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ग्रामीणों की आंखों में आंसू बोले बाढ़ ने छीन ली रोजी-रोटी
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गांव के स्कूल में भरा पानी स्रोत संवाद
रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। इन दिनों खादर क्षेत्र आई बाढ़ के चलते कई गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है। गांव के लोग जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उनकी आंखों में आंसू हैं। किसानों ने कहा कि बाढ़ ने उनकी जमीनों को तबाह कर दिया और रोजी-रोटी छीन ली।
ग्रामीण राजपाल सिंह, ओसपल, अंगपाल आदि ने बताया कि हालात बेहद दयनीय हो गए हैं। बाढ़ के पानी से फसलें और पशु भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बस्तौरा दूधली, मखदुमपुर गांव की गलियों और घरों तक पानी भर चुका है। लोग गांव छोड़ने को मजबूर हैं। गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। अब भी कई परिवार ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य नजर नहीं आ रहा है।
लोग अपने जीवन, घर और रोजी-रोटी की लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रशासन की ओर से राहत सामग्री वितरित करने के दावे किए गए हैं। अब सवाल यह है कि कब तक यह लोग सिर्फ राहत सामग्री पर जिंदा रहेंगे। गांव में आधे से अधिक हिस्से की बिजली सप्लाई भी पूरी तरह बंद है। इस बाढ़ ने उन्हें बर्बाद कर दिया। अब उन्हें हालात सामान्य होने का इंतजार है।
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हर बार मिला आश्वासन, नहीं बन पाया पक्का बांध
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में गंगा किनारे बसे कई गांव उजड़ चुके हैं और अब कई उजड़ने की कगार पर हैं। हस्तिनापुर के बस्तोरा नारंग और परीक्षितगढ़ के साधु नांगली क्षेत्र में लोग अपने घरों को छोड़कर पलायन करने लगे हैं। ग्रामीण इंद्रजीत सिंह जयंत, गुरजीत सिंह, जग्गा सिंह, जगतार सिंह, राजकुमार, राजू आदि ग्रामीणों ने बताया कि फतेहपुर प्रेम से गंगा पुल तक तो 73 करोड़ की परियोजना से बांध बन गया। पर उनके गांव के सामने पक्के बांध का आश्वासन सुनते हुए 40 वर्ष बीत गए हैं लेकिन न तो बांध बन पाया और न ही बाढ़ रोकने का कोई अन्य प्रबंध हो पाया। बाढ़ ने एक बार फिर सरकार व प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
तीन वर्ष बाद हरे हुए बाढ़ के जख्म
15 अगस्त 2023 को भी खादर क्षेत्र में बाढ़ आई थी। दो साल पहले आई बाढ़ ने जो जख्म खादर क्षेत्र के हजारों लोगों को दिए थे। वह एक बार फिर हरे हो गए हैं। गत 6 अगस्त को करीब चार लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया था। इस कारण ग्रामीणों को दो सप्ताह तक बाढ़ का सामना करना पड़ था। ग्रामीणों के घरों में पानी भर गया था। तीन वर्ष में दो बार बाढ़ के हालात के बाद खादर क्षेत्र लोगों की करोड़ो रुपयों की फसल और सामान खराब हो गया है।
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हस्तिनापुर। इन दिनों खादर क्षेत्र आई बाढ़ के चलते कई गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है। गांव के लोग जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उनकी आंखों में आंसू हैं। किसानों ने कहा कि बाढ़ ने उनकी जमीनों को तबाह कर दिया और रोजी-रोटी छीन ली।
ग्रामीण राजपाल सिंह, ओसपल, अंगपाल आदि ने बताया कि हालात बेहद दयनीय हो गए हैं। बाढ़ के पानी से फसलें और पशु भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बस्तौरा दूधली, मखदुमपुर गांव की गलियों और घरों तक पानी भर चुका है। लोग गांव छोड़ने को मजबूर हैं। गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। अब भी कई परिवार ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य नजर नहीं आ रहा है।
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लोग अपने जीवन, घर और रोजी-रोटी की लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रशासन की ओर से राहत सामग्री वितरित करने के दावे किए गए हैं। अब सवाल यह है कि कब तक यह लोग सिर्फ राहत सामग्री पर जिंदा रहेंगे। गांव में आधे से अधिक हिस्से की बिजली सप्लाई भी पूरी तरह बंद है। इस बाढ़ ने उन्हें बर्बाद कर दिया। अब उन्हें हालात सामान्य होने का इंतजार है।
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हर बार मिला आश्वासन, नहीं बन पाया पक्का बांध
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में गंगा किनारे बसे कई गांव उजड़ चुके हैं और अब कई उजड़ने की कगार पर हैं। हस्तिनापुर के बस्तोरा नारंग और परीक्षितगढ़ के साधु नांगली क्षेत्र में लोग अपने घरों को छोड़कर पलायन करने लगे हैं। ग्रामीण इंद्रजीत सिंह जयंत, गुरजीत सिंह, जग्गा सिंह, जगतार सिंह, राजकुमार, राजू आदि ग्रामीणों ने बताया कि फतेहपुर प्रेम से गंगा पुल तक तो 73 करोड़ की परियोजना से बांध बन गया। पर उनके गांव के सामने पक्के बांध का आश्वासन सुनते हुए 40 वर्ष बीत गए हैं लेकिन न तो बांध बन पाया और न ही बाढ़ रोकने का कोई अन्य प्रबंध हो पाया। बाढ़ ने एक बार फिर सरकार व प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
तीन वर्ष बाद हरे हुए बाढ़ के जख्म
15 अगस्त 2023 को भी खादर क्षेत्र में बाढ़ आई थी। दो साल पहले आई बाढ़ ने जो जख्म खादर क्षेत्र के हजारों लोगों को दिए थे। वह एक बार फिर हरे हो गए हैं। गत 6 अगस्त को करीब चार लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया था। इस कारण ग्रामीणों को दो सप्ताह तक बाढ़ का सामना करना पड़ था। ग्रामीणों के घरों में पानी भर गया था। तीन वर्ष में दो बार बाढ़ के हालात के बाद खादर क्षेत्र लोगों की करोड़ो रुपयों की फसल और सामान खराब हो गया है।

गांव के स्कूल में भरा पानी स्रोत संवाद

गांव के स्कूल में भरा पानी स्रोत संवाद