
जमीन की फर्जी खतौनी
एसपी देहात राजेश कुमार ने बताया कि आरोपी युवकों से पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह जमीन की फर्जी खतौनी कंप्यूटर से तैयार कर रहा था। फर्जी खतौनी के आधार पर बैंक से लोन लेना, जमीन बेचना-खरीदना और कृषि कार्ड पर लोन लेने के लिए जमीन के फर्जी कागजात तैयार किए जा रहे थे।
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