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रामपुर तिराहा कांड में आरोपी सिपाही को पहचाना
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मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड के चश्मदीद मजदूर ने 31 साल बाद सिपाही कुशलपाल की पहचान की है। इससे पहले तीन सिपाहियों की पहचान की गई थी।
सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी की पत्रावली की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-9 में हुई। खतौली क्षेत्र के गांव का 58 वर्षीय मजदूर की सुरक्षा के गवाही हुई। अदालत में पेश हुए सिपाही कुशलपाल की पहचान की। इससे पहले 28 जुलाई को कृपाल सिंह, राकेश कुमार और वीरेंद्र कुमार की पहचान की। अगली सुनवाई के लिए 12 अगस्त नियत की गई। उधर, एसपी मिश्रा और बृज किशोर की पत्रावली में भी सुनवाई के लिए 13 अगस्त नियत की गई।
क्या था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। आरोप है कि महिला आंदोलनकारियों के साथ छेड़खानी और दुष्कर्म किया। उत्तराखंड संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे, जिसकी सुनवाई चल रही है।
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सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी की पत्रावली की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-9 में हुई। खतौली क्षेत्र के गांव का 58 वर्षीय मजदूर की सुरक्षा के गवाही हुई। अदालत में पेश हुए सिपाही कुशलपाल की पहचान की। इससे पहले 28 जुलाई को कृपाल सिंह, राकेश कुमार और वीरेंद्र कुमार की पहचान की। अगली सुनवाई के लिए 12 अगस्त नियत की गई। उधर, एसपी मिश्रा और बृज किशोर की पत्रावली में भी सुनवाई के लिए 13 अगस्त नियत की गई।
क्या था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। आरोप है कि महिला आंदोलनकारियों के साथ छेड़खानी और दुष्कर्म किया। उत्तराखंड संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे, जिसकी सुनवाई चल रही है।
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