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गंगा में डूबे शिक्षक का शव 30 घंटे बाद मिला
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गंगा में डूबे शिक्षक का शव 30 घंटे बाद मिला
हस्तिनापुर। गंगा में नाव हादसे के बाद से लापता प्राइमरी शिक्षक महेश चंद शर्मा (45)का शव 30 घंटे बाद एसडीआरएफ के गोताखोरों ने तलाश लिया है। मंगलवार को ही मजदूर मोनू शर्मा का शव मिला था। नाव में सवार शेष 13 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था। बुधवार को तलाशी अभियान रोक दिया गया है। अफसरों ने कहा कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि नाव में इन 15 लोगों के अलावा कोई और भी था।
हस्तिनापुर को चांदपुर से जोड़ने वाले गंगा पुल की एप्रोच रोड 28 जुलाई को पानी की तेज धारा में बह गई थी। तभी से प्रतिदिन सैंकड़ों कर्मचारी, शिक्षक, किसान, मजदूर यहां अवैध रूप से चल रही नाव में सवार होकर नदी पार करते थे। मंगलवार सुबह 7:30 बजे गंगा पुल के पिलर से टकराकर नाव पलट गई थी। डीएम दीपक मीणा के मुताबिक नाव में 15 लोग सवार थे। इनमें से 13 को स्थानीय लोगों और स्टीमर सवार हरीश एवं सतपाल ने बचा लिया था। जानी क्षेत्र के रावा गांव निवासी मजदूर मोनू शर्मा का शव मिल गया था। गंगा में डूबे हस्तिनापुर की भीमनगर कॉलोनी निवासी शिक्षक महेश चंद शर्मा पुत्र बलवंत नहीं मिल सके थे। मंगलवार रात में तलाशी अभियान रोक दिया गया था। बुधवार को सूर्यादय के साथ ही एसडीआरएफ और पीएसी की फ्लड कंपनी गंगा में उतारी गई। करीब 5 घंटे तक लगातार सर्च ऑपरेशन चलता रहा परंतु टीम उसे ढूंढने में नाकाम रही। उसके बाद स्थानीय गोताखोर हरीश, बब्बू, कुलदीप और सतपाल स्टीमर के साथ गंगा में उतरे। कुछ देर बाद ही इन्हें बधवा गांव के पास शिक्षक महेश चंद का शव बरामद हुआ। उन्होंने इसकी सूचना एसडीएम मवाना को दी और शव अफसरों को सौंप दिया।
शिक्षक का शव देख मची चीख-पुकार
शिक्षक महेश चंद शर्र्मा के परिजन नाव हादसे की सूचना के बाद ही गंगा घाट पर पहुंच गए थे। महेश के पांच बेटे और पत्नी सरोज रात भर गंगा किनारे ही बैठे ईश्वर से प्रार्थना करते रहे। बुधवार को जैसे ही शव मिला तो उनकी उम्मीदें टूट गईं। पूरा परिवार बिलखने लगा। रिश्तेदार और स्थानीय लोग उन्हें सांत्वना देते रहे। पोस्टमार्टम के बाद कर्ण घाट पर देर शाम पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में महेश चंद का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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लोग बोले और भी लोग डूबे
इस घटना के चश्मदीद और नाव हादसे में सुरक्षित बचे कस्बे के जलीलपुर ब्लॉक में प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में तैनात शिक्षक देवेंद्र सिंह ने बताया कि एक नई होंडा मोटरसाइकिल पर आए दो लोग भी नाव में बैठे थे। इनकी आयु 50 से ज्यादा थे और वे उनसे कुछ दूरी पर थे। देवेंद्र ने बताया कि इन दो लोगों के भी डूबे होने की संभावना है। ये दो लोग कौन थे और कहां से आए थे इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
नाव से बंधे भैंसे की एक दिन पहले हुई थी मौत
स्थानीय लोगों ने बताया कि बिजनौर के स्याली गांव निवासी एक व्यक्ति ने हस्तिनापुर के गांव फाजलपुर से 60 हजार रुपये में एक भैंसा खरीदा था। मालिक नाव में बैठ गया। उसने भैंसे का रस्सा नाव में बांध लिया। जब नाव गंगा के बीच में पहुंची तो भैंसा तैरते हुए थक गया और डूबने लगा। इससे नाव भी अनियंत्रित होने लगी। लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए भैंसे का रस्सा खोल दिया। इसके बाद नाव आगे चली गई और भैंसा डूब गया।
जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई, पीड़ितों को मिलें 50-50 लाख: रालोद
हस्तिनापुर पहुंचे पार्टी नेता, बोले पुल की एप्रोच रोड बन जाती तो न जातीं जानें
कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर एसीएम को सौंप ज्ञापन
हस्तिनापुर।
रालोद नेताओं ने बुधवार को भीकुंड गंगा घाट जाकर एप्रोच रोड का हाल देखा पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। बाद में डीएम दफ्तर पर प्रदर्शन कर पीड़ित परिवारों को 50-50 लाख मुआवजे की मांग की। वहीं दूसरी तरफ हस्तिनापुर के पूर्व विधायक गोपाल काली ने कहा कि एप्रोच रोड में करोड़ों का घोटाला हुआ है। इसकी जांच होनी चाहिए।
चौधरी यशवीर सिंह ने हस्तिनापुर गेस्ट हाउस में प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि दिवाली के पहले अफसरों की लापरवाही से दो घरों में अंधेरा हो गया है। इन पर कार्रवाई हो और पुल में भ्रष्टाचार की जांच की जाए। इस मौके पर मतलूब गौड़, जसवीर सिंह, हरेंद्र चौधरी, मनपाल तोमर, नीटू राठी, धर्मपाल गिरी, संजय जाटव आदि थे। वहीं पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा, डॉ. राजकुमार सांगवान, पूर्व विधायक विनोद हरित, विनय मल्लापुर ने कलक्ट्रेट में ज्ञापन देकर नाव हादसे के लिए मंत्रियों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कई माह से गंगा नदी पर बना पुल टूटा पड़ा है, लेकिन इसकी जांच अभी तक नहीं हो पाई है।
भाकियू तोमर ने किया लखनऊ में प्रदर्शन
भाकियू तोमर के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर ने लखनऊ में विधानसभा पर प्रदर्शन कर नाव हादसे में सख्त कार्रवाई और एप्रोच रोड व तटबंध बनाने की मांग की। इस मौके पर पवन त्यागी, राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतिनिधि, नरेंद्र गाडीना, पदम सिंह, निखिल चौधरी, अखिलेश चौधरी, युवा मण्डल अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह जयंत, डॉ ब्रजमोहन आदि मौजूद थे।
नाविकों की तलाश में पुलिस ने दी दबिश
हस्तिनापुर से चांदपुर के बीच नाव अवैध रूप से चल रही थी। हादसे के वक्त नाव चला रहे बधवा निवासी बंटी और हस्तिनापुर निवासी सुधीर की तलाश में पुलिस ने दबिश दी है। दोनों ही हाथ नहीं आए।
गंगा में हिचकोले खाती नाव पर हर रोज दांव पर जिंदगी
खेती के लिए बिजनौर और मेरठ के किसान करते हैं नदी पार
पुल की एप्रोच रोड टूटने के बाद बिजनौर होते हुए चांदपुर जाने में तय करना पड़ता है 110 किमी का सफर
चांदपुर-हस्तिनापुर के बीच की दूरी पुल बनने के बाद रह गई थी 25 किमी
रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। नाव हादसे के बाद चांदपुर और हस्तिनापुर क्षेत्र के किसानों में दहशत है। गंगा पुल की एप्रोच रोड 28 जुलाई को पानी की तेज धार में बह गई थी। तभी से दोनों तरफ के किसान नाव के जरिये ही गंगा पार करते हैं।
पुल की एप्रोच रोड बहने के बाद किसानों को चांदपुर से हस्तिनापुर की तरफ खेती के लिए आने-जाने के लिए बिजनौर होते हुए 110 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा। इसमें खर्च भी बढ़ता है और समय भी लगता है। समय और पैसे की बचत के लिए ही किसान नाव में ट्रैक्टर, बुग्गी, बाइक आदि रखकर गंगा पार करते हैं। अब किसानों के सामने संकट ये है कि खेती कैसे करें।चांदपुर की और बधवा गांव गंगा के टापू पर है जहां करीब200 लोग रहते हैं। इनके सामने भी बड़ा संकट है। सिरजेपुर के ग्राम प्रधान रणवीर सिंह, दूधली के ग्राम प्रधान बालेश्वर सिंह ने बताया कि गंगा पुल की एप्रोच रोड बन जाती तो दो जानें न जातीं। नाव हादसे में बची बधवा निवासी रविंद्रा ने बताया कि उनका बेटा हस्तिनापुर की मनोहरपुर कॉलोनी में रहता है। उन जैसे बधवा गांव के करीब 200 लोगों के लिए तो नाव ही सहारा है। नाव में सवार मनीष ने बताया कि घाट से चलते ही नाव हिचकोले खाने लगी थी। उनके दिल से हादसे का भय निकल नहीं पा रहा है। संवाद
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हस्तिनापुर। गंगा में नाव हादसे के बाद से लापता प्राइमरी शिक्षक महेश चंद शर्मा (45)का शव 30 घंटे बाद एसडीआरएफ के गोताखोरों ने तलाश लिया है। मंगलवार को ही मजदूर मोनू शर्मा का शव मिला था। नाव में सवार शेष 13 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था। बुधवार को तलाशी अभियान रोक दिया गया है। अफसरों ने कहा कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि नाव में इन 15 लोगों के अलावा कोई और भी था।
हस्तिनापुर को चांदपुर से जोड़ने वाले गंगा पुल की एप्रोच रोड 28 जुलाई को पानी की तेज धारा में बह गई थी। तभी से प्रतिदिन सैंकड़ों कर्मचारी, शिक्षक, किसान, मजदूर यहां अवैध रूप से चल रही नाव में सवार होकर नदी पार करते थे। मंगलवार सुबह 7:30 बजे गंगा पुल के पिलर से टकराकर नाव पलट गई थी। डीएम दीपक मीणा के मुताबिक नाव में 15 लोग सवार थे। इनमें से 13 को स्थानीय लोगों और स्टीमर सवार हरीश एवं सतपाल ने बचा लिया था। जानी क्षेत्र के रावा गांव निवासी मजदूर मोनू शर्मा का शव मिल गया था। गंगा में डूबे हस्तिनापुर की भीमनगर कॉलोनी निवासी शिक्षक महेश चंद शर्मा पुत्र बलवंत नहीं मिल सके थे। मंगलवार रात में तलाशी अभियान रोक दिया गया था। बुधवार को सूर्यादय के साथ ही एसडीआरएफ और पीएसी की फ्लड कंपनी गंगा में उतारी गई। करीब 5 घंटे तक लगातार सर्च ऑपरेशन चलता रहा परंतु टीम उसे ढूंढने में नाकाम रही। उसके बाद स्थानीय गोताखोर हरीश, बब्बू, कुलदीप और सतपाल स्टीमर के साथ गंगा में उतरे। कुछ देर बाद ही इन्हें बधवा गांव के पास शिक्षक महेश चंद का शव बरामद हुआ। उन्होंने इसकी सूचना एसडीएम मवाना को दी और शव अफसरों को सौंप दिया।
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शिक्षक का शव देख मची चीख-पुकार
शिक्षक महेश चंद शर्र्मा के परिजन नाव हादसे की सूचना के बाद ही गंगा घाट पर पहुंच गए थे। महेश के पांच बेटे और पत्नी सरोज रात भर गंगा किनारे ही बैठे ईश्वर से प्रार्थना करते रहे। बुधवार को जैसे ही शव मिला तो उनकी उम्मीदें टूट गईं। पूरा परिवार बिलखने लगा। रिश्तेदार और स्थानीय लोग उन्हें सांत्वना देते रहे। पोस्टमार्टम के बाद कर्ण घाट पर देर शाम पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में महेश चंद का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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इस घटना के चश्मदीद और नाव हादसे में सुरक्षित बचे कस्बे के जलीलपुर ब्लॉक में प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में तैनात शिक्षक देवेंद्र सिंह ने बताया कि एक नई होंडा मोटरसाइकिल पर आए दो लोग भी नाव में बैठे थे। इनकी आयु 50 से ज्यादा थे और वे उनसे कुछ दूरी पर थे। देवेंद्र ने बताया कि इन दो लोगों के भी डूबे होने की संभावना है। ये दो लोग कौन थे और कहां से आए थे इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
नाव से बंधे भैंसे की एक दिन पहले हुई थी मौत
स्थानीय लोगों ने बताया कि बिजनौर के स्याली गांव निवासी एक व्यक्ति ने हस्तिनापुर के गांव फाजलपुर से 60 हजार रुपये में एक भैंसा खरीदा था। मालिक नाव में बैठ गया। उसने भैंसे का रस्सा नाव में बांध लिया। जब नाव गंगा के बीच में पहुंची तो भैंसा तैरते हुए थक गया और डूबने लगा। इससे नाव भी अनियंत्रित होने लगी। लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए भैंसे का रस्सा खोल दिया। इसके बाद नाव आगे चली गई और भैंसा डूब गया।
जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई, पीड़ितों को मिलें 50-50 लाख: रालोद
हस्तिनापुर पहुंचे पार्टी नेता, बोले पुल की एप्रोच रोड बन जाती तो न जातीं जानें
कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर एसीएम को सौंप ज्ञापन
हस्तिनापुर।
रालोद नेताओं ने बुधवार को भीकुंड गंगा घाट जाकर एप्रोच रोड का हाल देखा पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। बाद में डीएम दफ्तर पर प्रदर्शन कर पीड़ित परिवारों को 50-50 लाख मुआवजे की मांग की। वहीं दूसरी तरफ हस्तिनापुर के पूर्व विधायक गोपाल काली ने कहा कि एप्रोच रोड में करोड़ों का घोटाला हुआ है। इसकी जांच होनी चाहिए।
चौधरी यशवीर सिंह ने हस्तिनापुर गेस्ट हाउस में प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि दिवाली के पहले अफसरों की लापरवाही से दो घरों में अंधेरा हो गया है। इन पर कार्रवाई हो और पुल में भ्रष्टाचार की जांच की जाए। इस मौके पर मतलूब गौड़, जसवीर सिंह, हरेंद्र चौधरी, मनपाल तोमर, नीटू राठी, धर्मपाल गिरी, संजय जाटव आदि थे। वहीं पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा, डॉ. राजकुमार सांगवान, पूर्व विधायक विनोद हरित, विनय मल्लापुर ने कलक्ट्रेट में ज्ञापन देकर नाव हादसे के लिए मंत्रियों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कई माह से गंगा नदी पर बना पुल टूटा पड़ा है, लेकिन इसकी जांच अभी तक नहीं हो पाई है।
भाकियू तोमर ने किया लखनऊ में प्रदर्शन
भाकियू तोमर के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर ने लखनऊ में विधानसभा पर प्रदर्शन कर नाव हादसे में सख्त कार्रवाई और एप्रोच रोड व तटबंध बनाने की मांग की। इस मौके पर पवन त्यागी, राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतिनिधि, नरेंद्र गाडीना, पदम सिंह, निखिल चौधरी, अखिलेश चौधरी, युवा मण्डल अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह जयंत, डॉ ब्रजमोहन आदि मौजूद थे।
नाविकों की तलाश में पुलिस ने दी दबिश
हस्तिनापुर से चांदपुर के बीच नाव अवैध रूप से चल रही थी। हादसे के वक्त नाव चला रहे बधवा निवासी बंटी और हस्तिनापुर निवासी सुधीर की तलाश में पुलिस ने दबिश दी है। दोनों ही हाथ नहीं आए।
गंगा में हिचकोले खाती नाव पर हर रोज दांव पर जिंदगी
खेती के लिए बिजनौर और मेरठ के किसान करते हैं नदी पार
पुल की एप्रोच रोड टूटने के बाद बिजनौर होते हुए चांदपुर जाने में तय करना पड़ता है 110 किमी का सफर
चांदपुर-हस्तिनापुर के बीच की दूरी पुल बनने के बाद रह गई थी 25 किमी
रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। नाव हादसे के बाद चांदपुर और हस्तिनापुर क्षेत्र के किसानों में दहशत है। गंगा पुल की एप्रोच रोड 28 जुलाई को पानी की तेज धार में बह गई थी। तभी से दोनों तरफ के किसान नाव के जरिये ही गंगा पार करते हैं।
पुल की एप्रोच रोड बहने के बाद किसानों को चांदपुर से हस्तिनापुर की तरफ खेती के लिए आने-जाने के लिए बिजनौर होते हुए 110 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा। इसमें खर्च भी बढ़ता है और समय भी लगता है। समय और पैसे की बचत के लिए ही किसान नाव में ट्रैक्टर, बुग्गी, बाइक आदि रखकर गंगा पार करते हैं। अब किसानों के सामने संकट ये है कि खेती कैसे करें।चांदपुर की और बधवा गांव गंगा के टापू पर है जहां करीब200 लोग रहते हैं। इनके सामने भी बड़ा संकट है। सिरजेपुर के ग्राम प्रधान रणवीर सिंह, दूधली के ग्राम प्रधान बालेश्वर सिंह ने बताया कि गंगा पुल की एप्रोच रोड बन जाती तो दो जानें न जातीं। नाव हादसे में बची बधवा निवासी रविंद्रा ने बताया कि उनका बेटा हस्तिनापुर की मनोहरपुर कॉलोनी में रहता है। उन जैसे बधवा गांव के करीब 200 लोगों के लिए तो नाव ही सहारा है। नाव में सवार मनीष ने बताया कि घाट से चलते ही नाव हिचकोले खाने लगी थी। उनके दिल से हादसे का भय निकल नहीं पा रहा है। संवाद